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अमन अरोड़ा ने ‘हितों के टकराव रोकू कानून‘को वक्त की जरूरत बताया

February 08, 2018 08:38 PM

चण्डीगढ़, 8 फरवरी 2018 
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के सह-प्रधान और सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा ने ‘हितों के टकराव‘के मुद्दे पर सख्त कानून बनाने के लिए आज पंजाब विधान सभा के स्पीकर राणा के.पी. सिंह को प्राईवेट मैंबर बिल ‘दा  पंजाब अनसीटिंग ऑफ मैंबर्ज ऑफ पंजाब लेजिस्लेटिव असंबली फाऊंड गिलटी ऑफ कन्फलिक्कट ऑफ इंट्रस्ट बिल 2018’ सौंपते हुए आगामी बजट सत्र दौरान इसे सदन में पेश करने की इजाजत मांगी है।
आज यहां प्रैस कान्फ्रैंस दौरान मीडिया के रू-ब-रू होते हुए अमन अरोड़ा ने बताया कि ‘हितों के टकराव‘ सम्बन्धित इस बिल के दायरे में राज्य के मुख्य मंत्री, मंत्री और सभी विधायक शामिल होंगे, यदि इनमें से कोई भी सत्ता और अपने रुतबे का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने की कीमत पर अपना निजी लाभ लेता है तो 6 महीनों के अंदर-अंदर उस विधायक को उसके पद से बर्खास्त कर दिया जाए। इस मौके विधायक कंवर संधू, कुलतार सिंह संधवां, अमरजीत सिंह, एडवोकेट जसतेज अरोड़ा उपस्थित थे। 
अमन अरोड़ा ने बताया कि ‘हितों के टकराव रोकू कानून‘का उद्देश्य ही सत्ता और पद के दुरुपयोग को रोकना है। इस लिए जो भी जनप्रतिनिध अपने निजी हितों, वित्तीय और व्यापारिक लेन-देन में प्रत्क्ष व अप्रत्क्ष तौर पर राज्य और राज्य की जनता के हितों को दाव पर लगाने का आरोपी पाया जाता हैं तो उसकी बतौर विधायक सदस्यता रद्द कर दी जाए। 
अमन अरोड़ा ने सरकार की नीति और नीयत पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बात समझ नहीं आ रही कि सरकार ने इस दिशा में उचित व ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? जबकि इस कानून को लागू करने के लिए सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ता। इतना ही नहीं यह कानून राजनैतिक लोगों द्वारा पदों का दुरुपयोग करके सरकारी खाजने की होने वाली लूट को रोकेगा। अमन अरोड़ा ने अफसोस जताते हुए कहा कि सत्ता और शक्तियों को निजी हितों के लिए दुरुपयोग कर पंजाब के सत्तारुढ़ राजनैतिक दलों ने आज पंजाब को ढाई लाख करोड़ रुपए का ऋणी और वित्तीय तौर पर कंगाल कर दिया है।  

अमन अरोड़ा ने इस बिल को पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए पांच सदस्यीय आयोग गठित करने की सलाह दी। इस आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का पूर्व जज हो और बाकी चार सदस्य कानून, अर्थ शास्त्र, पत्रकारिता, रक्षा सेवाएं और शिक्षा आदि के क्षेत्र में अहम योगदान डालने वाले बेदाग शख्सियतों में से लिए जाएं। इस आयोग की अवधि 6 वर्ष के लिए हो और आयोग के प्रमुख और सदस्यों के चुनाव के लिए ‘सिलैक्ट कमेटी‘ में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठता के अनुसार दूसरा वरिष्ठ जज, मुख्य मंत्री, स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष शामिल हों। 

अमन अरोड़ा ने इस बिल को पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए पांच सदस्यीय आयोग गठित करने की सलाह दी। इस आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का पूर्व जज हो और बाकी चार सदस्य कानून, अर्थ शास्त्र, पत्रकारिता, रक्षा सेवाएं और शिक्षा आदि के क्षेत्र में अहम योगदान डालने वाले बेदाग शख्सियतों में से लिए जाएं। इस आयोग की अवधि 6 वर्ष के लिए हो और आयोग के प्रमुख और सदस्यों के चुनाव के लिए ‘सिलैक्ट कमेटी‘ में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठता के अनुसार दूसरा वरिष्ठ जज, मुख्य मंत्री, स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष शामिल हों। 
अमन अरोड़ा ने ‘हितों के टकराव रोकू कानून‘को वक्त की जरूरत बताया और कहा कि इस कानून के आने से सत्ता शक्ति और पद के दुरुपयोग पर नकेल कसी जा सकती है। अमन अरोड़ा ने कहा कि यदि यह कानून अस्तित्व में आ जाता है तो रेत-बजरी, शराब, ट्रांसपोर्ट, केबल टीवी, बिजली, सिंचाई, निर्माण कार्यों, भू-माफीया आदि पर लम्बे समय से सक्रिय माफिया का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा। आम लोगों और राज्य के वित्तीय और कुदरती स्त्रोतों को बड़ी राहत मिलेगी। भ्रष्टाचार रुकेगा तथा लोकतंत्र मजबूत होगा। 
अमन अरोड़ा ने स्पीकर को कांग्रेस पार्टी द्वारा चुनाव मनोरथ पत्र में किए गए वायदे याद करवाते कहा कि अफसोस की बात है कि ‘हितों के टकराव रोकू बिल’ को लेकर आने की वायदा-खिलाफी की है। अपने एक वर्ष के कार्यकाल, तीन विधान सभा सत्रों और अनगिणत कैबिनेट बैठकें करने के बावजूद सरकार इस बिल को पूरी तरह भूल चुकी है। फलस्वरूप, पिछली सरकारों की तरह आज भी सरकारी खजाने और लोगों के धन की लूट उसी तरह जारी है। अमन अरोड़ा ने कहा कि यूं लग रहा है कि पंजाब की अंधी लूट-पाट के लिए जिम्मेदार लोगों को खुली छूट मिल गई है और उनसे पाई-पाई का हिसाब और जेलों में फेंकने के चुनावी वायदे ‘जुमला‘साबित हुए हैं।

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