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Interview

"आप" के कर्मठ विधायक संजीव झा के साथ बातचीत के कुछ अंश-रीटा चौहान

June 26, 2015 08:27 PM

यूँ तो “आप” का हर विधायक अपने अपने क्षेत्र के कार्यों और पार्टी द्वारा जनता से किये गए वायदों के प्रति कटिबद्ध है| किन्तु इन विधायकों की सूची में एक नाम ऐसा भी है जिसे जनता ने दो बार अपार प्रेम दिया है और भारी बहुमतों से जिताया है| जिनके विरोधी तक उनकी कार्यशैली को देख कर दंग रह जाते हैं| अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेही और उनकी उम्मीदों पर खरे उतरने का जूनून उन पर इस कदर है कि आँखों में नींद तक नहीं, सिर्फ और सिर्फ जनता का हित है| हम बात कर रहे हैं दिल्ली के बुराड़ी से आम आदमी पार्टी के विधायक और परिवहन मंत्री के संसदीय सचिव श्री संजीव झा की| आइये जानते हैं उनसे जुड़े कुछ बिंदु उन्ही की ज़ुबानी उनके इस साक्षात्कार से जो "आप की क्रांति" की ही एक वालंटियर रीटा चौहान ने लिया है:-

आम आदमी पार्टी का मकसद एक नई तरह की राजनीती की शुरुआत करना रहा है| उसी को ध्यान में रखते हुए आपने अपने विधानसभा क्षेत्र में इसे कैसे लागू किया?

जवाब:- जब यह पार्टी बनी थी तभी हम लोगो ने कहा था की हमारा मकसद व्यवस्था परिवर्तन और वैकल्पिक राजनीती करना है| पहली बार जब चुनाव अभियान करने गए तो दो मुद्दे बहुत मजबूती से हमने रखे, स्वराज और जनलोकपाल| लोकतान्त्रिक भागीदारी हमारा उद्देश्य रहा है| जनता को व्यवस्था में जगह दी जाने की ज़रूरत है| जनता जो कहेगी जनप्रतिनिधि द्वारा वही किया जाना आवश्यक है| हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य जनता और नेता के बीच की दूरी को ख़त्म करना था| तभी हमने नारा दिया “हमारा नेता कैसा हो, आम आदमी जैसा हो”| पहले नेता को माई बाप माना जाता था, नेता एक तरह की “क्लास” हो चुकी थी| उसके यहाँ जाने से सब कतराते थे| अपने कार्यकाल में इस दूरी को ख़त्म करना हमारा पहला कार्य है| मेरी कोशिश रही कि जो भी लोग मेरे कार्यालय में आ रहे हैं वह अपने आप को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त कर सकें| इसके लिए हमने मोहल्ला सभा का सिलसिला शुरू किया और ३६ मोहल्ला सभाएं की|

इस पहल में आपको कितनी सफलता अभी तक मिल चुकी है और जनता से जुडी समस्याओं को हल करने हेतु क्या नया तरीका अपनाया है और किस प्रकार की नई समस्याएं आपने देखीं हैं?

