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बजट 2018 : विकास की आड़ में जनता गई भाड़ में

अमरजीत सिंह  | February 01, 2018 11:05 PM

किसान, वेतनभोगी, आम आदमी, महिला, व्यापारी, किसी को राहत नहीं

आयकर सीमा में परिवर्तन नहीं, टैक्स में छूट के नाम पर भारी लूट

वही घिसी पिटी बातें, वही खोखले दावे, पांच साल पुराने वही वादे, असलियत ये कि वित्त मंत्री अरुण जेतली ने देश व समाज के सभी वर्गों को फिर से दिव:स्वपन दिखाए, राहत न किसान को मिली न आम इंसान को। ले देकर ये है 2018 के आम बजट का लेखा जोखा, इस पर भी मोदी तारीफ के पुल बांध रहे हैं। जिस किसान की आय को चार साल पहले दो गुणा करने का अहद मोदी सरकार ने किया था, अब वही अहद फिर से किया गया। जिस आम कर्मचारी को ये उम्मीद थी कि अपने शासन के अंतिम (शायद वैसे भी ये अंतिम ही हो) बजट में कम से कम टैक्स की स्लैब को बढ़ाया जाएगा, उसके साथ भी भारी धोखा हुआ है। टैक्स दरों में कोई परिवर्तन न करके स्टैंडर्ड डिसकाऊंट के नाम पर कुछ राहतें बंद करके, कुल मिलाकर 40000 की कटौती देना तो ऊंट के मुंह में ज़ीरे समान है। कहा जा सकता है, हर वर्ग उपेक्षित किया गया, हर किसी को नुकसान हुआ।

कर्मचारी वर्ग इसलिए आहत है क्योंकि हर कोई सरकार सत्ता में आने से पहले उनसे वादा करती है कि आयकर में छूट का दायरा बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा संभवत: होता नहीं है। यही वादा मोदी सरकार ने पांच साल पहले भी किया था और पिछले साल भी। आयकर स्लैब को इस बार भी छुआ तक नहीं गया। कुल सालाना आमदनी में से यदि 40000 रुपए कम करके बाकी आमदनी पर टैक्स लगाया जाता है तो इससे रत्ती भर फर्क नहीं पडऩे वाला। अरुण जेतली अगर इस बात पर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं तो थपथपाते रहें, कर्मचारी जान चुके हैं कि उनके साथ फिर एक बार धोखा हुआ है जिसे उन्हें हर हाल में सहना ही है। 

कर्मचारी वर्ग इसलिए आहत है क्योंकि हर कोई सरकार सत्ता में आने से पहले उनसे वादा करती है कि आयकर में छूट का दायरा बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा संभवत: होता नहीं है। यही वादा मोदी सरकार ने पांच साल पहले भी किया था और पिछले साल भी। 

अगले साल होने जा रहे आम चुनाव से पहले अपनी सरकार का अंतिम बजट पेश होने से पहले हर खास-ओ-आम को बहुत सी उम्मीदें थीं जो सब धराशायी हो चुकी हैं। आयकर सीमा में कोई बदलाव तो नहीं किया अलबत्ता शिक्षा और स्वास्थ्य पर सेस 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया। मोबाइल और टीवी जैसे उपकरणों पर कस्टम डयूटी बढ़ा दी गई है जिससे ये और महंगे होने जा रहे हैं। आठ करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन और 70 लाख युवाओं को रोज़गार देने की बात कही गई है मगर इसका खाका अभी तैयार नहीं है कि ये सब होगा कैसे। नेशनल हैल्थ प्रोटेक्शन योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा मुहैया करवाने की बात कह रही है सरकार जबकि सरकारी अस्पताल आज भी बिना डाक्टरों के चल रहे हैं, उनके सुधार की ओर कोई ध्यान नहीं।

अब चूंकि राष्ट्रपति भी भाजपा का है, राज्यपाल भी इनके हैं और उपराष्टपति भी भाजपा से है इसलिए इन तीनों के वेतन बढ़ा दिए गए हैं। राष्ट्रपति को अब पांच लाख, उपराष्ट्रपति को चार लाख और राज्यपाल को साढ़े तीन लाख रुपया प्रतिमाह मिलेंगे। महिलाओं को मोहने के लिए सरकार कुछ नए मुफ्त गैस कनेक्शन, शुरुआती तीन साल तक ईपीएफ मूल वेतन का 12 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी करने, शौचालयों की संख्या बढ़ाने, निर्धनों के लिए 51 लाख नए आवास बनाने और सुकन्या समृद्धि बढ़ाने का ऐलान सरकार ने किया है। नौकरीपेशा लोगों को कोई राहत नहीं। सरकारी कर्मचारियों का दिल आहत किया जेतली ने। म्यूच्यूअल फंड की कमाई पर 10 फीसदी टैक्स लगाया। चालू वित्त वर्ष में दूसरी छमाही की अर्थव्यवस्था दर .03 बढऩे की उम्मीद जताई। दावा ये कि मोदी की अगवाई में कई मौलिक सुधार हुए। गरीबी दूर होगी, भारत मज़बूत होगा। ब्लैक बोर्ड से डिजि़टल की ओर आने को कहा गया है, आदिवासियों के लिए एकलव्य स्कूल भी होंगे लेकिन जो स्कूल बिना अध्यापकों के चल रहे हैं और छात्रों का बेड़ा गर्क कर रहे हैं उनके उत्थान की कोइ् बात नहीं।

