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दिल्ली : दिल्ली में री-डवलपमेंट के नाम हजारों पेड़ो को काटने के षड्यंत्र में भाजपा और कॉंग्रेस दोनों शामिल : AAP  

June 29, 2018 07:36 AM

चिपको आन्दोलन के जरिए 'आप' कर रही है विरोध 

गुरुवार को पार्टी कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भरद्वाज ने कहा जैसा की आप सबको ज्ञात है कि पिछले 2 हफ्तों से दिल्ली में जो री-डवलपमेंट के नाम पर पेड़ो को काटने का षड्यंत्र चल रहा है, मोदी जी ने तो केवल उसकी री-डवलपमेंट की है, असल में ये प्रस्ताव तो कॉंग्रेस का है। 

इस प्रोजेक्ट के विरोध में सन 2014 में दो अलग-अलग रिट-पिटीशन डाली गई थी। पहली पिटीशन राजीव सूरी द्वारा NGT में डाली गई, और दूसरी पिटीशन अमन लेखी जो की मीनाक्षी लेखी जी के पति है द्वारा हाई कोर्ट में डाली गई। दोनों ही पिटीशन के जवाब में NGT ने कहा कि क्योंकि इस प्रोजेक्ट की क्लियरेंस 2012 में अर्थात कॉंग्रेस के कार्यकाल और अजय माकन जी की देख रेख में दी जा चुकी है, तो अब हम इस प्रकरण में कोई फैसला नहीं ले सकते।

दिल्ली की जनता के जन-जीवन से जुड़े इस अहम मुद्दे से कांग्रेस ने अपने आप को जो अलग थलग रखा हुआ है, उसके पीछे एक बड़ा कारण ये है, कि जब कॉंग्रेस के तत्काल दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन जी खुद मंत्री (MoUD) थे, तब उन्होंने इस प्रोजेक्ट हरी झंडी दिखाई थी। बड़ी बात ये है कि उन्होंने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया।

असल में इस प्रोजेक्ट की नीव 2006 में अजय माकन जी की देख रेख में रखी गई थी। मई 2006 में NBCC जो की MOUD के अधीन काम करता है, द्वारा पेश की गई इनवायरमेंट इम्पेक्ट अससमेंट रिपोर्ट की कॉपी पत्रकारों के सामने रखते हुए सौरभ भरद्वाज ने कहा कि यह उस समय की रिपोर्ट है जब MOUD मिनिस्टर श्री अजय माकन जी ही थे। इस प्रोजेक्ट के विरोध में सन 2014 में दो अलग-अलग रिट-पिटीशन डाली गई थी। पहली पिटीशन राजीव सूरी द्वारा NGT में डाली गई, और दूसरी पिटीशन अमन लेखी जो की मीनाक्षी लेखी जी के पति है द्वारा हाई कोर्ट में डाली गई। दोनों ही पिटीशन के जवाब में NGT ने कहा कि क्योंकि इस प्रोजेक्ट की क्लियरेंस 2012 में अर्थात कॉंग्रेस के कार्यकाल और अजय माकन जी की देख रेख में दी जा चुकी है, तो अब हम इस प्रकरण में कोई फैसला नहीं ले सकते।

इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सभी क्लियरेंस में केवल एक क्लियरेंस दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2014 को दी है। और उस समय दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लग चुका था, अर्थात ये अनुमति उस समय के उपराज्यपाल साहब नजीब जंग द्वारा दी गई थी।

क्योंकि NBCC के ब्रोशर्स से ये साफ़ ज़ाहिर होता है कि यह रिहायशी ज़मीन कमर्शियल इस्तेमाल में ली जा रही है। तो पत्रकारों के माध्यम से सौरभ भरद्वाज ने केंद्र सरकार के समक्ष एक सवाल रखा  चूँकि इस ज़मीन का तत्कालीन रूप केवल डीडीए ही बदल सकती है, और एक अख़बार के माध्यम से ये पता चला है कि डीडीए द्वारा इस ज़मीन के सम्बन्ध में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, तो केन्द्रीय मंत्री हरदीप पूरी जी बताएं की इस रिहायशी ज़मीन को कब और किस विभाग द्वारा कमर्शियल रूप दिया गया ।

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