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एक और बेइन्साफी है राजनाथ सिंह की ओर से 1984 की सिक्ख नरसंहार को भीड़तंत्र हत्या तक सीमित करना -आप

July 23, 2018 05:08 PM
डा. बलबीर सिंह

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह की ओर से 1984 की सिक्ख नरसंहार को केवल भीड़ की ओर से कत्ल कर देने (लिंचिंग) तक सीमित करने का सख्त विरोधी किया है और इसे एक ओर बेइन्साफी करार दिया।

  'आप' मुख्य दफ्तर द्वारा जारी प्रैस ब्यान में पार्टी के सह-प्रधान डा. बलबीर सिंह ने कहा कि 1984 में दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में सिक्खों के खिलाफ हुई सोची समझी नरसंहार को सिर्फ भीड़ की ओर से कत्ल करने तक सीमित करके राजनाथ सिंह ने दुनिया भर में रहते पंजाबियों, इंसाफ पसन्दों खास कर पीडि़त सिक्ख कौम के दश्कों से ताजा पड़े जख्मों पर नमक छिडक़ा है। इस लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इस ब्यान को तुरंत वापस लें और इमानदारी के साथ बताएं कि उस समय कांग्रेस हकूमत की नाक तले कई दिन चला सिक्खों का कत्लेआम वास्तव में नरसंहार था या नहीं? 

डा. बलबीर सिंह ने कहा कि 1984 में दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में सिक्खों के खिलाफ हुई सोची समझी नरसंहार को सिर्फ भीड़ की ओर से कत्ल करने तक सीमित करके राजनाथ सिंह ने दुनिया भर में रहते पंजाबियों, इंसाफ पसन्दों खास कर पीडि़त सिक्ख कौम के दश्कों से ताजा पड़े जख्मों पर नमक छिडक़ा है। 

 डा. बलबीर सिंह ने कहा कि अफसोस इस बात का है कि भाजपा ने भी 1984 के नरसंहार के पीडित सिक्खों को अपनी, सरकारों दौरान समयबद्ध इंसाफ देने में रूचि नहीं दिखाई। कांग्रेस से भी आगे गुजरते नरसंहार को पहले दंगे और अब भीड़तंत्र की ओर से किए गए कत्लेआम (लिंचिंग) कह दिया गया है। जबकि कानूनी धाराएं भी नरसंहार, दंगे और लिंचिंग को अलग-अलग प्रभाषित करती हैं। डा. बलबीर सिंह ने केंद्र में भाजपा के हिस्सेदार अकाली दल बादल के सरप्रस्त प्रकाश सिंह बादल, प्रधान सुखबीर सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल से स्पष्टीकरण मांगा कि वह बताएं कि 1984 में सिक्खों के साथ जो कुछ हुआ वह नरसंहार था, दंगे थे या भीड़ की ओर से किया गया कत्लेआम (लिंचिंग) था?
    डा. बलबीर सिंह ने कहा कि यदि बादल राजनाथ सिंह के लिंचिंग वाले ब्यान के साथ सहमत हैं तो भले ही  सत्ता का सुख भोगें, अगर ऐसा नहीं है तो भाजपा से गठबंधन तोड़ कर पंजाब और पीडित सिक्खों के सामने अपनी असली सोच प्रगट करें।    

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