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जाखड़ बताएं अब निजी बिजली कंपनियों के खिलाफ क्यों नहीं बोलते -भगवंत मान

March 10, 2019 07:34 PM

जाखड़ बताएं अब निजी बिजली कंपनियों के खिलाफ क्यों नहीं बोलते -भगवंत मान
बिल्कुल बादलों के कदम चिह्नों पर चल रही है कैप्टन सरकार
बिजली आंदोलन के लिए लोगों की लामबंदी समझौते रद्द करवा कर रहेगी

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने ‘बिजली आंदोलन’ में लोगों की लामबंदी की प्रशंसा करते कहा कि लोकतंत्र प्रणाली में जब लोग एकजुट होकर जुड़ते हैं तो बड़े -बड़े तख्त हिल जाते हैं। ‘बिजली आंदोलन’ के लिए लोगों की लामबंदी ने सरकार को झुका लिया है परंतु यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार निजी बिजली कंपनियों के साथ पिछली बादल सरकार की ओर से किये बेहद महंगे इकरारनामे रद्द करके लोगों को बेहद महंगी बिजली दरों से निजात नहीं दिला देती।

आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने ‘बिजली आंदोलन’ में लोगों की लामबंदी की प्रशंसा करते कहा कि लोकतंत्र प्रणाली में जब लोग एकजुट होकर जुड़ते हैं तो बड़े -बड़े तख्त हिल जाते हैं। ‘बिजली आंदोलन’ के लिए लोगों की लामबंदी ने सरकार को झुका लिया है

पार्टी हैडक्वाटर द्वारा जारी प्रैस में भगवंत मान ने दोष लगाया कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने बादल सरकार वाला रास्ता पकड़ लिया है। बादलों की ओर से सस्ती बिजली पैदा करने वाले सरकारी थर्मल प्लांटों की बलि ले कर दूसरे थर्मल प्लाटों से बेहद महंगी बिजली खरीदने के 25-25 साल के समझौते अपनी हिस्सेदारी की बात पक्की करके किए गए थे। जिस का नतीजा यह निकला कि आज पंजाब में हर अमीर-गरीब को औसतन आठ-दस रुपए प्रति यूनिट बिल आ रहा है, जो पूरे देश में मंहगी दर है। यदि समझौते वाजिब दरों पर हुए होते तो आधे मूल्य में बिजली पड़ती और हर साल 2800 करोड़ रुपए का फालतू बोझ पंजाब के बिजली खप्तकारों पर न पड़ता। 

भगवंत मान ने पंजाब कांग्रेस के प्रधान और संसद मैंबर सुनील जाखड़ को पूछा कि 2017 के चुनाव से पहले बादलों की तरफ से निजी बिजली कंपनियों के साथ किये समझौते विरुद्ध जो मोर्चा खोला हुआ था, उनकी अपनी कांग्रेस सरकार बनने पर कैसे बंद हो गया? क्या बादलों की तरह कांग्रेस सरकार ने भी निजी बिजली कंपनियों के साथ अपनी हिस्सेदारी की बात पक्की कर ली है? जिस कारण सुनील जाखड़ ने चूप्पी साध ली है, जबकि वह बतौर कांग्रेस प्रधान और संसद मैंबर अपने मोर्चे को राज्य की सडक़ों से लेकर संसद तक बुलंद कर सकते थे। 
भगवंत मान ने पंजाब खास करके गुरदासपुर हलके के लोगों से अपील की है कि वह भी सुनील जाखड़ को यह सवाल पूछें कि लोगों को लूट रही बिजली कंपनियों के विरुद्ध अब क्यों नहीं जुबान खोलते।  
    
 

 

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