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Delhi Election

दिल्ली का अपना एजुकेशन बोर्ड बनेगा

May 03, 2015 02:11 PM

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार अब राजधानी के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाने की योजना बना रही है । सरकार सीबीएसई से अलग दिल्ली का अपना एक अलग एजुकेशन बोर्ड और सरकारी स्कूलों का अलग सिलेबस बनाना चाहती है। इसके पीछे मकसद सरकारी स्कूलों का स्तर प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाने का है। सरकार का मानना है कि जरूरी नहीं कि सीबीएसई का पाठ्यक्रम परफेक्ट हो और सरकारी स्कूलों के बच्चों की जरूरतों पर खरा उतरता हो। हालांकि अभी सरकार तुरंत इस मामले में कोई कदम नहीं उठा रही है और अभी यह विषय प्लानिंग के स्तर पर ही है।

शनिवार को आईएनए स्थित त्यागराज स्टेडियम में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी का दिन वह होगा, जब हम सब अपने बच्चों को पढ़ने के लिए सरकारी स्कूलों में भेजने लगेंगे। उन्होंने सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने पर जोर दिया। उनका कहना था कि अभी एक-एक क्लास में 100-100 बच्चे पढ़ते हैं। उनकी सरकार की कोशिश है कि एक क्लास में 40 से ज्यादा बच्चे ना हो। यह तभी संभव होगा जब और नए स्कूल खोले जाएंगे और पुराने स्कूलों में नए सेक्शंस खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक साल के अंदर दिल्ली में 45 नए स्कूल खोलेगी। ये सभी मॉडल स्कूल के स्तर के स्कूल होंगे, जिनमें बच्चों को तमाम जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। सरकारी स्कूलों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए भी कई योजनाओं पर काम कर रही है। 

सीएम ने प्रिंसिपल्स के सामने एक चैलेंज भी रखा, एकेडेमिक परफॉर्मेंस और पैरंट्स की संतुष्टि। इन दो पैमानों पर खरा उतरने के लिए सभी प्रिसिंपल्स अपने-अपने स्कूलों में क्या-क्या सुधार कर सकते हैं, इस बारे में सभी स्कूलों के प्रिंसिपल्स को 15 दिन के अंदर एक ब्लूप्रिंट तैयार करके देना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि हर बच्चे का एकेडेमिक परफॉर्मेंस कैसा है और उसके पैरंट्स इससे संतुष्ट हैं कि नहीं। बाद में सरकार सालाना स्तर पर हर स्कूल का इसी पैमाने पर इवैल्यूएशन करेगी और जो स्कूल अच्छा परफॉर्मेंस देंगे, उन्हें इंसेंटिव्स भी दिए जाएंगे। केजरीवाल ने कहा कि सरकार सभी सकूलों को जरूरी संसाधन, पावर और ऑटोनॉमी तक देने को तैयार है, लेकिन इसके बदले में प्रिंसिपल्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी 16 लाख छात्रों का भविष्य बेहतर हो। सीएम ने अच्छे टीचर्स को टीचर्स एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत विदेश भेजने और रिवॉर्ड देने की घोषणा भी की। गौरतलब है कि दिल्ली में सीबीएसई से एफिलिएटेड स्कूलों की संख्या करीब 1900 है, जिनमें से 1200 स्कूल सरकारी हैं।

डिप्टी सीएम और दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा कि सरकारी स्कूलों के टीचर्स को मिड डे मील बांटने और इलेक्शन के दौरान ड्यूटी देने जैसी कई नॉन एकेडेमिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं, जिससे उनके परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है। इसके लिए दिल्ली सरकार इलेक्शन कमिशन से अनुरोध करेगी कि दिल्ली सरकार के स्कूलों के टीचर्स की ड्यूटी तभी लगाई जाए, जबकि ऐसा करना बेहद जरूरी हो। उन्होंने दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए दिल्ली सरकार का अपना कोई एजुकेशन बोर्ड नहीं होने को सबसे बड़ी कमी बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार प्रयासरत है और दिल्ली सरकार के स्कूलों का अपना अलग बोर्ड और पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।

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