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मारूथल के मंडराते खतरे तले पंजाब में बाढ़ का तांडव बार-बार होती तबाही रोकने के लिए स्थाई तौर पर लागू हो ठोस जल नीति - हरपाल सिंह चीमा

August 22, 2019 07:01 PM
हरपाल सिंह चीमा

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के सीनियर व विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा और किसान विंग के राज्य प्रधान और विधायक कुलतार सिंह संधवां ने पंजाब में बारिश के कारण नदियों व नालों (डे्रन) में आए उछाल के कारण हुई भारी तबाही के लिए अब तक की कांग्रेस और अकाली-भाजपा (बादल) सरकारों को सीधा जिम्मेदार ठहराया।
'आप' हैडक्वाटर द्वारा जारी बयान में हरपाल सिंह चीमा और कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि 'पांच नदियों' की सरजमीं पंजाब के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है कि एक तरफ केंद्र की कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों की ओर से राज्य के नदियों के पानियों की अंधी लूट, कुदरती जल स्रोतों और धरती निचले पानी का तेजी के साथ गिर रहे स्तर के कारण अगले 20 सालों तक राज्य पर मारूथल बनने के खतरे मंडरा रहे हैं, दूसरी तरफ बरसातों के दौरान हर साल आते बाढ़ और घग्गर, सतलुज और ब्यास आदि नदियों के दरार करोड़ों-अरबों रुपए का नुक्सान कर देते हैं।

आंखों में धूल साबित हुए हैं मुख्य मंत्री के रस्मी दौरे व मैराथन बैठकें
पानियों की चौकीदारी, देखभाल और सभ्य प्रयोग के लिए बड़े बजट पर दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत -संधवां

  
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि बेशक बारिश और बाढ़ कुदरती आफत हैं परंतु यदि पिछले दशकों के दौरान सत्ताधारी कांग्रेस और अकाली-भाजपा (बादल) पंजाब और पंजाबियों के प्रति सहृदय सोच रखते तो मानसून की यह बरसात आफत नहीं बल्कि राज्य के लिए वरदान बनती।

हरपाल सिंह चीमा ने मुख्य मंत्री की ओर से बाढ़ को लेकर अखबारी बयानों, सोशल मीडिया और प्रभावित इलाकों में दौरों और आधिकारियों के साथ मैराथन बैठक को लोगों की आखों में धूल करार देते हुए कहा कि हर सरकार बरसात के दिनों में यही कसरतें करती रही हैं परंतु न घग्गर की तबाही रुकी है और न ही सतलुज-ब्यास और अन्य बरसाती नालों की।
चीमा ने सिंचाई/ड्रेन विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और सैंड माफिया को बरसात, घग्गर, सतलुज और ब्यास की ओर से मचाई जाती तबाही के लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा कि इस माफिया के समक्ष कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी बादलों की तरह घुटने टेक चुके हैं, क्योंकि अब कांग्रेसी इस माफिया की हिस्सेदार हैं।
कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पंजाब के पानियों की चौकीदारी, प्रदूषण मुक्ति और देखभाल के लिए जहां ठोस जल नीति की जरूरत है, वहीं इस को लागू करने के लिए एक बड़े बजट की जरूरत है, जिस को लोगों की निगरानी में इमानदारी के साथ खर्च किया जाए और बारिश के पानी की संभाल के लिए घरों से लेकर खेतों-फैक्टरियां तक 'वाटर हारवैस्टिंग' नीति लागू करवाई जाए।
 

 

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