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मोदी सरकार ने बैंक सिस्टम को बर्बाद कर दिया है पढिये ये रिपोर्ट

February 10, 2018 07:59 PM
आपका अखबार और आपका मीडिया सही तथ्यों को बताने में नही बल्कि उन्हें छिपाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। कल एसबीआई के तिमाही परिणाम घोषित किये। लगभग सभी अखबारों सभी मीडिया चैनलो की एक ही हेडलाइन थी कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस वित्त वर्ष को तीसरी तिमाही में कुल 2,416.37 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया है।

लेकिन यह बड़ी खबर नही थी, नफा नुकसान तो चलता ही रहता है, बड़ी खबर तो बेतहाशा बढ़ता एनपीए है।

आपको पता है कि बैंकिंग की रूल बुक कहती हैं कि आदर्श स्थिति में शुद्ध एनपीए डेढ़ प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. लेकिन कल जो एसबीआई के तिमाही परिणाम सामने आए है उसमे पता चला है कि एसबीआई का शुद्ध एनपीए बढ़कर अग्रिम का 5.61 प्रतिशत हो गया है।लेकिन रुकिए इस से भी आश्चर्यजनक तथ्य अभी सामने आना बाकी हैं। 

कल जो रिपोर्ट सामने आई है उसके अनुसार समीक्षाधीन अवधि में एसबीआई का सकल फंसा हुआ कर्ज (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां या जीएनपीए) लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है जबकि वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के दौरान जीएनपीए 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपये था।

कल जो रिपोर्ट सामने आई है उसके अनुसार समीक्षाधीन अवधि में एसबीआई का सकल फंसा हुआ कर्ज (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां या जीएनपीए) लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है जबकि वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के दौरान जीएनपीए 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपये था।

इसका अर्थ यह है कि 1 साल के अंदर 92 हजार करोड़ रुपये फॅसे हुए कर्ज की श्रेणी में आ गए आप खुद सोचिए कि इतने सालों में जो जीएनपीए 1 लाख करोड़ के आसपास ही पुहचा था वह एक झटके में लगभग दोगुना होकर सीधे 2 लाख करोड़ के आसपास पुहंच गया है

इतना ही नही वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के दौरान जो एनपीए यानी पूर्ण रूप से डूबा हुआ कर्ज 61,430.45 करोड़ रुपये था वह इस बार सीधा 1,02,370.12 करोड़ रुपये हो गया हैं।और सुनिए देश भर का कर्ज यदि दस हजार रुपये मान लिया जाए तो 1 हजार रुपया यानी 10 प्रतिशत आलरेडी डूब चुका है।

एक जानकारी के अनुसार एसबीआई भारत की कुल बैंकिंग का एक चौथाई है अर्थात इसके नतीजों से पूरी अर्थव्यवस्था के बारे में निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं, ओर सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह कर्ज खेती किसानी का डूबा हुआ नही है न ही किसी छोटे मोटे व्यापार करने वाले गली मोहल्ले के दुकानदारों ने डुबोया है, यह कर्ज बड़े कारपोरेट ने डुबोया है जो प्रधानमंत्री को चुनावी सभाए करने के लिए प्लेन मुहैया कराते हैं जो हर छोटे बड़े विदेशी दौरे पर उनके साथ डील सेट करवाते हैं।

बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार संवाददाताओं से कह रहे हैं ‘‘तीसरी तिमाही के परिणाम निश्चित रूप से निराशाजनक रहे हैं ।

वास्तव में यह परिणाम निराशाजनक नही बल्कि डिजास्टर है अब आप समझ सकते हैं कि सरकार क्यो बेल इन जैसे प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू करने के पीछे पड़ी हुई है – गिरीश मालवीय

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