जवाब:-हमारे कार्यालय में लगभग ३००-४०० लोग रोजाना आते हैं और हमें ख़ुशी होती है की उनकी सबकी शिकायतों और सुझावों को हम सुनते हैं| जब मैं जीत कर के आया था तो ऑफिस में भीड़ लगने लगी क्यूंकि लोगो को लगा की वह खुद जीतें हैं, उनकी खुद की सरकार है| बहुत सारे ऐसे काम जो बरसों से नहीं हो पा रहे थे हमने उन्हें देखा, जैसे पेंशन, बिजली के बिल मीटर, पानी के बिल, ग्राम सभा पर कब्ज़ा आदि| एक उदहारण के तौर पर किसी ने पानी का मीटर न लगने की शिकायत की| जबकि पैसा भी दिया हुआ है पर मीटर नहीं लग रहा है|इसके पीछे की जब छानबीन की गयी तो हमने पाया की ये तो ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे का काम है| उसे तुरंत करने का आर्डर दिया और उस अधिकारी को जनता के समक्ष किया गया जो इससे सम्बंधित था| हमने कहा की हर ३ महीने में हम फॉलो उप मीटिंग करेंगे उन्हें जवाब देना होगा की क्या काम हुआ| हमने अपने विधानसभा क्षेत्र में हर मुद्दे से जुडी अलग-अलग १०-१० लोगो की टीमें बाँट दी हैं| जैसे यदि पानी की समस्या है तो एक टीम इसी से जुड़े मुद्दे देखेगी अन्य और मुद्दों से जुडी| ये लोगो को एक नया और अच्छा तरीका लगा है| कुछ दिनों में हम एक नया तरीका शुरू करने जा रहे हैं जिसमें आप हमारे पास अपनी समस्या लायेंगे तो आपको एक टोकन नंबर लॉगइन आई डी और पासवर्ड देंगे| जिससे आप अपनी शिकायत का पूरा ट्रैक और स्टेटस देख भी सकेंगे और जब अपनी कोई भी शिकायत उस लॉग इन आई डी से डालेंगे तो सम्बंधित विभाग के पास वह स्वतः ही पहुँच जाएगी| इसके साथ ही आपको वोईस कॉल भी दी जाएगी की आपकी समस्या हमारे पास रजिस्टर कर ली गयी है|

आपने मोहल्ला सभाएं की, अभियान के दौरान भी जनता से मुलाकात की, किन्तु पिछले 68 सालों से जनता को इन सबकी आदत नहीं थी| 68 साल के इस बदलाव को लाने हेतु आपको कितना संघर्ष करना पड़ा?

जवाब:-मोहल्ला सभा, काम्पैग्निंग आदि से दो बड़े बदलाव हुए जिन्होंने अहम् भूमिका निभायी| पहला जो इसमें वदलाव हुआ वह यह की जनता को अपने वाजिब कार्य हेतु जिस अधिकारी के चक्कर काटने पढ़ रहे थे वह अधिकारी उनके समक्ष था| दूसरा, पिछले कई सालों से नेता सिर्फ चुनाव के टाइम ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते थे| हमने रोजाना दो घंटा किसी न किसी कॉलोनी में घूमना शुरू कर दिया जिससे नए-नए रस्ते खुलने लगे लोग हमसे भी खुलने लगे और जो भी समस्याएं थी वो सामने आने लगी फिर चाहे वह पेंशन से जुडी हुई समस्या हो या फिर पानी-बिजली के बिल और मीटर आदि से सम्बंधित| आम आदमी के बीच जाना उनसे बात करना और चीज़ों को थोडा सा विकेन्द्रित करना, जनता की समस्याएं सुनना और उसका समाधान करना हमारी प्राथमिकता रही है|

यह मोहल्ला सभा का ही एक हिस्सा रहा| इस तरह जनता, नेता और सम्बंधित अधिकारीयों को आमने सामने किया गया| बिचौलिए पहले काम करते रहते थे| इस व्यवस्था से बिचौलिया को हटाया गया और जनता का अधिकारी से संवाद कराया गया| जो की जनता को भी भाया|

इन सब कार्यो को करते हुए आपको अपने विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती क्या लगी? ऐसा क्या बड़ा कार्य है जो वहां पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी नहीं हो सका?

