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बेइन्साफी का शिकार हैं आशा, आंगनवाड़ी, मिड -डे-मील और ईजीएस वर्कर -प्रो. बलजिन्दर कौर

October 19, 2018 07:18 PM

'आप' महिला विंग आशा वर्करों के हक में दिया समर्थन 
बेइन्साफी का शिकार हैं आशा, आंगनवाड़ी, मिड -डे-मील और ईजीएस वर्कर -प्रो. बलजिन्दर कौर

चंडीगढ़, आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने बिल्कुल जायज मांग को ले कर मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के 'शाही महल' के समक्ष रोष प्रदर्शन करने जा रही आशा वर्करों पर पुलिस लाठीचार्ज की निंदा की और झड़प दौरान जख्मी हुए दोनों गुटों पर अफसोस जताया है। इस के साथ ही दोष लगाया कि हर फ्रंट पर फ्लाप हो चुकी कांग्रेस सरकार एक सोची समझी साजिश के अंतर्गत प्रदरशनकारियों और पुलिस फोर्स दरमियान टकराव का माहौल बनाती है जिससे आम लोगों में मुद्दो की जगह हिंसक झड़पों ही खबर बन कर फैले। इस के उलट यदि सरकार संघर्षशील जत्थेबंदियों के साथ समय सिर बातचीत के लिए सहृदय रहे और लारेबाजी की नीति त्याग दे तो अनावश्यक टकराव और रोष प्रदर्शन टाले जा सकते हैं। 
    'आप' मुख्य दफ्तर द्वारा जारी बयान में यह दलील महिला विंग की आब्जर्वर और विधायक प्रो. बलजिन्दर कौर, महिला विंग की प्रधान मैडम राज लाली गिल और सह-प्रधान जीवनजोत कौर ने ऐकरीडेटड सोशल हैल्थ ऐकटेविस्टज (आशा) वर्करों की तरफ से अपने मासिक मान-भत्ते सम्बन्धित की जा रही मांग को बिल्कुल जायज करार दिया।

'आप' मुख्य दफ्तर द्वारा जारी बयान में यह दलील महिला विंग की आब्जर्वर और विधायक प्रो. बलजिन्दर कौर, महिला विंग की प्रधान मैडम राज लाली गिल और सह-प्रधान जीवनजोत कौर ने ऐकरीडेटड सोशल हैल्थ ऐकटेविस्टज (आशा) वर्करों की तरफ से अपने मासिक मान-भत्ते सम्बन्धित की जा रही मांग को बिल्कुल जायज करार दिया। 

प्रो. बलजिन्दर कौर ने कहा कि पंजाब सरकार न केवल आशा वर्करों बल्कि इसी तरह की सरकारी बेरुखी की शिकार मिड -डे -मील वर्करों (ईजीऐस अध्यापकों) और आंगनवाड़ी वर्करों की तरफ से पिछले लंबे समय से अपने मासिक मान-भत्ते में गुजारे लायक वृद्धि की मांग की जा रही है, परंतु इन एक लाख से अधिक महिला वर्करों की पहले बादल सरकार और अब कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार दौरान कोई सुनवाई नहीं है। प्रो. बलजिन्दर कौर ने कहा कि सरकार को जगाने के लिए वह इन सभी महिला वर्करों का दर्द विधान सभा सैशन में उठाएंगी।
    मैडम राज लाली गिल ने कहा कि एक हजार से ले कर 2000 रुपए प्रति महीना हासिल कर रही आशा वर्करों का यह भत्ता मान-भत्ता नहीं बल्कि मानहानी भत्ता है। सातवें आसमान पर चढ़ी महंगाई के जमाने में कोई इतनी मामूली राशि पर अपना घर कैसे चला सकता है? यह ख्याल कल्पना से दूर और सरकारों की तरफ से निश्चित की कम से कम मजदूरी पर भी खरा नहीं उतरता जो किीब 3600 रुपए महीना बनती है। 
    जीवनजोत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार ज़्यादा नहीं तो हरियाणा या दिल्ली सरकार की नीति और नियमों को अपना ले। उन्होंने बताया कि जहां हरियाणा सरकार आशा वर्करों को कुल मिलाकर 4 हजार रुपए प्रति महीना दे रही है वहीं केजरीवाल सरकार ने मई 2018 में आशा वर्करों के मासिक मानभत्ते में 1500 से बडा कर 3000 रुपए का दो गुणा विस्तार करने के साथ-साथ गर्भ अवस्था के 6 महीनों के लिए प्रति महीना 2 हज़ार रुपए हर सम्बन्धित आशा वर्कर लिए अलग तौर पर निश्चित किया। इस के इलावा प्रति केस जा वैकसीनेशन लाभ अलग तौर पर यकीनी बनाऐ हुए हैं।

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