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आम आदमी पार्टी, हरियाणा का “जय किसान अभियान”!

March 16, 2015 03:46 PM

प्रेस विज्ञप्ति : 15.03.2015

हरियाणा सरकार ने 4 दिसंबर 2014 को एक नोटिफिकेशन जारी कर भूमि अधिग्रहण के बाद ग्रामीण क्षेत्र के किसान को मिलने वाले मुआवजे को आधा करने का नियम बना दिया है | वहीँ केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2014 को अध्यादेश जारी कर भू अधिग्रहण के लिए 2013 केकानून के उन प्रावधानों को भी लगभग ख़त्म कर दिया है (इस अध्यादेश को अब कानों में बदलने की कोशिश हो रही है) जिनके चलते अधिग्रहण से पहले किसान की सहमति लेने की शर्त थी | साथ ही अधिग्रहण से पहले सोशल इम्पेक्ट एसेसमेंट किया जाना था, जिससे जमीन पर निर्भरपरिवारों को भी पुनर्वास के समय लाभ मिलना था |

2013 के भू अधिग्रहण कानून के प्रावधान के अनुसार एक जनवरी 2015 तक नोटिफिकेशन जारी कर नेशनल हाइवे ऑथोरिटी एक्ट सहित कई अन्य कानूनों के लिए भी वही प्रावधान लागू करने थे | सरकार ने 31 दिसंबर के अध्यादेश के जरिये नेशनल हाइवे ऑथोरिटी एक्ट को 2013 के भू अधिग्रहण कानून के दायरे में ला दिया | जिसका अर्थ है कि जहाँ भी एक जनवरी 2015 के बाद नेशनल हाइवे ऑथोरिटी एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहित का मुआवजा दिया जाना है वहां 2013 के कानून के प्रावधान लागू होने हैं | इस कानून के अनुसार बाजार मूल्य का सौ फीसदी सोलेशियम दिया जाना है | मगर सिरसा में जहाँ नेशनल हाइवे को चौड़ा किये जाने व बाई पास बनाने के लिए अधिग्रहण की जा रही जमीन का मुआवजा तय करने के लिए तैयार केलकुलेशन में 30 प्रतिशत सोलेशियम जोड़ा गया है (केलकुलेशन शीट सलंगन है) | जो कि सरासर गैर वाजिब है |

आम आदमी पार्टी, हरियाणा व केंद्र सरकार के इन फैसलों का कडा विरोध करती है व पार्टी ने सकल्प लिया है कि हरियाणा में हरियाणा सरकार के इस नियम के रहते भूमि अधिग्रहण करने की छूट नहीं दी जायेगी | पार्टी हरियाणा सरकार से मांग करती है कि मुआवजा आधा करने वाले 4दिसंबर 2014 के नोटिफिकेशन को रद्द करे, जिससे कि इस नोटिफिकेशन को जारी कर बदले गए नियम को तुरंत वापिस किया जा सके | साथ ही आम आदमी पार्टी, हरियाणा केंद्र सरकार द्वारा 31 दिसंबर 2014 को जारी किये अध्यादेश को वापिस लेने व उसी के अनुरूप संसद में पेश किये गए बिलको वापिस लिए जाने की मांग करती है | आप के राज्य प्रभारी योगेन्द्र यादव ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को 19 फरवरी 2015 को पत्र भी लिखा था | 13 मार्च को हरियाणा विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस विधायक दल की नेता को भी पत्र लिख कर मांग की है कि हरियाणा सरकार के 4 दिसंबर 2014 के नियम को वापिस लेने की आवाज विधान सभा में उठायें |

आम आदमी पार्टी, हरियाणा राज्य सरकार के इस नियम व केंद्र सरकार के अध्यादेश (जिसे अब बिल के तौर पर पेश किया गया है) के खिलाफ “जय किसान अभियान” चला रही है | इस अभियान के तहत पार्टी नेता योगेन्द्र यादव के नेत्रित्व में राज्य के सभी सांसदों को एक चिट्ठीके साथ  नमक की थैली भेंट कर किसान के प्रति सांसदों के कर्तव्य की याद दिला रही है | गुडगाँव, करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद व पंचकुला के बाद आज 15 मार्च 2015 को सिरसा व हिसार के सांसदों को नमक की थैली भेंट कर, उन्हें जनता के प्रति उनके कर्तव्य की याद दिलायेगी | साथ ही जनता कि तरफ से एक पत्र भी उन्हें सौंपा जाएगा|

भूमि अधिग्रहण से जुड़े 2013 के क़ानून के शेड्यूल ‘एक’ के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण करने के बाद मुआवजा तय करते हुए बाजार मूल्य पर फेक्टर दो तक लगाना होगा | इस तरह से जो राशी बनेगी उस पर सौ फीसदी सोलेशियम दिया जाना है | यानि एक एकड़ जमीनका बाजार मूल्य यदि 50 लाख तय होता है तो उस पर फेक्टर दो लगा कर, दो से गुना किया जाएगा| इस तरह से इन 50 लाख रूपये पर सौ फीसदी सोलेशियम दिया जाना है, तो एक एकड़ जमीन का कुल मुआवजा एक करोड़ रूपये बनेगा | मगर हरियाणा सरकार के चार दिसंबर के नोटिफिकेशनद्वारा बदले गए नियम के अनुसार बाजार मूल्य पर फेक्टर एक लगाने का प्रावधान कर दिया गया है, जिससे 25 लाख को एक से गुना किया जाएगा| जिससे 100 फीसदी सोलेशियम देने के बाद भी सिर्फ 50 लाख रूपये मिलेंगें |