जवाब:-ये सब बड़े बदलाव होते हुए भी हमारे यहाँ लोगो की समस्याएं बहुत हैं जो बिलकुल वाजिब हैं | हमारे यहाँ एक नत्थू पूरा कॉलोनी है जो अभी भी बहुत अधिक अविकसित है| जिसमें बहुत अधिक कार्य की आवश्यकता है| बहुत सारी चुनौतियाँ है वहां| वहां पहले ग्राम सभा की ज़मीनें कब्ज़ा ली जाती थी| हमने सबसे पहले वहां पर ग्राम सभा की ज़मीं पर बाउंड्री बनवाई और बोर्ड लगा के सूचित किया गया दिया की ये ग्राम सभा की ज़मीं है| ४ करोड़ का जो फण्ड विधायक को एक साल का मिलता है वह फण्ड हमने लगाया इसके साथ ही स्कूल से सम्बंधित कार्य भी किये गए जैसे स्कूलों के लिए ग्राम सभा की ज़मीन मुहैया करवाई गयी| अनधिकृत कॉलोनियां भी एक सबसे बड़ा मुद्दा है| इन कॉलोनियों की कोई रजिस्ट्री नहीं होती जिससे लोगो को यहाँ घर खरीदने हेतु लोन तक नहीं मिलता था, कोई दुर्घटना हो जाए तो मुआवजा आदि नहीं मिलता था और इसके साथ ही कोई भी कब्ज़ा आसानी से कर सकता था क्यूंकि पॉवर ऑफ़ अटोर्नी थी| इसका है कई सारे ऐसे क्लॉज़ होना जनके पूरे न होने तक उन कॉलोनियों को अधिकृत नहीं किया जा सकता| अब हमने निर्णय लिया की पहले इन कॉलोनियों की रजिस्ट्री की जाए फिर जो क्लॉज़ की शर्ते हैं उन्हें पूरा करने का काम किया जाए| क्यूंकि अभी किकुँलिटी के अनुसार देखा जाए तो वह कॉलोनियां २०३५ तक अधिकृत हो पाएंगी| जो की एक बहुत ही लम्बा समय है|

इसके साथ ही हमारे यहाँ राशन को लेकर बहुत चुनौतियाँ हैं| उनसे निपटने के लिए FSO शुरू किये| और जगह जगह छापे मारे गए| पिछले साल 49 दिनों के बाद सरकार न होने के कारण जो कार्य काफी प्रभावी ढंग से होने चाहिए थे वह उतने प्रभावी तरीके से नहीं हो पाए|

पार्टी का मूल उद्देश्य व्यवस्था परिवर्तन के साथ साथ “स्वराज” और “जन-लोकपाल” लाना था| स्वराज की तरफ तो अग्रसर आप हो चुके हैं, जन-लोकपाल के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

जवाब:-पिछली बार हमारा पहला कार्य जनलोकपाल और स्वराज को पहले लाना था| जब हमने सरकार छोड़ी और लोगो की नाराज़गी देखि उनकी प्रतिक्रिया ली तब लगा की “नहीं”, पहले अन्य कार्य जैसे बिजली,पानी आदि से जुडी समस्याएं जनता के लिए प्राथमिक थी तो पहले वही करनी चाहिए थी| इस बार हम पहले जनता की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दे पहले हल कर रहे हैं| इसके साथ ही बजट बनाने की विधि में जनता की भागीदारी करवाई जा रही है| कहीं भी बजट को बनाने में जनता की भागीदारी की पहल नहीं की गयी है सिवाए दिल्ली के| कानून बनाने में तो हुई है| यह अपने आप में एक अनूठी पहेल है| जहाँ जनता जो कहती है, वहां उनके अनुसार बजट बनेगा| जिसके पास कमी है वही उसकी ज़रूरत को बता सकता है| वैकल्पिक राजनीती का मतलब यही है की जनता की भागीदारी हो राजनीती में, नेता जनता के बीच में हो| और नेता कुछ भ्रष्टाचार करे तो उसको लगाम लगाने के लिए कोई कानून हो जिसे जनता इस्तेमाल कर सके| इसी लिए जन्लोक्पाल अत्यधिक आवश्यक है, किन्तु अभी उन मुद्दों को पहले हल करना ज्यादा ज़रूरी है जो सीधे-सीधे तौर पर जनता से बड़े स्तर पर रोजाना के जीवन में जुड़े हुए हैं| जन् लोकपाल पहले भी हमारी मांग रही है और अब भी है| इसे हर कीमत पर बनाया जायेगा|

केंद्र सरकार और एमसीडी का सहयोग कैसा है?

