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सीताराम येचुरी चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग की पहल करेंगे

January 25, 2018 02:30 PM

बजट सेशन के दौरान संसद में गूंजेगा जस्टिस मिश्रा का मामला

महाभियोग बारे सोचना भी मज़ाक है- भारतीय जनता पार्टी

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ चार वरिष्ट जजों की प्रेस कांफे्रंस के कारण पैदा हुआ माहौल अभी शांत नहीं हुआ है। कम्युनिस्ट   पार्टी के सूत्रों की मानें तो पार्टी बहुत जल्द जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जस्टिस मिश्रा से पहले किसी इस स्तर के जज के खिलाफ महाभियोग न लाया गया हो। ये बात अलग है कि हर बार महाभियोग का कारण बहुत बड़ा रहा है, जैसा कि जस्टिस सौमित्र के मामले में था। उनपर आय से अधिक संपत्ति बनाने का आरोप था जो राज्यसभा में चर्चा में आया। इसी तरह जस्टिस रामास्वामी के खिलाफ भी महाभियोग चला था। उधर भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि महाभियोग कोई मज़ाक नहीं होता, इसके लिए कोई ठोस कारण,कोई बड़ा आरोप भी तो होना चाहिए जोकि जस्टिस मिश्रा के खिलाफ कहीं नहीं मिलता।

बात अगस्त 2011 की है। एक तरफ अन्ना हज़ारे की गिरफ्तारी के कारण राज्यसभा में माहौल गर्म था तो दूसरी तरफ कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते राज्यसभा में महाभियोग चलाया जा रहा था। उस समय तक जस्टिस सेन भारतीय न्यायपालिका के पहले ऐसे जज थे जिन्हें महाभियोग के जरिए पद से हटाने की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही थी। उनपर 33 लाख रुपए की हेराफेरी का आरोप था। हालांकि जस्टिस सौमित्र सेन ने इसके पीछे पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन का हाथ होना बताया लेकिन इन्क्वायरी कमेटी ने आरोपों को सही पाया और जस्टिस सेन को जाना पड़ा था। तब कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव की ताईद नेता प्रतिपक्ष अरुण जेतली ने ये कहते हुए की थी कि आरोप सही पाए गए हैं। 

सीपीआई-एम के नेता सीताराम येचुरी ने मीडिया से कहा है कि वे चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और विरोधी दलों से तालमेल बैठाकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग ला सकते हैं। 

इससे पहले आंध्रा हाईकोर्ट के जस्टिस सीवी नागार्जुना, सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीडी दिनाकरण, गुजरात हाई कोर्ट के जज जस्टिस जेबी पार्दीवाला और पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वी.रामास्वामी महाभियोग का सामना कर चुके हैं। इन घटनाओं से जहां भारत की न्यायपालिका पर आंच आती है वहीं आम आदमी के दिल में न्यायालय के प्रति जो सम्मान है, उसे भी ठेस पहुंचती है। ताज़ा घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ एकजुट हुए चार वरिष्ट जजों की प्रेस कांफ्रेंस के जरिए जब आम आदमी को पता चला कि न्यायपालिका में सब ठीक नहीं है तो ये संभावना भी प्रबल हो उठी कि आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। इसका एक संकेत जस्टिस मिश्रा ने तब दिया जब उन्होंने कुछ नई पीठें गठित की तो उनमें उन चारों जजों को शामिल नहीं किया गया जिन्होंने प्रेेस कांफ्रेंस की थी।

इस बीच सीपीआई-एम के नेता सीताराम येचुरी ने मीडिया से कहा है कि वे चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और विरोधी दलों से तालमेल बैठाकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में इस संस्था को सुधारने के लिए इसके सिवा और कोई चारा भी तो नहीं है। उन्होंने कहा कि महाभियोग के जरिए सुप्रीमकोर्ट की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सकता है। येचुरी ने कहा कि 29 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सैशन के दौरान महाभियोग लाया जा सकता है। ज्ञात हो कि जब चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मीडिया ने सवाल किया कि क्या वे चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग करेंगे तो जस्टिस चेल्मेशवर का जवाब था, इसका फैसला तो जनता को करना है। अब ज़ाहिर है जनता के प्रतिनिधि ऐसा करने की सोच रहे हैं।

येचुरी ने मीडिया से कहा कि काफी वक्त गुजर चुका है, वे चाहते थे कि इसका हल स्वयं न्यायपालिका निकाले लेकिन ऐसा हआ नहीं। अब लोकतंत्र के बचाव के लिए विधायिका और कार्यपलिका को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी जिम्मेवारी का अहसास है इसलिए वे ऐसा करने की सोच रहे हैं। उधर भाजपा ये मानकर चल रही है कि जस्टिस मिश्रा के खिलाफ कोई आरोप ही नहीं है इसलिए उनके खिलाफ महाभियोग जैसी कार्यवाई अमल में लाने की संभावना भी नहीं है। भाजपा नेता सुब्रामणियम स्वामी ने मीडिया से कहा कि ये बात मज़ाक के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। उन्होंने मीडिया से ही पूछा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ क्या आरोप हैं, वे बताए जाएं। वैसे न्यायालय प्रक्रिया के जानकार कहते हैं कि महाभियोग तो सिर्फ राष्ट्रपति के खिलाफ ही लाया जा सकता है, किसी चीफ जस्टिस के खिलाफ नहीं।

जस्टिस सौमित्र सेन के मामले में सीताराम येचुरी के प्रस्ताव को तब राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेतली ने अनुमोदित किया था। सवाल ये है कि आज अगर वही सीताराम येचुरी फिर से वही प्रक्रिया अपनाते हुए जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाते हैं तो क्या अब भी अरुण जेतली उनके प्रस्ताव की ताईद करेंगे? आज क्योंकि अरुण जेतली सत्ता पक्ष में हैं, यदि महाभियोग जैसी प्रक्रिया अमल में लाई जाती है तो ये सरकार की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाएगी, ज़ाहिर है जेतली अपने पद का प्रयोग करके सीताराम येचुरी और उनके साथियों को ऐसा करने से रोकेंगे। जो भी हो भारतीय न्यायपालिका की कार्यशैली पर उठे सवालों के जवाब जितनी जल्दी दिए जाएं उतना ही बेहतर होगा।

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