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बीजेपी शासित केंद्र सरकार ही बिल या अध्यादेश लाकर रोक सकती है दिल्ली की सीलिंग – संजय सिंह

March 12, 2018 11:32 PM

दिल्ली में जारी सीलिंग के ख़िलाफ़ AAP के राज्यसभा सांसदों ने सदन में दिया प्राइवेट मेबंर बिल

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पार्टी कार्यालय में प्रैस कॉंफ्रैंस को सम्बोंधित करते हुए कहा कि ‘दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में सीलिंग का कहर पिछले काफी दिनों से बरपाया जा रहा है। व्यापारी आज सीलिंग की वजह से भुखमरी का शिकार हो रहे हैं। आज दिल्ली के व्यापारी सड़कों पर आ गए हैं। सीलिंग के लिए पुलिस ने व्यापारियों के ख़िलाफ़ बर्बरता दिखाई है। इतनी बुरी से व्यापारियों को पीटा गया कि कुछ को तो एम्स में भर्ती कराना पड़ा है। महिलाओं को भी पुलिस ने नहीं बक्शा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस को ये अधिकार किसने दे दिया कि व्यापारियों को घसीट-घसीट कर पीटे? 

कन्वर्जन चार्ज के तौर पर 4 हजार करोड़ रुपए इकठ्ठा हुए लेकिन उसका कोई हिसाब एमसीडी के पास नहीं है। वो पैसा उन बाज़ारों के विकास पर खर्च होना था जहां के व्यापारियों ने कन्वर्जन चार्ज के नाम पर एमसीडी को वो पैसा दिया था लेकिन भाजपा शासित एमसीडी के पास उसका कोई हिसाब नहीं है।

हम पहले दिन से कह रहे हैं कि दिल्ली में चल रही सीलिंग का समाधान सिर्फ़ और सिर्फ़ केंद्र सरकार के पास है। सदन के दौरान बिल लाकर, और सदन नहीं है तो अध्यादेश लाकर सीलिंग से राहत दिलाई जा सकती है लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर रही है’।

कन्वर्जन चार्ज के तौर पर 4 हजार करोड़ रुपए इकठ्ठा हुए लेकिन उसका कोई हिसाब एमसीडी के पास नहीं है। वो पैसा उन बाज़ारों के विकास पर खर्च होना था जहां के व्यापारियों ने कन्वर्जन चार्ज के नाम पर एमसीडी को वो पैसा दिया था लेकिन भाजपा शासित एमसीडी के पास उसका कोई हिसाब नहीं है।

बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य राजनीतिक दल सभी व्यापारियों के साथ हैं तो संसद में क्या संशोधन नही आ सकता है? क्यों नहीं संसद में दिल्ली की सीलिंग को रोकने के लिए बिल पेश किया जाए?

बीजेपी शासित केंद्र सरकार और बीजेपी की ही एमसीडी द्वारा सीलिंग को रोकने की दिशा में काम करने कि बजाय अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से सवाल पूछे जा रहे हैं जिनका कोई औचित्य नहीं है।

जो बिल पहले कांग्रेस की सरकार ने 2011 में पास कराया था और उसके बाद साल 2017 में बीजेपी सरकार ने उसमें संशोधन कराया है उसे हमने स्टडी किया है और हमारी मांग है कि उसी तरह का संशोधन करके सीलिंग को रोका जा सकता है जो केंद्र सरकार अब व्यापारियों के हक़ में नहीं कर रही है। जब नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव बनाने के लिए अध्यादेश लाया जा सकता है तो क्या दिल्ली के व्यापारियों के व्यापार और ज़िंदगियां बचाने के लिए संसद में बिल नहीं लाया जा सकता?