जवाब:-कई मुद्दे ऐसे हैं जिन पर उचित सहयोग मिल भी रहा है और नहीं भी| जब ज़रूरत पड़ेगी तब कुछ तरीके तो निकालने पड़ेंगे| जनता से वादा किया है तो उन्हें निभाने हेतु तरीके निकालने ही होंगे|

अभी डीटीसी में एक पहली महिला ड्राईवर आई हैं| क्या इस क्षेत्र में महिलाओ की भागीदारी हेतु कुछ योजना बनायीं गयी है?

जवाब:- अभी डीटीसी में महिलाओं की कमर्शियल वहां ट्रेनिंग शुरू करने हेतु बात चीत की गयी है| अभी इसमें बहुत काम करना है और उसे लागू भी करना है| हमारा प्रयास है की लाइसेंस, बैज बनवाने में जितना कुछ हो सकता है महिलाओं की सहायता हेतु एक उचित योजना जल्द तैयार हो|

बुराड़ी परिवहन अथॉरिटी हमेशा से ही घूस और भ्रष्टाचार का एक अड्डा रहा है| आपके दो बार विधायक बनने के बाद से अब वहां क्या परिवर्तन आपने देखा है?

जवाब: हमने देखा है की अब भ्रष्टाचार और घूस से जुडी शिकायतें कम आने लगी हैं| हमारे कुछ वालंटियर्स भी हमने वहां छोड़े हैं जिससे वहां की स्थिति का जायजा लिया जा सके| इसके साथ ही यह एक व्यवस्था के तहत किसी को भी अंदर गाडी ले जाने की इजाज़त नहीं है, दलालों का अंदर जाना बंद किया गया है, अब अंदर पूरे में कैमरा लगाने की तैयारी है| पूरा प्रयास है की वहां काफी कुछ सुधर जाए| काफी कुछ बदला भी है|

आम आदमी पार्टी को ऑटोवालो को अधिक सहयोग मिला है| उनके हित के लिए क्या नया करने जा रहे हैं? क्यूंकि गौर से देखा जाए तो यह भी एक शोषित वर्ग है|

जवाब:-सबसे बड़ी जो परेशानी थी वो थी सेक्शन ६६ (अ) जो कि परमिट रद्द करने से सम्बंधित थी| यह अधिकार अब दिल्ली पुलिस से ले लिया गया है जिससे ऑटो वालो के साथ गलत व्यवहार न हो सके| माफिया इस व्यवस्था से ख़त्म हुआ और गाडी बिना बात के ज़ब्त होना भी बंद हुआ है| इसके साथ ही हमने उस नियम में भी बदलाव किया है जिसके तहत यदि किसी ऑटोचालक की मृत्यु हो जाती है और उसके आश्रितों के पास लाइसेंस, बैज नहीं है तो वह उस ऑटो को अपने नाम ट्रान्सफर नहीं करवा सकते थे| अब यह नियम बदल दिया गया है जिसमें यदि उस ऑटोचालक की मृत्यु हो जाती है और उसकी पत्नी के पास लाइसेंस बैज नहीं भी है तब भी उसके नाम ऑटो ट्रान्सफर कर दिया जाए|

हमारे पास कई ऐसी शिकयतें आती हैं और देखी भी गयी है,जिनमें कई ऑटो वाले भी काफी अनुचित व्यवहार करते हैं, मीटर से चलने को तैयार नहीं होते| कुछ सख्त कानून होने ही चाहिए, लेकिन इसके साथ साथ यह भी किया जायेगा की उस शिकायत की सुनवाई जल्द हो सके |

राजनीती में आने से पहले आपका व्यक्तिगत जीवन अलग था| आपको कैसे प्रेरणा मिली इस क्षेत्र में आने की?

