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साथियों के नाम 'आप' कार्यकर्त्ता का पत्र

January 05, 2018 11:19 AM

 जय हिंद!

मैं सुनीता शर्मा हूं। आप सबकी तरह मैंने भी अरविंद केज़रीवाल जी के आवाह्न पर 2012 में आम आदमी पार्टी में कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू किया था। सोचा था कि देश की व्यवस्थाएं बदलेंगी। व्यवस्था बदलेगी तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।.....

मैं परिवार के साथ उन दिनों चंडीगढ़ में रहती थी। पति चंडीगढ़ में जॉब करते थे और मेरे दोनों बच्चे भी यहीं पढ़ रहे थे। आंदोलन के उपरांत पार्टी बनी तो हम भी चंडीगढ़ से दिल्ली आ गए.........

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में पहला चुनाव लड़ा तो मैं अपने परिवार के साथ दिल्ली आकर पार्टी के प्रचार में हिस्सा लेने लगी, हमारी टीम तब राजीव चौक, कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, शकूर बस्ती, रोहिणी, विश्वास नगर, नई दिल्ली सहित अलग-अलग विधान सभाओं में जाकर आम आदमी पार्टी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगती थी। मेरे व मेरे दो बेटों के साथ हमारी टीम में आस्ट्रेलिया से अपनी जॉब छोड़ कर आए आदित्या, साउदी अरब से अपनी नौकरी छोड़कर आए सुनील, उत्तराखंड से आंदोलन के लिए दिल्ली आए सुरेश सहित कई और लड़के हुआ करते थे।

आन्दोलन में ज्यादा समय देने लगे तो पति की जॉब छूट गयी और दिल्ली में कोई स्थानीय जानने वाला नहीं था...... तो कई रातें हमने परिवार के साथ खुले आसमान तले गुजारी.......

पार्टी का कोई नेता या कोई व्यक्ति मुझे जाने अथवा हमारे परिश्रम, हमारे काम का मूल्यांकन कर हमारे काम की तारीफ करे कभी परवाह नहीं की.......

मैं कभी न तो अरविंद केज़रीवाल जी से मिली हूं न ही पार्टी के किसी अन्य नेता से ........

हां पिछले एमसीडी चुनावों के दौरान रोहणी सैक्टर चार से आम आदमी पार्टी उम्मीदवार नेहा त्यागी के प्रचार में गयी तो नेहा के घर पर संजय भाई से नेहा ने परिचय करवाया था.......

यह सब मैं आपको इसलिए बता रही हूं कि राज्य सभा की दो टिकटें सुशील गुप्ता जी व एन.डी.गुप्ता जी को दिए जाने के उपरांत पार्टी में मचे बवाल से मैं जितनी क्षुब्ध हूं उतनी ही मुझे हैरानी हो रही है। कि खुद को क्रांतिकारी कहने वाले हम कार्यकर्ता आज अरविंद जी की ईमानदारी पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाते हुए मीडिया व हमारे विरोधियों के हाथ का खिलौना बन रहे हैं कि अरविंद जी ने राज्य सभा की दो टिकट पार्टी के भीतर के हम कार्यकर्ताओं में से किसी एक को न देकर दो बहारी व्यक्तियों को थमा दी है। दुनिया भर को ईमानदारी और निस्वार्थता का ज्ञान बांटने वाले हम सब कार्यकर्ताओं की स्वार्थपरता पर आज लोग हंस रहे हैं। शर्मिंदा तो मुझ जैसे आम कार्यकर्ता हुए जिन्होंने पार्टी से कभी न कुछ चाहा न भविष्य के लिए कोई चाहत है.....

हम तो हमारी पार्टी द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से इतने प्रभावित हैं कि गर्व से यह कहते नहीं थकते कि हमारी पार्टी विश्व की सबसे ईमानदार पार्टी है। हम उस पार्टी के कार्यकर्ता हैं जिसने दिल्ली के स्कूलों, दिल्ली के अस्पतालों को विश्वस्तर पर ला खड़ा किया है............

मैंने कई दफा यह शब्द पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल सहित मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास , आशुतोष आदि नेताओं के मुख से सुने हैं कि ‘टिकट पाने की लालसा हो तो आज ही पार्टी छोड़ कर चले जाएं’ फिर आज हमारे नेताओं की टिकट कटने से पार्टी के कार्यकर्ता व नेता इतने अधीर कैसे हो सकते हैं ?.......

कार्यकर्ताओं को तो इस बात का गर्व होना चाहिए कि हमारी पार्टी में नेता और कार्यकर्ता सब एक समान हैं....

अति महत्वकांक्षाएं नेता पाले या फिर कार्यकर्ता दोनों ही ठीक नहीं है......

