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एनजीटी की लड़ाई लड़ेगी आम आदमी पार्टी

September 19, 2015 09:04 PM

                           मनुआलय यानि ‘मनु’ के घर के रूप में पहचान रखने वाली सौंदर्य की पर्याय पर्यटन नगरी मनाली में पर्यटन से जुड़े तमाम व्यवसाई अत्याधिक गंभीर समस्या से घिर गए हैं। स्थानीय निवासियों की मानें तो मनाली के फलते.फूलते पर्यटन व्यावसाय पर प्रदेश के बड़े नेताओं और उद्योगपतियों की नज़र लग गई है। यहां समस्या ऐसी खड़ी हो गई है कि इससे मनाली का इस वर्ष का पर्यटन सीज़न तो चैपट हो ही चुका है साथ ही आने वाले वर्षों में भी पर्यटन व्यवसाय पर खतरे के बादल अभी से मंडराते दिखाई दे रहे हैं। समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि यहां पर्यटन व्यवसाय से जुड़े छोटे.मोटे काम धंधे करने वालों को दो जून की रोटी के तक लाले पड़ने की नौबत आ गई है। मनाली के प्रभावितों में हा-हाकार मचा हुआ है। मामला है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ;राष्ट्रीय हरित अधिकरणद्ध द्वारा पर्यटन गतिविधियों पर लगाई गई रोक का। आम आदमी पार्टी ने आज उपमण्डल अधिकारी नागरिक के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया तथा मांगे पूरी न होने की स्थिति में 26 व 27 सितंबर को दो दिवसीय आन्दोलन करने की स्पष्ट चेतावनी दी गई। इस आन्दोलन को मनाली के सभी संगठनों का सहयोग प्राप्त है। जिसमें प्रमुख रूप से हिमआंचल टैक्सी आपरेटर यूनियन मनालीए लग्ज़री कोच आनर्ज़ एसोसिएशन मनालीए विभिन्न होटल व्यवसायियोंए ऊझी घाटी की महिलाओंए युवक संगठनों ने हिस्सा लिया।                              एनजीटी मनाली के ऊपरी हिस्से यानि ऊझी घाटी के तहत रोहतांग में पर्यटन गतिविधियों के अवैज्ञानिक संचालन के कारण पर्यावरण को रहे नुकसान के प्रति संवेदनशील है। एनजीटी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कीमत पर पर्यटन के स्वछंद संचालन पर रोक लगाना चाहता है जिसे अमली ज़ामा पहनाया जा चुका है। परिणामस्वरूप यहां पर्यटन से संबंधित तमाम कर्मिर्शयल गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। किंतु एनजीटी की पर्यावरणीय पहलुओं पर संवेदनशीलता एवं सरकार की उदासीनता के चलते सुव्यवस्थित पर्यटन गतिविधियों के संचालन का अभाव यहां लोगों के जी का जंजाल बन चुका है। सरकार बजाय लोगों की रोज़ी.रोटी की चिंता करने के यहां मौके का फायदा उठाते हुए खुद लूट में शामिल हो गई है। हिमाचल सरकार की अदूरदर्शिता एवं लचर योजनाओं के कारण आज स्वरोज़गार के तहत पर्यटन व्यवसाय से जुड़े यहां के हज़ारों युवा पूरी तरह बेरोज़ार हो चुके हैंण् मनाली के पर्यटन की प्राण मानी जाने वाली गतिविधियां जिसमें स्कीइंगए पैराग्लाइडिंगए लोकल डेªस पहन कर फोटो ग्राफीए नार्मल फोटोग्राफीए वुडन स्लैज़ए ट्यूब स्लाइंिडंगए हार्स राईडिंग शामिल हैंए पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यह तमाम गतिविधियां ईको फ्रैंण्डली होने के बावजूद प्रतिबंधित कर दी गई हैं जो कि इन गतिविधियों से जुड़े वाशिंदों के साथ क्रूरतम व्यवहार है।

                             क्यों सिल गई नेताओं की जुबान घ्रू भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस दोनों दलों के नेता इस पर मुंह खोलने के लिए राज़ी नहीं हैं। जिससे बड़े नेताओं का इस प्रकरण में निहित स्वार्थ स्पष्ट दिखाई देने लगा है। दरअसल एनजीटी पर्यटन के कारण पर्यावरण के नुकसान को कम करने की जिस कवायद को शुरू कर चुका है उसी कवायद में नेताओं को स्थानीय लोगों की रोज़ी.रोटी छिनने में अपना भविष्य नज़र आने लगा है। बेरोज़गार हुए युवा बताते हैं कि वे राजनेताओं की हर चैखट पर दस्तक दे रहे हैं मगर कोई भी उनकी समस्या को गंभीरता से सुनने को राज़ी नहीं है। स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि दरअसल वर्तमान सरकार व कुछ नेतागण संभवतयः यह चाहते ही नहीं कि स्थानीय लोगों की इस समस्या का निदान होए क्यांेकि वे ऊझी घाटी की तमाम पर्यटन गतिविधियों को सुव्यवस्थित संचालन के नाम पर  बड़े पूंजीपतियों के हाथों बेंच कर या तो मोटी मलाई चट करने की फिराक में हैं और या फिर यहां पर्यटन के इस फलते.फूलते कारोबार का सुनहरा भविष्य देखते हुए यहां चलने वाली तमाम गतिविधियों में अपना हिस्सा सुनिश्चित करवाना चाहते हैं। यहां सबसे चैंकाने वाली बात यह भी सामने आ रही है कि एनजीटी की आड़ में वर्तमान सरकार व नेतागण जहां अपना खामोश षड़यंत्र कर स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के पेट पर लात मारने को उतावले हैं.