जवाब:-ऐसा कुछ विचार नहीं था| हम सब लोग आन्दोलन कर रहे थे| फिर आम आदमी पार्टी के रूप में यह टीम बनी| अरविन्द जी ने काफी अच्छे से यह समझाया की गन्दी राजनीती को साफ़ करने हेतु उसमें आना ही पड़ेगा और नए उदहारण लागू करने होंगे| पहले राजनीती को और इसमें आने को एक बहुत ही गन्दा काम लोग मानते थे और नेता शब्द एक गाली के रूप में प्रयोग किया जाने लगा था | हम लोगो ने सोचा की लीडर बनना कोई गलत काम तो नहीं है, और लीडर बनके दूसरों के हित का कार्य करना एक बड़ा सौभाग्य है| हमें भी एक उत्साह था की विधायक बनके लोगो को जो उनका हक पहले नहीं मिला है उसे दिलाने, उसके लड़ने के लिए हमें एक ताकत मिलेगी है जिससे लोगो की सुचारू रूप से मदद हो सकेगी|

बुराड़ी की जनता ने दो बार आपको अथाह प्रेम देकर जिताया है| आपको डेढ़ साल होने वाले हैं| इस दौरान आपको क्या नया सीखने को मिला, क्या कुछ बदलाव आपने देखा?

जवाब:-काफी कुछ सीखने को मिला है| पहले जब राजनीती में नहीं थे तो ऐसा महसूस होता था की मैं एक समाज सेवा कर रहा हूँ| जब लोगो ने चुन के भेजा और विधायक बनाया तो लगा की लोगो ने एक ऐसी ज़िम्मेदारी दी है जिसके बारे में लोग पहले सोचते थे विधायक बनना एक शक्ति पा जाना है| जो लोगो के हित में इस्तेमाल होनी चाहिए पर नही होती थी|

कई बार दुःख होता है की कई सारी बातों में हम कुछ लोगो की सहायता नहीं कर पाते जैसे मान लीजिये कोई महिला हैं, उनकी बच्ची का विवाह होना है और वह पैसे से पीड़ित है, तब लगता है की ऐसे सामाजित प्लेटफार्म भी होने चाहिए जो सरकार के साथ मिल कर कंधे से कन्धा मिला कर सामाजिक हित हेतु असल में कार्य कर सकें| क्यूंकि ऐसे लोगो का भी हम पे हक है| उनके लिए भी हमारी प्रतिबद्धता है और समाधान निकलना ही चाहिए|

कई लोगो को शिकायत भी होती है की विधायक नहीं दिख पाते हैं| उनसे निवेदन करते हुए कहना चाहूँगा की व्यस्तता के कारण जब विधायक सारे दिन बाहर होता है तो उसका लोगो को दिख पाना मुश्किल हो जाता है| पहले विधायकों को देख के लोगो में यह शक रहता था की विधायक ३-४ महीने दिखा और उसके बाद वो भाग जायेगा| उनके शक को ख़त्म करना, लोगो को अपनी उपस्थिति का एहसास करना भी एक चुनौती रही है जिसे पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं|

कोई एक ऐसा अच्छा वाकया आपके कार्यकाल में आपके साथ हुआ हो जो यादगार बन गया हो?

जवाब:-ऐसे वाकया रोज़ ही महसूस होते हैं| कई बार ऐसा भी होता है की अपनी व्यक्तिगत जीवन पीछे छूट जाता है और आँख भी बंद करते हैं तो लगता है की अभी और भी कई काम हैं| काफी कुछ बदला है पहले और अब में| पहले जब ज़रूरत मंदों के लिए मैं कार्य करता था तो लगता था की शायद ये एक समाज सेवा है| अब लगता है की नहीं ये तो मेरी ज़िम्मेदारी है लोगो ने इसी लिए चुना है जनता के अधिकृत सेवक हैं हम, तो ज़िम्मेदारी पूरी निभानी ही होगी| अपने व्यक्तिगत जीवन को पीछे छोड़ना ही पड़ता है| जब लोग अपनी बात सुनाते हैं और हमें लगता है की उनकी बातें हमने अच्छे से सुनी है तो कुछ सुकून सा मिलता है| अब जैसे दिल्ली में हमनें मोहल्ला सभा की शुरुआत की जो अपने आप में एक नई पहल है और लोग उससे खुश हैं, तो लगता है की अगर मैं नहीं होता यहाँ तो शायद ये नहीं हो पता| उस समय अपनी आँखों को आराम न देना ही ख़ुशी देता है|

 

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