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International

पहचाने “आप” के बीच की काली भेड़ों को.

August 31, 2014 02:31 AM

अरविंद केज़रीवाल वह सख्श है जिसके नाम की ईमानदारी के लिए कसमें खाई जा सकती हैं। किंतु आज देश का समूचा भ्रष्ट तंत्र उसे बेईमान साबित करने के लिए एक जुट हो गया है। अपने भ्रष्ट आकाओं के समक्ष मीडिया जहां एक ओर अपने नम्बर बनाने के लिए ‘आम आदमी पार्टी’ को नेस्तनाबूद करने का षड़यंत्र रच रहा है वहीं पार्टी के अन्दर ही प्लांट किए गए कुछ दूसरी पार्टी के लोगों ने तोड़-फोड़ करने की नियत को लेकर अपना अभियान आरंभ कर दिया है। कुछ औद्योगिक घरानों द्वारा फेंके गए टुकड़ों से रात के अंधेरे में अपने कांग्रेस व भाजपाई आकाओं से दीक्षा लेकर लौट रहे आप पार्टी में सम्मिलित हुई काली भेडें अब साफ दिखाई देने लगी हैं। भाजपा व कांग्रेस अपने गुनाह छिपाने के लिए “आप पार्टी ” के खिलाफ इन्हें उकसाती है और यह लोग अपने छोटे-मोटे लालच के वशिभूत होकर या मीडिया में सुर्खियां बटोरने की तमन्ना दिलों में पाले पार्टी के खिलाफ अनापशनाप बयानबाजी करने लगते हैं। इनके मुख से निकलने वाले एक-एक शब्द सहज़ ही आपको कांग्रेस के दिए गए गुरू मंत्रों की भनक दे जाते हैं। रविवार को कुछ लोग खुद को आम आदमी पार्टी के असंतुष्ट बताते हुए जंतर-मंतर पर पहुंचे और लगे पार्टी के खिलाफ जहर उगलने। उनकी भाषा में विरोधियों द्वारा दिलवाया गया कुशल प्रशिक्षण सहज़ दिखाई दे रहा था। कल तक खुद को अरविंद का दांया हाथ बताने वाले कार्यकर्ता आखिर एक ही रात में पार्टी के इतने बड़े दुश्मन कैसे बन गए ? कुछ लोगों को गुमाराह कर उन्होंने साथ जोड़ लिया किंतु जो साथ आए उन्हें नहीं मालूम कि उन्हें गुमराह किया जा रहा है। राजनेताओं के हाथेां कुछ बिके हुए लोग उन्हें बरगला रहे हैं और भ्रष्ट सरकार के विरुद्ध  आमआदमी पार्टी की मुहीम को वे पूरी तरह बंद करवा देने पर आमादा हैं। विरोधियों का यह पहला पैंतरा और एक छोटी सी चाल है जिसमें वे आम आदमी पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर वार करते हुए खुद उसे ही कटघरे में खड़ा कर उसी पर टिकटों के आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं । दरअसल पार्टी में दोफाड़ कराने की यह सरल विधि है और नेता के मन में अपने ही लोगों के प्रति अविश्वास पैदा कराने का भी यही सबसे आसान सूत्र है। याद कीजिए अन्ना और अरविंद के बीच इसी सूत्र के जरिए मतभेद उत्पन्न किए गए थे और आज इस नुक्से का सहारा लेकर अरविंद टीम पर भी पहला वार हुआ है। कहते हैं प्रेम और युद्ध  में सब कुछ जायज़ है किंतु आम आदमी पार्टी प्र्रमुख अरविंद इस जुमले को ही झुठला देते हैं। उनका मंत्र है कि प्रेम और युद्ध  में सिर्फ सच्चाई और ईमानदारी जायज़ है। वे हर आदर्श की अनुपालना बारीकी से करते हैं तथा यही इस आंदोलन की ताकत है। टिकट के लालच में या फिर अन्य पार्टी विरोधी तत्वों के इशारों पर पार्टी पर या फिर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने वाले तथा कथित देश भक्तों को यदि आंदोलन की गरिमा का जरा भी एहसास होता तो उनकी जुबां से विरोध के स्वर उठने से पहले वे सौ बार सोचते और सोच-सोच कर खुद को कोसते कि कैसे वे राष्ट्र के खोए गौरव को लौटाने वाले आन्दोलन के खिलाफ बोल सकेंगे? कैसे वे देश की माटी से गद्दारी कर सकेंगे?  