हरियाणा सरकार ने 27 नवम्बर 2014 को मुआवजे के लिए फेक्टर एक लगाने के प्रस्ताव के साथ नोटिफिकेशन जारी कर एक सप्ताह के अन्दर एतराज दायर करने के लिए जनता को कहा | यह नोटिफिकेशन 30 नवम्बर 2014 को अखबार में छपी | बावल के किसानों ने (जहाँ 3400 एकड़अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का अवार्ड घोषित होना था) इस प्रस्तावित नियम पर एतराज दयार कर कहा कि यह नियम कानून के खिलाफ है, इस लिए इस प्रस्ताव को वापिस लिया जाये | मगर किसानों के हित की चिंता ना करते हुए सरकार ने उस प्रस्तावित नियम को अंतिम रूप देने के लिए 4दिसंबर को नोटिफिकेशन जारी कर दी | जिससे हरियाणा के किसान को मिलाने वाला मुआवजा एक ही झटके में आधा कर दिया गया | 

 हरियाणा कि जनता से यह धोखा करने वाले सरकार के मुख्यमंत्री ब्यान देते हैं कि हरियाणा सरकार ने मुआवजा बढ़ा दिया है | हरियाणा सरकार के मंत्री श्री अभिमन्यु ने दो- तीन दिन पहले ब्यान दिया जो ‘दी हिन्दू’ अखबार में छपा था | ब्यान के अनुसार हरियाणा के भाजपा सरकार नेऐसा कोई नियम नहीं बनाया, जिससे कि मुआवजा कम होता हो| यह भी कहा कि 4 दिसंबर को तो सिर्फ नोटिफिकेशन जारी किया गया था| केंद्र सरकार के मंत्री वीरेंद्र सिंह ने भी हरियाणा में अधिग्रहण की गई जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य से चार गुना अधिक दिए जाने का झूठ बार बार बोला है |जबकि 4 दिसंबर 2014 के नोटिफिकेशन से हरियाणा सरकार के नियम 4 में सब नियम ‘5’ जोड़ा गया है|

केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर को अध्यादेश जारी कर 1894 के पुराने भू अधिग्रहण को ही वापिस लाने की स्थिति बना दी है | इस अध्यादेश के माध्यम से प्राइवेट कम्पनियों ही नहीं “प्राईवेट एंटिटी” (जिसका अर्थ है लिमिटेड कम्पनी ही नहीं किसी भी पार्टनर या प्रोपराइटर फर्म) के लिए भीबिना किसानों की सहमति के जमीन अधिग्रहित की जा सकती है, यानि जमीन छिनी जा सकती है | जहां सालों के लम्बे संघर्ष के बाद कानून बना था कि भूमि अधिग्रहण से पहले जमीन पर निर्भर सभी लोगों (चाहे वे जमीन के मालिक ना भी हों) का उचित रूप से पुनर्वास करें के लिए “सोशलइम्पेक्ट एसेसमेंट” किया  जाएगा ताकि पता लगाया जा सके कि किन लोगों को क्या मुहैया करवाया जाना है | इस अध्यादेश से सरकार ने इस प्रावधान को भी ख़त्म करने का प्रबंध कर दिया है | खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बहु फसल वाली जमीन अधिग्रहण करने पर अंकुश लगाया गया था| जिस अंकुश को हटा दिया गया है |

आम आदमी पार्टी, हरियाणा हरियाणा सरकार व केंद्र सरकार द्वारा किसान व खेती पर निर्भर समाज के हितों के खिलाफ बनाए गए नियमों व प्रावधानों के विरोध में लोकतान्त्रिक तरीके से लगातार आन्दोलन चलाएगी व हरियाणा की जनता को लामबंद कर सरकार को मजबूर करेगी किकिसान विरोधी फैसले वापिस लिए जाएँ | 

आम आदमी पार्टी, हरियाणा केंद्र व राज्य सरकार से मांग करती है कि फसलों की लागत पर पचास प्रतिशत लाभ के साथ भाव दिए जाने के वादे को जल्द पूरा करे | लोकसभा व विधान सभा चुनाव के समय भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह वादा किया था | आम आदमी पार्टी,हरियाणा मानती है कि अब हरियाण के कृषि मंत्री यह कह कर अपने वादे से पीछे नहीं हट सकते कि वे सांसद नहीं बन सके | मगर इस बात पर चुप हैं कि उनकी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कह दिया है कि फसल की लागत से अधिक मूल्य नहीं दिया जा सकता | अब राज्य के कृषिमंत्री को आवाज उठानी चाहिए |

आम आदमी पार्टी, हरियाणा सरकार से यह भी मांग करती है फसल खरीद के पुख्ता इंतजाम समय रहते करे | क्योंकि अब “एफ सी आई” ने हरियाणा में फसल खरीदने से हाथ पीछे खींच लिया है | फसलों के नुक्सान की भरपाई सरकार तुरंत सुनिश्चित करे|

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