              छुट भैय्या नेताओं के ज़रिए दबाई जा रही है जनता की आवाज़रू गांवए कस्बों के छुट भैय्या नेता लोगों को यह समझा रहे हैं कि वे इस मामले में किसी प्रकार की कोई आवाज़ न उठाएं क्योंकि ऐसा करने से उनका नुकसान होगा। छानबीन पर पता चला कि उनके आका उन्हें यह समझा रहे हैं कि वे बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ को दबा दें ताकि वे इस व्यवसाय को कब्जाने की ठोस रणनीति रच सकें। स्थानीय नेता पाॅजीटिव बात करने को कहते हैं। बर्वाद हो रहा है मनाली का पर्यटनरू सरकार की उदासीनता से एनजीटी का फरमान लागू होने के बाद मनाली का पर्यटन चैपट हो गया है। मनाली का आर्थिक ढां़चा पूरी तरह चरमरा गया है। हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए हैंए व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो गया हैए होटल व्यवसाय की कमर टूट चुकी है। देशी व विदेशी पर्यटक मनाली भ्रमण के अपने तमाम कार्यक्रम स्थगित कर अपने कार्यक्रमों में तब्दीली कर नई जगह जाना पसंद कर रहे हैं। ठेके पर होटल चलाकर अपनी रोज़ी.रोटी कमाने वाले व्यापारी दीवालिया होने की कगार पर हैं। स्थानीय व्यापारी अपने कर्ज की किस्त नहीं चुका पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि एनजीटी जैसी पर्यावरण हितैषी कवायद को क्रूरता से लागू कर एनजीटी के प्रति लोगों में जनबूझ कर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। ताकि गरीबों को उजाड़ कर अमीरों एवं राजनीतिक प्रभाव रखने वाले रसूकदार लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके।

              सरकारी लूट के सबूतरू एनजीटी के चलते कमर्शियल गतिविधियों पर सोलंग घाटी व रोहतांग में लगी रोक व प्रशासन द्वारा नियंत्रित की जा रही वाहनों की आवाजाही का फायदा सरकार भी पर्यटकों से लूट कर उठा रही है। हिमाचल परिवहन विभाग द्वारा तय दरों के मुताबिक यात्रियों से 1.43 पैसे प्रति किलोमीटर किराया वसूला जा सकता है। इन दरों के मुताबिक मानाली, रोहतांग के बीच का किराया कुल 73 रूपए अधिकतम होना चाहिए आने-जाने का किराया भी किसी भी सूरत में 146 ही बैठता है किंतु यहां हिमाचल पर्यटन विभाग 650 रूपए प्रतिव्यक्ति किराया वसूल रहा है और एचआरटीसी 500 रूपए प्रति व्यक्ति किराया ले रही है। इतना ही नहीं यहां यही 500 व 650 की दरों पर सरकार द्वारा बेची जा रही टिकटें सरकार द्वारा संरक्षित दलाल 700 से 2600 रूपए प्रति टिकट तक खुलआम बेचते देखे जा सकते हैं। कुल मिला कर एनजीटी के हंटर से डराकर सरकार की लूट खुलेआम जारी है। एक अनुमान के मुताबिक एचआरटीसी ने ही इस लूट के माध्यम से कुल 4 करोड़ रूपए की कमाई की जबकि यहां तैनात स्टाफ ने करीब 16 करोड़ के वारे.न्यारे किए। मनाली के पर्यटन व्यवसाय पर मंडरा रहे खतरे के बादल के इस दौर में जहां सरकार को इस समस्या के निदान हेतु गंभीर प्रयास करने चाहिए वहीं सरकार खुद मनाली में मौके फायदा उठा कर अपनी असंवेदनशील नीतियों का नग्न नृत्य कर रही है। बहाना एनजीटी द्वारा लगाए गए कम्पनसेशन टैक्स का भले ही हो किंतु सरकार को कोर्ट के आदेशों का सहारा लेकर पर्यटकों को लूटने से बचना चाहिए था तथा पर्यटन उद्यमियों को राहत देनी चाहिए थी।

