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एस.एस., रमसा और ठेके पर भर्ती अध्यापकों के साथ डटी आप

October 06, 2018 04:25 PM
हरपाल सिंह चीमा

साजिश के अंतर्गत सरकारी स्कूलों को खत्म किया जा रहा -हरपाल सिंह चीमा
कैप्टन अपने फैसले पर फिर से करें विचार - डा. बलबीर सिंह

चंडीगढ़, आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने सर्व शिक्षा अभियान (एस.एस), राष्ट्रीय माध्यामिक शिक्षा अभियान (रमसा), आदर्श माडल स्कूलों के 8886 अध्यापकों के वेतन 42,800 रुपए से घटा कर केवल 15,000 रुपए करने सम्बन्धित कैबिनेट के फैसले की सख्त निंदा किया है।
'आप' द्वारा जारी संयुक्त ब्यान में विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा, डा. बलबीर सिंह, उप नेता बीबी सरबजीत कौर और प्रो. बलजिन्दर कौर ने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने राष्ट्र निर्माताओं का घोर अपमान है। एक साजिश के अंतर्गत पहले ही हाशीए पर चल रहे सरकारी स्कूलों को बिल्कुल खत्म किया जा रहा है, इन अध्यापकों को निर्गुणी वेतन की पेशकश कर कैप्टन सरकार ने भी अपने साजिशी इरादे जनतक कर दिए हैं।
'आप' नेताओं ने कहा कि कितनी शर्मनाक बात है कि जो अध्यापक आज 42,800 रुपए ले कर 65000 रुपए प्रति महीना वेतन ले रहे हैं, उन्होंने शिक्षा विभाग अधीन करने के लिए 15000 रुपए की पेशकश की गई है। यह शरेआम समूचे अध्यापक वर्ग का मनोबल गिराने वाला फैसला है, इस फैसले को सरकार तुरंत वापस ले कर अध्यापकों का सम्मान बहाल करना चाहिए, क्योंकि जो अध्यापक पूरी भर्ती प्रक्रिया और योग्यता के आधार पर 10 -10 सालों से पढ़ा रहे हैं, उनका वेतन घटाने की जगह बढ़ाना चाहीऐ, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अधीन सरकारी स्कूलों में हजारों की संख्या में खाली पोस्टे पड़ीं हैं।

'आप' नेताओं ने कहा कि कितनी शर्मनाक बात है कि जो अध्यापक आज 42,800 रुपए ले कर 65000 रुपए प्रति महीना वेतन ले रहे हैं, उन्होंने शिक्षा विभाग अधीन करने के लिए 15000 रुपए की पेशकश की गई है। यह शरेआम समूचे अध्यापक वर्ग का मनोबल गिराने वाला फैसला है

बहुत से सरकारी स्कूलों में 1-2 अध्यापक ही स्कूल को चला रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे दलितों -गरीबों और आम लोगों के बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस लिए पंजाब सरकार एम.एस., रमसा और आदर्श माडल स्कूलों में केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत नियुक्त इन अध्यापकों को बिना शर्त पूरे वेतन स्केल के अंतर्गत शिक्षा विभाग अधीन करे।
'आप' नेताओं ने ठेके पर आधारित 5178 अध्यापकों को भी तुरंत पूरे वेतन पर पक्का करने की मांग की, क्योंकि यह अध्यापक सितम्बर 2017 तक अपनी तीन साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा कर चुके हैं परंतु 4 साल बीतने के बावजूद इनको पक्का करने के लिए तीन साल के ओर प्रोबेशन पीरियड की शर्त रख दी गई। 4 साल बाद भी यह 5178 अध्यापक केवल 7000 रुपए प्रति महीना वेतन ले रहे हैं।
'आप' नेताओं ने कहा कि इतनी निर्गुणी तनख्वाह के साथ आज के महंगाई के युग में कोई व्यक्ति अपना घर नहीं चला सकता। नेताओं ने तर्क दिया कि जिस अध्यापक को अपने घर के चूल्हे और परिवार की ही चिंता सता रही हो, वह कभी भी पूरी लगन के साथ नहीं पढा सकता। नतीजा पंजाब के सरकारी स्कूलों के नतीजे हर साल बद से बदतर होते जा रहे हैं।
'आप' नेताओं ने जहां इन अध्यापक संगठनों की तरफ से शुरु किए जा रहे संघर्षों की पूर्ण हिमायत करने का ऐलान किया, वहीं मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह से अपील की है कि वह अपने शिक्षा मंत्री और सम्बन्धित आधिकारियों को दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार का शिक्षा माडल समझें और देखने के लिए दिल्ली भेजें, जिस के अंतर्गत केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की समूची काया ही कल्प कर दी है और दिल्ली के सरकारी स्कूलों का नतीजा दिल्ली के प्राईवेट स्कूलों की अपेक्षा बेहतर आ रहा है।

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