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दिल्ली नगरपालिका का सारा कार्य ठप्प क्यों? भाजपा ने बनाया इसे भ्रष्टाचार का अड्डा|

June 14, 2015 12:18 PM

भाजपा शासित दिल्ली की तीन नगर पालिकायें अपना कार्य करने मे असफल रही हैं और अब बिल्कुल ही चौपट हैं. जून 8 को मुख्यमंत्री अर्विन्द केजरीवाल के इस एलान के बाद कि 500 करोड रुपए तुरंत सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह के लिये दिये जा रहे हैं, सफाई कर्मचारियों की हडताल का फिर भी जारी रहना आश्चर्यजनक बात रही है

500 करोड के एलान के बाद हडताल जारी रहने का कोई कारण नही था. भाजपा पार्षदों ने जानबूझ कर गरीब कर्मचारियों को न सिर्फ हडताल न तोडने के लिये भडकाया, बल्कि सडक पर कूडा फैलाने के लिये भी कहा|

अदालतो ने बार बार नगरपालिकाओं को निकम्मा और भ्रष्ट करार दिया है जिसका ताज़ा उदाहरण उत्तरी नगरपालिका के दफ्तर पर सीबीआई की रेड है.

इस नगरपालिका ने न सिर्फ दिल्ली के नागरिकों का सर शर्म से झुका दिया, ब्लकि दिल्ली मे स्वास्थ्य के लिये खतरा पैदा कर दिया.

ये भी आश्चर्यजनक बात है कि भाजपा केन्द्र सरकार, अपने आधीन आने वाली नगरपालिकाओं की, अपने कार्य के प्रति दंडनीय उपेक्षा के बारे मे एक दम चुप है.

दिल्ली के लोगों का सर शर्म से झुकाने वाली भाजपा शासित नगरपालिकाओं ने साबित कर दिया है कि ये दुनिया की सबसे भ्रष्ट संस्थाएं हैं जिनमे न कोई आर्थिक अनुशासन है और न ही क्षमता से काम करने की काबलियत.

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2000 करोड रुपए नगरपालिका के लिये निर्धारित किये थे जिसमे से अभी तक एक रुपया भी दिया नही गया है.

आम आदमी पार्टी भाजपा को निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर देने की चुनौति देती है.

 १)पार्किंग शुल्क के दुगुना किये जाने के बावजूद नगरपालिका के पास वो पैसा क्यों नहीं है? क्या नगरपालिका पार्किंग शुल्क का समस्त ब्योरा जनता को देगी?

२) सम्पत्ति शुल्क क्यों कम हो गया है?

3) क्या ये सच नहीं कि 30 अक्तूबर २०१४ को दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर पालिका को स्वच्छ् भारत अभियान को एक मज़ाक और एक दस्तूर मे बदलने का दोषी करार दिया था?

4)      क्या दिल्ली हाई कोर्ट ने नगरपालिका को 5 नवम्बर २०१४ को कहा था कि स्वच्छ भारत की जगह ये लोग –गन्दा भारत अभियान --- चला रहे हैं?

5)     नगरपालिका ने अभी तक केन्द्र सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के लिये निर्धारित 550 करोड रुपयों की मांग क्यों नहीं की है?

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