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मामला सीलिंग का: मैदान छोडक़र भागे भाजपाई, सीलिंग पर राजनीति हावी

January 31, 2018 10:54 PM

 

मीडिया के सामने आने से किया इंकार, भाजपा की भारी राजनीतिक हार

आम आदमी पार्टी ने अपना $फजऱ् निभाया, व्यापारियों के कंधे से कंधा मिलाया

एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी। भारतीय जनता पार्टी की ये चाल अब दिल्लीवासियों को स्पष्ट समझ में आने लगी है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद, विधायक और पार्षद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सीलिंग जैसे संजीदा मामले पर बातचीत किए बगैर जिस तरह भाग खड़े हुए, उससे समझ में आता है कि भाजपा सीलिंग का हल निकालने नहीं, व्यापारियों को उनके कारोबारों से बाहर निकालने को अधिक उत्सुक है। भाजपा दिल्ली के दुकानदारों की कितनी हितैषी है इस बात का अंदाज़ा यहीं से लगाया जा सकता है कि जब आम आदमी पाटी्र के संयोजक केजरीवाल ने ये कहा कि बातचीत मीडिया के कैमरे के सामने हो ताकि बाद में किसी पर कोई इल्ज़ाम न लगे तो इतना सुनते ही दिल्ली भाजपा प्रभारी व सांसद मनोज तिवारी अपने साथियों सहित बिना कुछ सुने वहां से भाग निकले। भाजपा नेताओं का ऐसा व्यवहार लोकतंत्र के नाम पर धब्बा है। उधर आम आदमी पार्टी दिल्ली के कारोबारियों के हितों की रक्षा के लिए बुधवार को भी धरने पर बैैठी रही।

ये बहुत ही हैरत वाली बात है कि भारतीय जनता पार्टी सीलिंग मामले पर दुराग्राही राजनीति करते हुए इसे निरंतर उलझा रही है। भाजपा नेता मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इसी मामले पर मुलाकात का समय मांगा तो मुख्यमंत्री ने इसका स्वागत करते हुए मंगलवार सुबह का समय दिया। उन्हें शायद इस बात का इल्म नहीं था कि ये भी भाजपा की एक चाल है ताकि इसके जरिए वो लोगों को बता सके कि भाजपा तो सीलिंग का हल चाहती है लेकिन आम आदमी पार्टी नहीं चाहती। फिर अपनी चाल को अमली रूप देते हुए मनोज तिवारी अपने साथ आए चार सासंदों और तीन विधायकों सहित ये कहकर चल दिए कि वो मीडिया के सामने बात नहीं करेंगे। ज़ाहिर है वो बातचीत के लिए नहीं सिर्फ दिखावे के लिए वहां आए थे।

आखिर भाजपा नेता बंद कमरे में बैठकर बात 1यों करना चाहते थे, इसका जवाब बहुत सीधा सा ये है कि भाजपा जानती है कि सीलिंग को रोकने का उपाय भाजपा शासित एमसीडी और दिल्ली के उपराज्यपाल के पास है, यदि वे यही बात मीडिया के सामने स्वीकार करते हैं तो थू-थू होती, इससे बचने के लिए ही वे बैठक किए बगैर भाग खड़े हुए। आम आदमी पार्टी का मानना है कि दुकानों की सीलिंग दिल्ली के व्यापारियों और दुकानदारों से जुड़ा एक अति गंभीर मामला है जिसे हल करना ही चाहिए, लेकिन समस्या के हल के लिए भाजपा सामने आने को तैयार नहीं हो रही। सीलिंग की मार तले आए व्यापारी कैसे राहत महसूस करेंगे जबकि भाजपा, जिसने हल निकालना है, वही सामने आने से इंकार कर रही है।

दिल्ली के बाज़ारों में एमसीडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट की निगरान कमेटी के तत्ताधान में चल रही सीलिंग के मुद्दे को हल करने से भारतीय जनता पार्टी भाग क्यों रही है, इसका कारण तो भाजपा ही बता सकती है लेकिन जिस तरह से मामले को उलझाया जा रहा है उससे व्यापारियों और अन्य कारोबारियों को बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। आम आदमी पार्टी अपने फर्ज को समझते हुए सीलिंग मूवमेंट के खिलाफ दिल्ली के सिविक सेंटर पर क्रमिक अनशन जारी रखे हुए है। मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप पांडे सभी पार्षदों और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष के साथ अनशन पर बैठे। पांडे ने इस बीच कहा कि आम आदमी पार्टी चाहती है कि दिल्ली के व्यापारियों को राहत मिले, कन्वर्जन चार्ज की लूट बंद हो मगर ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने सवाल किया कि दस साल पहले जब भाजपा स्पयं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर सीलिंग के मामले पर जेल भरो आंदोलन कर रही थी, तो क्या  तब वे सुप्रीम कोर्ट का सम्मान कर रही थी?