संजय सिंह ने साथ ही कहा कि ‘सीलिंग को रोकने के लिए संसद में हमने प्राइवेट मेंबर बिल दिया है। हमारी जानकारी में आज़ादी के बाद से अब तक लगभग 14 प्राइवेट मेम्बर बिल स्वीकृत हुए हैं, और पिछले 5-6 महीनों में 300 से ज्यादा प्राइवेट मेंबर बिल आ चुके हैं, हालांकि इस पर सहमति होना और पास होने की एक लंबी प्रक्रिया है, सदन में इस पर सहमति बनेगी या नहीं बनेगी इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि अगर भाजपा की केंद्र सरकार चाहे तो तुरंत संसद में बिल आ सकता है और सीलिंग भी रुक सकती है।

आम आदमी पार्टी के तीनों सांसदों ने संसद में व्यापारियों की आवाज़ को पुरज़ोर तरीक़ से उठाया है और गृहमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस की बर्बरता को रोकने और सीलिंग पर समाधान निकालने की अपील की है। इसके अलावा हमने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री से भी मिलने का वक़्त मांगा है।

हमारा और पूरी दिल्ली के व्यापारियों का एक ही मूल सवाल है कि दिल्ली पुलिस, एमसीडी और केंद्र में सरकार भाजपा की है तो फिर व्यापारियों का उत्पीड़न क्यों किया जा रहा है।‘‘जिस तरह का बयान अजय माकन जी दे रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है कि अजय माकन बीजेपी की कठपुतली बनकर खेल रहे हैं।

जहां तक बात है सीलिंग के विषय पर सर्वदलीय बैठक की है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं को बैठक के लिए बुलाया है, अगर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष देश में मौजूद नहीं हैं तो उनकी पार्टी के दूसरे नेता तो मौजूद हैं, वो किसी और को भी भेज सकते हैं। उम्मीद करते हैं कि इस सर्वदलीय बैठक में सहमति बनेगी कि सभी मिलकर केंद्र सरकार से अपील करेंगे कि एक संशोधन बिल लाकर सीलिंग के कहर से व्यापारियों को बचाया जाए।

प्रैस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एंव राज्यसभा सांसद एन डी गुप्ता ने कहा कि ‘पूर्व में कांग्रेस की सरकार ने साल 2011 में राजधानी दिल्ली के लिए स्पेशल प्रोविज़न एक्ट के तहत ये प्रावधान किया था कि केंद्र सरकार वक्त-वक्त पर लोकल अथॉरिटीज़ को ज़रुरी और विशेष बदलाव को लेकर  निर्देश जारी करती रहेगी जिन्हें क्रियान्वित करना लोकल अथॉरिटीज़ का काम रहेगा।

साल 2017 में बीजेपी की सरकार उसी एक्ट में संशोधन लाती है तो फिर अब दिल्ली के व्यापारियों की दुकानें क्यों उजाड़ी जा रही हैं? साल 2017 में किए गए संशोधन में जो प्रावधान किए गए हैं वो 2020 तक मान्य किए गए हैं लेकिन बावजूद इसके सीलिंग जारी है। भाजपा को इसका जवाब देना चाहिए

वहीं दूसरी तरफ़ अमर कॉलोनी में जब व्यापारियों ने कन्वर्जन चार्ज जमा कराके अपने शटर पर उसकी कॉपी लगा रखी है, जीएसटी जमा करा रहे हैं, और दूसरे तरह के टैक्स जमा करा रहे हैं लेकिन फिर भी उनकी दुकानें सील की जा रही हैं, यह अन्याय है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि‘ये सीलिंग का जिन्न जो व्यापारियों के धंधे से लेकर मज़दूरों की नौकरी तबाह कर रहा है और अब धीरे-धीरे आवासीय इलाक़े में भी पहुंच गया है और अब लोगों के घरों पर भी सीलिंग का कहर बरप रहा है। अगर किसी ने अपनी ज़रुरत के मुताबिक़ एक कमरा भी बना लिया है तो उस कमरे को अब सील किया जा रहा है।

दिल्ली में यह सीलिंग एक बीमारी की तरह है और अगर इसे नहीं रोका गया तो यह बीमारी पूरी दिल्ली को अपनी गिरफ्त में ले लेगी। दिल्ली में सीलिंग को रोकने की पूरी ज़िम्मेदारी बीजेपी शासित केंद्र सरकार की है। दिल्ली सरकार ने अपनी सारी ज़िम्मेदारियां पूरी की हैं, जितने नोटिफ़िकेशन दिल्ली सरकार जारी कर सकती थी वो किए हैं, लेकिन एमसीडी और डीडीए में बीजेपी का शासन है और सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार ही दिल्ली की सीलिंग को रोक सकती है।

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