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किसान की खुशहाली के बिना आजादी अधूरी है

March 09, 2019 03:40 PM

खुशहाली के दो आयाम – ऋण मुक्ति और पुरे दाम

लागत के डेढ़ गुणा मूल्य देने के लिए बोनस देने तथा सम्पूर्ण खरीद की बाधाओं को समाप्त करने के लिए ने प्रधानमंत्री सहित भाजपा के सांसदों को भेजे पत्र

लागत के डेढ़ गुणा मूल्य देने के लिए बोनस देने तथा सम्पूर्ण खरीद की बाधाओं को समाप्त करने के लिए किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री सहित भाजपा के सांसदों को पत्र भेज कर भारत सरकार द्वारा दलहन-तिलहन एवं कपास की खरीद के लिए तैयार की गयी मूल्य समर्थन योजना की मार्गदर्शिका में खरीद की बाधाओं को हटाकर किसानो को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए उपजों की वर्षभर – ग्रामस्तर पर सम्पूर्ण खरीद करने के लिए केंद्र की मार्गदर्शिका को संशोधित करने, सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को तेल अंश के आधार पर मूल्य वृधि से जोड़कर प्रत्येक खरीद केंद्र पर तेल अंश मापी उपकरण रखने, औसत उचित गुणवत्ता (FAQ) के आधार पर व्यक्तिपरक निर्णय के आधार पर उत्पाद को अस्वीकृत करने की बजाय गुणवत्ता मानकों को मापने की पारदर्शी एवं वैज्ञानिक प्रणाली अपनाने की दिशा में प्रत्येक खरीद केंद्र पर उच्च तकनीकी वाले उपकरणों का उपयोग करने तथा राजस्थान में पंजीयन के लिए भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की है। 

लागत के डेढ़ गुणा मूल्य देने के लिए बोनस देने तथा सम्पूर्ण खरीद की बाधाओं को समाप्त करने के लिए किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री सहित भाजपा के सांसदों को पत्र भेज कर भारत सरकार द्वारा दलहन-तिलहन एवं कपास की खरीद के लिए तैयार की गयी

बोनस का आधार - लागत के डेढ़ गुणा दाम देने के लिए गेहूं पर 168.50 रुपये, जौ पर 430.50 रुपये, चना पर 1137.00 रुपये, सरसों एवं तौरिया पर 715 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जावें, जैस निम्न सारणी में दर्शाया हुआ है, जिसमे C2 लागत का कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा रबी फसलों की मूल्य नीति विपणन वर्ष 2019-20 में उल्लेख है। 

सारणी (रुपये - प्रति क्विंटल में)

उपज

सम्पूर्ण लागत C2 का डेढ़ गुणा

न्यूनतम समर्थन मूल्य

अंतर / बोनस

गेंहू

1339*1.5=2008.50

1840

168.50

जौ

1247*1.5=1870.50

1440

430.50

चना

3838*1.5=5757

4620

1137.00

सरसों एवं तौरिया*

3277*1.5=4915.50

4200

715.50

मंसूर

4215*1.5=6322.50

4475

1847.50

  • * तेल अंश 35% के सापेक्ष

35% तेल अंश की सरसों एवं तौरिया का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4200 रुपये प्रति क्विंटल है, फिर .25 तेल अंश के साथ 21.98 से मूल्य वृद्धि आरम्भ होती है, उसके अनुसार 42 प्रतिशत तेल अंश के लिए 592.18 रुपये की वृद्धि जोड़ने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 5507.68 रुपये होता है I राजस्थान में सामान्यतया तेल अंश 42% है I किसानो तक जानकारी पंहुचाने के लिए सरकार द्वारा गाँवों तक पंहुच रखने वाले समाचार माध्यमों में विज्ञापन की आवश्यकता है I इसकी बोनस राशि की गणना तेल अंश के अंतर के आधार पर की जावे I इसके लिए सरसों मे तेल अंश को मापने के लिए उपकरण की व्यवस्था प्रत्येक खरीद केन्द्र होना आवश्यक है, उसके अभाव में किसानो को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता है I

खरीद की बाधाओं को दूर करना – भारत सरकार की ओर से संसद में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में प्रकट किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटीड मूल्य के रूप में है, बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम रहने तक सरकार द्वारा उपज की खरीद का किसानो को विकल्प दिया जाकर उनको मजबूरीवश विक्रय से बचाने का वचन है I इस हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था वर्ष भर – ग्राम स्तर पर रखना अपरिहार्य है I इस हेतु भारत सरकार द्वारा दलहन-तिलहन एवं कपास की खरीद के लिए तैयार की गयी मूल्य समर्थन योजना की मार्गदर्शिका में सभी किसानो को उपज खरीद के लिए 90 दिन की अवधि, उत्पादन की 25% खरीद एवं एक दिन में एक किसान से 40 क्विंटल खरीद के अवरोधों को हटाया जाना I औसत उचित गुणवत्ता के आधार पर उपज को खरीद से मना करना जहाँ भ्रष्टाचार को पनपाता है वहीँ किसान को उसकी उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित करता है इसके लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा रबी फसलों की मूल्य नीति विपणन वर्ष 2019-20 में की गयी अनुशंसा के अनुसार व्यक्तिपरक निर्णय के आधार पर उत्पाद को अस्वीकृत करने की बजाय गुणवत्ता मानकों को मापने की पारदर्शी एवं वैज्ञानिक प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है ताकि उत्पादों को अस्वीकृत होने से बचाया जा सकें एवं किसानो को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकें I इस हेतु प्रत्येक खरीद केंद्र पर उच्च तकनीकी वाले उपकरणों का उपयोग किया जावें I इसके अतिरिक्त राजस्थान में भामाशाह कार्ड से एक ही व्यक्ति का पंजीयन किया जाता है, जिससे परिवार में से अन्य व्यक्ति न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री से वंचित हो जाते है I ऐसा प्रावधान केंद्र की मार्गदर्शिका में नहीं होते हुए भी उसे अनिवार्य शर्त के रूप में लादना अन्याय है क्योंकि आधार कार्ड अनिवार्य किया हुआ है I 

लागत के डेढ़ गुणा मूल्य देने के लिए बोनस देने तथा सम्पूर्ण खरीद की बाधाओं को समाप्त करने के लिए किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री सहित भाजपा के सांसदों को पत्र भेज कर भारत सरकार द्वारा दलहन-तिलहन एवं कपास की खरीद के लिए तैयार की गयी

उल्लेखनीय है कि इन अवरोधों के कारण मूंग उत्पादक 52,300 पंजीकृत किसानो को अपना मूंग 3000 रुपये से अधिक का घाटा उठा क्र बेचने कोविवश होना पड़ रहा है यही स्थिति उड़द, सोयाबीन आदि उपजों की रही I दूसरी ओर अभी जौ एवं मसूर का खरीद की घोषणा नहीं की गयी है इसीप्रकार खरीफ की बाजरा, मक्का आदि  उपजों की खरीद आरम्भ नहीं की गयी थी I इन उपजों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित किया जाना इस प्रणाली की सार्थकता पर प्रश्नावाचक (?) लगाता है.

  रामपाल जाट,  राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान महापंचायत, मो.न. 9414030250,  ईमेल- rampaljatjaipur@gmail.com

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