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अभिभावकों का वित्तीय शोषण बंद करे निजी स्कूल-भगवंत मान

February 16, 2018 06:42 PM

-अपील के साथ-साथ लामबंद संघर्ष करने की दी चेतावनी
-अभिभावकों की बजाए निजी स्कूलों के हित पाल रहे है फीस रेगुलेटरी कानून

पंजाब के निजी स्कूलों द्वारा नए अकादमिक सैशन के लिए अभिभावकों के किये जा रहे वित्तीय शोषण का सख्त नोटिस लेते हुए आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील की है कि वह फीसों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की हिदायतों का पालन करे। यदि निजी स्कूलों ने फीसों के नाम पर अभिभावकों की ‘लूट‘ बंद न की तो आम आदमी पार्टी पेरेंट्स समितियों, सामाजिक जत्थेबंदियों और आम जनता को साथ ले कर जिम्मेदार निजी स्कूलों और पंजाब सरकार के विरुद्ध लामबंद संघर्ष शुरु करेगी।
‘आप ‘ द्वारा जारी प्रैस बयान में भगवंत मान ने कहा कि अकाली-भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने सोची-समझी साजिश के अंतर्गत सरकारी स्कूल शिक्षा को तबाह कर दिया और राज्य में शिक्षा माफिया को इतना हावी कर दिया कि आज बहुत से निजी स्कूल उच्च अदालतों के फैसलों को भी कुछ नहीं समझते। 
भगवंत मान पिछली अकाली-भाजपा सरकार द्वारा बनाऐ गए फीस रेगुलेटरी एक्ट -2016 को अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने वाला कानून करार देते हुए कहा कि जितनी देर प्राईवेट स्कूल फीस रेगुलेटरी कानून में सुप्रीम कोर्ट और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की हिदायतों को शामिल नहीं किया जाता उतनी देर यह कानून अभिभावकों की जगह प्राईवेट स्कूलों के हक में ही भुगतेगा। इस एक्ट में फिर से दाखिला (री-अडमिशन) समेत कई हिदायतें शामिल नहीं हैं जो अभिभावक के हितों की रक्षा करते हों। 
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब भर से मिल रही शिकायतों के अनुसार निजी स्कूल नए अकादमिक सैशन के लिए अभिभावकों से री-अडमिशन फीस वसूलने लगे हैं। जो अदालती हुक्मों की उल्लंघना है। उन्होंने बताया कि सी.डब्लयू.पी 20516 /2009 के अदालती फैसले अनुसार कोई भी निजी स्कूल री -एडमिशन फीस नहीं वसूल सकता।
भगवंत मान ने बताया पंजाब के फीस रेगुलेटरी कानून 2016 में ट्यिूशन फीस में 8 प्रतिशत सालाना वृद्धि के बारे भी स्पष्टता नहीं है। इसकी आड़ में अभिभावकों का बड़े स्तर पर शोषण हो रहा है। मौजूदा कैप्टन सरकार ने बादल सरकार से भी दो कदम आगे जाते हुए बहुत से स्कूलों को कुल फीसों और खर्चे पर 8 प्रतिशत ज्यादा वसूलने की खुली छोट दे दी है। फीस वृद्धि से पहले पेरेंट्स समितियों और फीस समितियों की मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं समझा जाता।
भगवंत मान ने कहा कि विद्या को परोपकारी बनाने की बजाए इस का पूरी तरह से व्यापारीकरण कर दिया गया है और सत्ताधारी गुट इस शिक्षा माफिया की हिस्सेदार बन बैठे हैं। स्कूलों को ‘शापिंग माल बना कर किताबें, कापियां और वर्दियां आदि का बड़े स्तर पर व्यापार किया जा रहा है, जबकि कायदे कानून मुताबिक एन.सी.आर.टी की सस्ते परन्तु उच्च स्तर की किताबें मुहैया होनी चाहीऐ हैं।
भगवंत मान ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार को दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार से सेध लेते हुए इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए।

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