कैसे वे देश में जागी एक उम्मीद को विरोधियों द्वारा फेंके गए चन्द टुकड़ों की खातिर दांव पर लगा सकेंगे ? किंतु स्वार्थ के वशीभूत दरिंदों से राष्ट्र निष्ठा की उम्मीद ही मूर्खता है। अरविंद केज़रीवाल इस घटनाक्रम से बेहद आहत हो रहे होंगे। मैं इस पीड़ा व पीड़ा की परिणिति से गुज़रा हूं। मैं जानता हूं कि इसका परिणाम सुखद होगा। राजनीति के दल-दल के यह पहले छींटे हैं और इन्हें तो सहना ही होगा। विरोधियों ने ताउम्र राजनैतिक प्रपंच ही किए हैं। उन्हें राजनीति के तमाम षड़यंत्र भली भांति न सिर्फ मालूम हैं बल्कि वे अपने स्वार्थ के लिए इनका नीचता की हद तक इस्तेमाल भी करते हैं। हम राजनीति में हैं तो विरोधियों की तमाम चालें व पैंतरों से ही इन्हें हराना होगा। दुनिया के सामने हम दीन-हीन बन परिवर्तन की बात करेंगे तो हास्य के पात्र बनेंगे। दुनिया ताकत की भाषा जानती और समझती है इसी लिए हम चरित्र से जितने उच्च मानदंड स्थापित कर रहे हैं। हमें अन्य क्षेत्रों में उसी भांति अपनी उच्चता स्थापित करनी होगी। हमें समान विचारधारा वाले लोगों को साथ जोड़ना होगा। खुद को और अधिक मज़बूत और अधिक ताकतवर करने का हुनर खुद के भीतर विकसित करना होगा। वार पर वार होंगे और वह भी भीतर और बाहर दोनों ही मोर्चों पर सहने हैं। इस तूफान में बिना एक भी पल विचलित हुए हमें, टिके रहना है.  और बड़े तूफान से टकराने के लिए। प्रकृति हमारी खूब परीक्षा लेगी। हम हार गए, हम थक गए तो इस देश से राजनैतिक सुचिता एवं भ्रष्टाचारमुक्त समाज की उम्मीद सदा-सदा के लिए मिट जाएगी। इसीलिए मन को भली भांति टटोलकर पूरी दृढ़ता के साथ टिके रहना है। आप सभी जानते हैं कि पिछले महीने हम पर व हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, हमारे साथी बृजलाल और उनके एक अन्य सहयोगी को जान से हाथ धोना पड़ा। बलात्कार पीडि़ता की मदद करने वाले हमारे 50 से अधिक साथियों को पुलिस ने बेरहमी से पीटा उनके हाथ पांव तोड़ डाले व उन्हें जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया। एक अन्य बलात्कार पीडि़ता बच्ची की मदद करने गए हमारे शकूर बस्ती प्रत्याशी सत्येंद्र जैन व उनके दो अन्य सहयोगियों को पुलिस ने जेल भेज दिया। आमआदमी पार्टी की सुन्दर नगरी  विधानसभा प्रत्याशी संतोष कोली एक हमले के कारण जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। हर रोज हमारे कार्यकर्ताओं पर सरकार द्वारा प्रायोजित पुलिसिया जुर्म हो रहे हैं। हमारे पोस्टर फाड़े जा रहे हैं, होर्डिग हटाई जा रही हैं,  किंतु आज़ादी के परवाने हमारे कार्यकर्ता दूसरे दिन और अधिक जोश और अधिक जूनून के साथ नई उर्जा के साथ काम में जुट जाते हैं और तमाम बाधाओं के बावजूद उनका यही हौंसला परिवर्तन की इस उम्मीद को जिंदा रखता है। और अंत में एक और बात पार्टी के खिलाफ उठने वाले स्वरों को पहचानना हम सब की जिम्मेबारी है. आन्दोलन को किसी भी हाल में नुकसान न पहुंचे इसके लिए आपको भड़काने वाले लोगों से सावधान रहें। कुछ लोगों को अन्य पार्टिओं ने पैसा दे कर सिर्फ आपके बीच फुट डालने के लिए भेजा है. उन्हें पहचाने। ये लोग वह लोग हैं जो आपके ही कार्यकर्त्ता बन लम्बे समय से आपके बीच थे. बस अपने काम में जुटे रहें।

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