Monday, October 14, 2019
Follow us on
Download Mobile App
Revolutionary Poems
आम आदमी तो आम होता है...

कभी गुस्सा तो प्यार कभी,सच-झूठ का कारोबार कभी ,
परिवार और रोजी-रोटी, इनका सारा संसार यही,
आजकल ख़बरों में, प्रायः गुमनाम ही होता है....

 

वो 49 दिन, बहुत याद आएगे...

वो जनता की मर्ज़ी पे सत्ता मे आना,
आम आदमी का आसमान छू जाना,
वो मेट्रो से तेरा, ताजपोशी को आना,
वो राम-लीला मैदान का मंज़र सुहाना,
वो सपनो की दुनिया हक़ीकत मे आना,
वो आँखो की नमी, होंठों का मुस्कुराना,
कभी तो हंसाएँगे , कभी तो रुलाएँगे. वो 49 दिन..

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला / कुमार विश्वास

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला, देखूँ,
है अँधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ
आइना रख दे मेरे हाथ में,आख़िर मैं भी,
कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखूँ
जिसके आँगन से खुले थे मेरे सारे रस्ते,
उस हवेली पे भला कैसे मैं ताला देखूँ

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा/ कुमार विश्वास

भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!

कोई दीवाना कहता है

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!

गर्मी की कुंडलियाँ - अरविंद कुमार झा

गर्मी का यह हाल है बिजली पानी बंद
ये सब छोटी बात है हम सब है स्वच्छंद