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Delhi Election

100 करोड़ के CNG घोटाले की जांच शुरू- दिल्ली सरकार

June 07, 2015 01:24 PM

दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 2002 में हुए सौ करोड़ रुपये से अधिक कथित सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच शुरू कर दी है। एसीबी इस मामले की कई दिनों से तफ्तीश भी कर रही थी ।

अब जांच शुरू होने से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। साथ ही उनके करीबी अफसर रहे डीएम सपोलिया और पीके त्रिपाठी भी घेरे में आ सकते हैं। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल से अनुमति मांगी गई थी। उनके इजाजत नहीं देने से मामला लटक गया था।

आपको बड़ा देना चाहते हैं की यह घोटाला 100 करोड़ का सीएनजी कमर्शियल व्हीकल की कागजों में फिटनेस दिखाने से सम्बंधित था| कमर्शियल वाहनों का हर साल फिटनेस टेस्ट होता है। तत्कालीन दिल्ली सरकार ने इस फिटनेस टेस्ट के लिए एक ऐसी प्राइवेट कंपनी को इसका ठेका दे दिया था जो फर्जी सर्टिफिकेट जारी करती थी। आरोप था कि उस कंपनी के पास फिटनेस टेस्ट की मशीन भी नहीं थी। तत्कालीन सरकार ने उस कंपनी पर मेहरबानी कर बुराड़ी में जमीन भी दी और फिटनेस टेस्ट की जो भी फीस होती थी उसी के जेब में जाती थी।

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से कुछ सवाल भी किए हैं। उल्लेखनीय है कि आप की 49 दिन की सरकार में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि सीबीआई को सभी दस्तावेज मुहैया कराए जाएंगे। उन्होंने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग की खामोशी पर भी निशाना साधा था।

‘आप’ ने मंत्रालय से पुछा है कि

  • क्या यह सच नहीं है कि सीबीआई ने दिल्ली के मुख्य सचिव समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है।

 

  • दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने घोटाले की जांच को खत्म करने के लिए उपराज्यपाल के माध्यम से एसीबी के लिए यह आदेश जारी करवाया था कि इस मामले में किसी प्रकार की जांच की आवश्यकता नहीं है?
  • क्या गृहमंत्रालय को यह मालूम नहीं था कि डीएम स्पोलिया भी सीएनजी फिटनेस घोटाले में शक के घेरे में हैं। इसके बाद भी उन्हें दिल्ली का मुख्य सचिव बना दिया गया।

इन्ही सवालों के साथ-साथ डीटीसी सीएनजी फिटनेस का मामला भी गरमा गया है|

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार की सख्ती के बाद डीटीसी की विजिलेंस टीम सीएनजी फिटनेस मामलों की जांच करने में लग पड़ी है। कमेटी अब डिपो में जाकर मामले की जांच करेगी। डीटीसी बसों को सड़कों पर उतारने से पहले उनकी फिटनेस भी जांची जाती है। क्योंकि बस सीएनजी से चलती हैं और सड़कों पर उतारने से पहले मानकों के तहत उनकी जांच होती है। वर्ष 2014 में उत्तरी समेत बाहरी दिल्ली के कई डिपो में सीएनजी फिटनेस पर सवाल उठ रहे थे कि जो कंपनी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करती थी, उसे मानकों सहित नहीं जांचा जा रहा है।

इस मुद्दे पर कई बार डिपो समेत यूनियन ने प्रबंधन तक बात पहुंचाई, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। इसी बीच कुछ कर्मियों ने विजिलेंस को चिट्ठी लिखकर मामले की जांच की मांग उठायी थी। उसी के आधार पर अब सभी डिपो में डीटीसी सीएनजी फिटनेस के पुराने मामलों की भी जांच करने के लिए कमेटी गठित की गयी।

 

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