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शताब्दी वर्षगांठ पर जलियांवाला बाग के 'शहीदों' को शहीद का रुतबा ऐलाने सरकार -हरपाल सिंह चीमा

April 12, 2019 08:25 PM

चंडीगढ़, आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन फिरंगी माइकल-ओ-ड्वायर द्वारा जलियांवाले बाग अंधाधुंध में गोलियों से छलनी किए गए आजादी के हक में शांतिपूर्ण जलसा करते सैंकड़े पुरुषों, औरतों और बच्चों को आजादी के परवाने 'शहीद' का सरकारी रुतबा देने की जोरदार वकालत की है।

    नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जलियांवाला बाग की खूनी दर्दनाक घटना को आज पूरे 100 वर्ष हो गए हैं, परंतु हमारे देश की कोई भी सरकार अभी तक जनरल ओ ड्वायर की गोलियों का शिकार हुए इन सैंकड़ों मृतकों को 'शहीद' का रूतबा देकर नहीं दे सकी, यह अफसोस जनक नालायकी अति निंदनीय है।
    हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एक तरफ हम ब्रिटिश सरकार से इस अमानवीय कत्लेआम के लिए माफी की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ हमारे अपने देश की सरकार ने इन आजादी के परवानों को शहीद का सम्मान तक नहीं दिया। जिस के लिए आजादी के 72 वर्षों से सत्ता भोगती आ रही कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा की सरकारें जिम्मेदार हैं। 

नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जलियांवाला बाग की खूनी दर्दनाक घटना को आज पूरे 100 वर्ष हो गए हैं, परंतु हमारे देश की कोई भी सरकार अभी तक जनरल ओ ड्वायर की गोलियों का शिकार हुए इन सैंकड़ों मृतकों को 'शहीद' का रूतबा देकर नहीं दे सकी, यह अफसोस जनक नालायकी अति निंदनीय है।

 चीमा ने कहा कि बैसाखी वाले दिन आजादी के यह परवाने जलियांवाले बाग में पिकनिक मनाने के लिए इकठ्ठा नहीं हुए थे, वह आजादी के हक में तत्कालीन फिरंगी सरकार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट हुए थे, इस लिए यह न केवल स्वतंत्रता सैनानी हैं बल्कि आजादी के लिए देश पर कुर्बान होने वाले गौरवमई शहीद हैं।
    हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि लंबे समय से देश के लिए कुर्बान होने वाले इन शहीदों को सरकारी रिकार्ड में 'शहीद' का दर्जा देने की मांग उठती आ रही है। अमृतसर का बहिल परिवार पिछले 36 वर्षों से शहीद के दर्जे के लिए लड़ाई लड़ता आ रहा। इस परिवार के महेश बहिल का कहना है कि उस के दादा हरी राम बहिल, जो पेशे से वकील थे, 13 अप्रैल 1919 वाले दिन जलियांवाले वाले बाग़ में अन्यों के साथ देश के लिए शहीद हुए थे। अपनी बुआ के हवाले से महेश बहिल बताते हैं कि उस के दादा जी की तरफ से अपनी बेटी को बोले आखिरी शब्द यह थे कि ''मैंने अपनी मां -भूमि के लिए बलिदान दिया है, मेरी खुशी दोगुनी हो जाएगी अगर मेरा पुत्र भी देश के लिए कुर्बान हो जाये''
    हरपाल सिंह चीमा ने महेश बहिल के हवाले से बताया कि यह परिवार 36 वर्षों से अपने बुजुर्गों के सम्मान के लिए जद्दोजहद करता हुआ तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और भाजपा के दिग्गज अग्रणीय लाल कृष्ण अडवानी समेत अनेकों राजनीतिज्ञों के पास पहुंच कर चुके है, परंतु किसी भी सरकार ने इस मांग को गंभीरता के साथ नहीं लिया।
    चीमा ने मांग की है कि अब ओर देरी न करते हुए प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी शनिवार 13 अप्रैल 2019 को 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर जलियांवाला बाग के शहीदों को सरकारी तौर पर शहीद के रुतबे का ऐलान करें और कैप्टन अमरिन्दर सिंह राज्य सरकार की तरफ से इस मांग को गंभीरता के साथ केंद्र सरकार के पास उठाएं। 

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