           वैज्ञानिक दृष्टिकोण, एनजीटी के नाम पर स्थानीय पर्यटन व्यावसायियों की रोजी.रोटी को प्रतिबंधित करने के पक्ष में वैज्ञानिक भी नहीं हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन एनजीटी की कार्रवाई से पहले ही प्रभावी कदम उठाकर इस रोक को टाल सकता था। स्थानीय पर्यटन व्यावसायियों को पर्यावरणीय पहलुओं का प्रशिक्षण देकर पर्यटन स्थलों पर किसी भी प्रकार के प्रदूषण से पूरी तरह बचा जा सकता है। वैज्ञानिक एनजीटी के पक्ष में दिए जा रहे इस तर्क से भी असहमत हैं कि रोहतांग ग्लेशियर है और यहां पर्यटन संबंधी गतिविधियों के बढ़ने से हिमालयी ग्लेशियरों को खतरा उत्पन्न हो रहा है। ग्लेशियरों पर दशकों से काम कर रहे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने मामला कोर्ट में होने के कारण नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मनाली के पर्यटन के प्रमुख केंद्र सोलंग घाटीए गुलाबाए मड़ी व रोहतांग में कोई भी ग्लेशियर मौजूद ही नहीं है। इनका कहना है कि रोहतांग से नज़दीकी ग्लेशियर का एरियल डिस्टेंस लग.भग 15 किण्मी है। इनका कहना है कि ऐसी सूरत में पर्यावरणीय असंतुलन की दृष्टि से रोहतांग को जोड़ना अतार्किक है।

 षड़यंत्र की बूरूआ, पलचान से रोहतांग के बीच टाटा द्वारा लगाए जा रहे रोप वे के बारे स्थानीय व्यावसायियों का कहना है कि बज़ाय किसी प्राईवेट कंपनी के माध्यम से इस योजना को अंजाम देने की जगह सरकार को इस रोप वे को जनभागीदारी से स्थापित करने व चलाने की योजना बनानी चाहिए थी। इस परियोजना को स्थानीय लोगों को दरकिनार कर बड़ी कम्पनी को सौंपे जाने के निर्णय से स्थानीय लोग गुस्से मंे हैं। तमाम कमर्शियल गतिविधियों पर रोक के बावजूद सोलंग घाटी में चलने वाले निजी रोप वे पर किसी प्रकार की रोक लागू न होना भी स्थानीय लोगों की नज़र में पूंजीपतियों को संरक्षित कर स्थानीय लोगों को प्रताडि़त करने की धारणा को दर्शाता है। 

समाधानरू पर्यटन से जुड़े व्यावसायियों का पर्यावरणीय पहलुओं के प्रति संवेदनशील होना नितांत आवश्यक है तभी पर्यटन स्थलों की खूबसूरती एवं आकर्षण बरकरार रह सकेगा। किंतु इसके लिए पर्यटन गतिविधियों पर विराम लगाना समस्या का स्थाई समाधान कतई नहीं हो सकता। सरकार को चाहिए कि एनजीटी के समक्ष मनाली के पर्यटन स्थलों में सुव्यवस्थित पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए कोई ठोस एवं पुख्ता योज़ना रखे तथा पर्यटन स्थलों पर कारोबार करने वाले स्थानीय निवासियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलताए प्रदूषण से पर्यटन स्थलों को बचाने के उपाय व पर्यटकों से सौहार्द पूर्ण व्यवहार के प्रशिक्षण की व्यवस्था करे। इसके अतिरिक्त पर्यटन स्थलों पर सुव्यवस्थित पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए माॅनीटरिंग दल तैनात किए जाएं जो कि तमाम पर्यावरणीय पहलुओं के मद्देनज़र तमाम गतिविधियों के संचालन के लिए उत्तरदायी हों। प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्तियों को ही पर्यटन स्थलों पर व्यवसाय चलाने की अनुमति दी जाए तथा नियमों की उल्लंघना करने पर लाइसेंस रद्द करने का विधान हो।

                                पर्यटन व्यावसायियों की मांग सरकार समस्या के निदान हेतु गंभीर प्रयास करते हुए स्थानीय पर्यटन व्यावसायियों को हुए नुकसान के लिए राहत प्रदान करे। पर्यटन गतिविधियों पर लगी रोक के कारण मनाली के व्यावसायियों को नुकसान की भरपाई के रूप में तमाम तरह के टैक्स में छूट दी जाए साथ ही सरकार नुकसान की भरपाई के लिए राहत की अविलंब घोषणा करे। जिन व्यावसायियों ने अपने.अपने व्यावसाय के संचालन के लिए विभिन्न बैंकों से कर्ज लिए हैं उनकी कर्ज माफी का ऐलान राज्य सरकार द्वारा किया जाए। लीज़ पर लिए गए होटलों में हुए नुकसान की भरपाई भी अविलंब की जाए।

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