जिन लोगों ने बजट टेलीकॉस्ट लाईव देखा उन्होंने नोट किया होगा कि जैसे ही कर्मचारियों के इंकम टैक्स की बारी आई तो वित्तमंत्री के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी। जब उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में व्य1ितगत आयकर दरों में सरकार ने कई सकारात्मक परिवर्तन किए हैं तो इशारा साफ था कि वो वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कुछ भी राहत देने के मूड में नहीं हैं। ज़ाहिर है पांच लाख तक की आमदनी वाले पांच कर्मचारी को प्रतिशत टैक्स अब भी देय होगा और पांच से दस लाख तक की आय वालों को 20 प्रतिशत टैक्स देना ही होगा। इतना ही नहीं 50 लाख से अधिक आय वालों को टैक्स के अलावा 10 फीसदी सरचार्ज और एक करोड़ से अधिक कमाने वालों को टैक्स के अतिरिक्त  15 फीसदी सरचार्ज देना होगा। इन आंकड़ों से समझ में आ सकता है कि समाज के किसी भी वर्ग को कोई राहत नहीं दी गई, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी का बयान है कि बजट सभी वर्गों के विकास के लिए मुफीद है।

बात को गोलमोल करते हुए जेतली ने कहा, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ट्रांसपोर्ट और ईलाज पर आने वाले खर्च के रीएम्बर्समेंट के रुप में 40 हजार रुपए स्टैंडर्ड डिडकशन दिया जाएगा। अल्लाह जाने ये कैसी राहत है। क्योंकि यदि ये लाभ लेना है तो पहले तो कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य को बीमार होना होगा, ईलाज के बाद उसे 40 हज़ार का लाभ मिलेगा। यहां भी बड़ा लोचा है। जेतली के मुताबक ये 40000 रुपए के बदले वो जो पैसा अभी तक ट्रांसपोर्ट की मद के तहत मिलता था और मेडीकल के जो 15000 मिलते थे उस मद को खत्म कर दिया गया है, यानि कुल लाभ मिलेगा मात्र 5800 रुपए का। वाह क्या बात है, कितना बड़ा लाभ है, वाह मोदी सरकार। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक इस हिसाब से 5 लाख की आय वाले को बचेंगे 290 रुपए, 10 लाख की आय वाले बचा पाएंगे 1160 रुपए और 30 लाख की आय वालों को लाभ होगा 1740 रुपए का। तो ये है जेतली का बहुप्रतीक्षित बजट।

भाजपा के अतिरिक्त कोई भी राजनीतिक दल भाजपा शासित केंद्र सरकार के बजट से प्रसन्न नहीं है। आम आदमी पार्टी ने बजट पर अप्रसन्नता ज़ाहिर की है। यदि कांग्रेस इसे आंख का धोखा करार दे रही है तो पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा इसे किसानों के साथ अन्याय करार दे रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी बजट को भ्रामक बताते हुए इसके आने वाले दिनों में आम आदमी पर होने वाले विपरीत प्रभावों का खुलासा करते हैं ये महज एक ज़ुबानी सेवा है जिसकी असलियत कुछ भी नहीं है। वे कहते हैं कि बजट देश और आमजन के लिए गुमराहकुन है। नया कुछ भी नहीं पुरानी कथाओं को रीसाइकिल करके पेश कर दिया गया। पांच साल पहले के वादे फिर से दोहराने का कोई औचित्य नहीं है। यूं तो वित्त मंत्री अरुण जेतली ने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और इंफ्रास्ट्रकचर को सुधारने पर ज़ोर दिया है लेकिन असल में इन क्षेत्रों में सुधार की रूपरेखा कहीं नज़र नहीं आती।

बजट विशेषज्ञ मानते हैं कि मोदी और जेतली दोनो अपनी जिम्मेवारी से भागे हैं। आत्महत्या कर रहे किसान के लिए कुछ नहीं, मध्यम वर्ग के लिए कुछ नहीं, वेतनभोगी के लिए कुछ नहीं, बढ़ती महंगाई से राहत के नाम पर कुछ नहीं, मुफ्त देने जैसा तो कुछ है ही नहीं सब्सिडी बारे भी नहीं सोचा गया, लोग कह रहे हैं कि मोदी अपने वादे के मुताबिक 15 लाख ही खाते में डाल देते तो भी राहत मिलती।

 

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