जैसा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बाद में मीडिया को बताया, वे स्वयं चाहते थे कि भाजपा नेताओं को साथ लेकर वो स्वयं उपराज्यपाल के सामने जाते और सीलिंग की समस्या के हल का संयुक्त प्रयास करते। इस बात की जानकारी एलजी कार्यालय तक पहुंच भी गई थी। यदि ऐसा होता तो ये शायद दिल्ली के इतिहास में पहली बार होता कि सत्ताधारी और विपक्ष किसी बड़ी समस्या के लिए एकजुट होकर सामने आते। लेकिन ये सब करा धरा रह गया, भाजपा वाले राजनीतिक रोटियां सेंकने आए थे और सेंककर चलते बने। वो बंद कमरे में बात करने पर आमादा थे तो केजरीवाल यही कहते रहे कि मामला बड़ा है, दिल्ली के व्यापार से जुड़ा है अत: इसे सबके सामने चर्चा में लाया जाना चाहिए।

यहां ये भी ध्यान देने योग्य है कि गत 25 जनवरी को अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल को एक पत्र लिखकर सीलिंग के चार कारण और उनके उपाय सुझाए थे। एलजी महोदय ने उनके पत्र की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया और दुकान दारों और व्यापारियों का दमन जारी है। जनाब केजरीवाल ने कहा था कि यदि शापिंग सेंटर के एफएआर यानि फ्लोर एरिया रेशो को 180 से बढ़ाकर 300 कर दिया जाए तो सीलिंग समस्या का निदान हो सकता है। ये करना इसलिए आसान है क्योंकि ये काम एलजी के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने नोटिफाइड कमर्शियल सडक़ों के कन्वर्जन चार्ज को कम करने की मांग की जोकि उपराज्यपाल स्वयं कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त केजरीवाल ने बेसमेंट का एफएआर ऊपरी मंजि़ल के बराबर करने और कन्वजऱ्न चार्ज पर लेट फीस पूरी तरह समाप्त करने की मांग भी की जोकि उपराज्यपाल के हाथ में है।

एक तरफ भाजपा नेता मुख्यमंत्री के साथ बैठक की बात करते हैं तो दूसरी तरफ ये भूल जाते हैं कि एमसीडी पिछले समय के दौरान तीन हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की कन्वर्जन  फीस व्यापारियों से बटोर चुकी है। इतना ही नहीं इस पैसे का इस्तेमाल व्यापारियों की भलाई पर खर्च करने की बजाए दूसरी मदों पर खर्च कर दिया गया। होना तो ये चाहिए कि मार्केट से जुटाया पैसा मार्केट विकास पर खर्च होता, वहां की पार्किंग व्यवस्था को सुधारा जाता, लेकिन कौन नहीं जानता कि दिल्ली के बाज़ारों में पार्किंग का क्या हाल है। हैरानी तो इस बात की भी है कि 351 अधिसूचित सडक़ों पर एक भी दुकान सील नहीं की गई, दिल्ली सरकार तो इन सडक़ों के किनारे बनी दुकान मालिकों का भविष्य भी सुरक्षित करने में जुटी हुई है। इसके लिए एक सर्वेक्षण हो चुका है जिसकी रिपोर्ट जल्द ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगी।

उधर आप नेता अनिल बाजपेई का मानना है भाजपा शासित एमसीडी ने दस साल में व्यापारियों का जीना हराम कर दिया है। विधायक संजीव झा इसे सीलिंग की आड़ में व्यापारियों की लूट की संज्ञा देते हैं। एमसीडी पार्षद राकेश कुमार ने भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर बताते हुए कहा कि भाजपा की पोल खुल चुकी है। पार्षद रमेश मटियाला का सवाल है कि पिछले 50 सालों से जो व्यापार हो रहा था उसका कन्वर्जन कैसा, ये तो लूट है। क्या भाजपा को अब भी बताना पड़ेगा कि दिल्ली का व्यापार बंद हो रहा है, व्यापारी घबराकर इधर उधर मदद के लिए भाग रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि केंद्र सरकार, एलजी और भाजपा शासित एमसीडी यदि चाहें तो सीलिंग का काम एक दिन में बंद हो सकता है, लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन?

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