हम आम आदमी पार्टी में देश बदलने की नीयत लेकर आए हैं...... तो सेवा ही हमारा धर्म होना चाहिए...........

राज्य सभा टिकट की वर्तमान छीना-झपटी ने आम आदमी पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं की अब तक छुपी स्वार्थपरता को बेनकाब किया है....

मैंने भी बारीकी से आम आदमी पार्टी द्वारा घोषित दो राज्य सभा उम्मीदवारों की जीवन में उपलब्धियों की सूची को बारीकी से देखा और पाया कि क्या सचमुच हमारे कार्यकर्ता और नेता एन.डी.गुप्ता और सुशील गुप्ता से बेहतर राज्य सभा सांसद होते ?

और हर दृष्टिकोण से विचारने के उपरांत गंभीर मंथन के दौर के बाद मैं एक बात विनयपूर्वक आपसे कहना चाहती हूं कि हां हमारे पास अच्छे वक्ता एवं समर्पित नेता के रूप में कुमार विश्वास व आशुतोष गुप्ता थे किंतु राज्य सभा के लिए आम आदमी पार्टी की पीएसी द्वारा चयनित समाज सेवा के जरिए मुकाम हासिल करने वाले यह दोनों नाम भी अपने आप में किसी संस्थान से कम नहीं हैं............

एक आम कार्यकर्ता के तौर पर मुझे इन नामों का चयन संतोष देता है.......किंतु खुद को एक भावुक कार्यकर्ता के रूप में देखती हूं तो अपने संघर्ष के साथियों की राज्य सभा के लिए दावेदारी भी बेवजह नहीं लगती..............

मैं समझ सकती हूं कि मेरी तरह हर कार्यकर्ता सिर्फ सेवा से संतुष्ट हो भी नहीं सकता........

अब बात करते हैं अरविंद जी की सोच की, क्या उन्होंने वास्तव में इन दो उम्मीदवारों की समाज सेवा को अधिमान देकर टिकट से नवाजा या फिर जातिवाद एवं पैसों का वास्तव में लेन-देन हुआ होगा ?...............

यहां मैं एक बात स्पष्ट कर दूं कि राजनीति के कुछ सार्वभौमिक नियम होते हैं। राजनीति में भगवान कृष्ण की तक आलोचना के अनेकों प्रसंग महाभारत में भरे पड़े हैं। कृष्ण चाहते तो एक महायुद्ध टल सकता था. अक्षुणी सेनाओं का संहार न होता तो लाखों महिलाएं वेबा व लाखों बच्चे तब अनाथ न हुए होते........

कुछ अपने ही अपनों के खून की नदियां न बहाते........

राम मर्यादित थे तो बाली को युद्ध के नियमों के विपरीत छुपकर न मारते, एक घर के भेदी भिभीषण का सहारा लेकर युद्ध जीतने का षड़यंत्र न करते.....

यहां मैं अरविंद केज़रीवाल को राम व कृष्ण से तोल कर उन्हें भगवान नहीं कह रही हूं बल्कि अपनी बात को अपने उन साथियों तक पहुंचाने का यत्न कर रही हूं जो बिना सोचे समझे अरविंद जी को अनाप-शनाप बक रहे हैं।

क्या आपने सोचा कि अरविंद जी ने यह निर्णय क्यों लिया होगा ? 

हम तो हमारी पार्टी द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से इतने प्रभावित हैं कि गर्व से यह कहते नहीं थकते कि हमारी पार्टी विश्व की सबसे ईमानदार पार्टी है। हम उस पार्टी के कार्यकर्ता हैं जिसने दिल्ली के स्कूलों, दिल्ली के अस्पतालों को विश्वस्तर पर ला खड़ा किया है

क्या अरविंद केज़रीवाल ने निर्णय सुनाने से पूर्व इस निर्णय के परिणामों पर विचार किया होगा ?

यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो आज हर कार्यकर्ता के जहन में कौंध रहे हैं और कौंधने भी चाहिए किन्तु लम्बे समय से पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं को अरविन्द जी की विचारधार का मनन कर उत्तर भी स्वयमेव मिल जाने चाहिए कि अरविन्द न डिग सकते हैं और न बिक सकते हैं.

अपनी समझ से मैं आपके सामने जो भी बात रख रही हूं वह मेरी निजी राय है. मैं पार्टी की एक साधारण कार्यकर्ता हूं किंतु आज मुझे लगा कि अपना सब कुछ दांव पर लगा कर हम सबके लिए लड़ने वाले एक इंसान के फैसले के प्रति हम कैसे इतने अविश्वासपूर्ण, स्वार्थपूर्ण हो सकते हैं कि उसी को बुरा भला कह रहे हैं। साथियों देश के लिए हम सब हितकारी सोचते हैं किन्तु हमसे कई अधिक देश हित अरविंद न सिर्फ सोचते बल्कि जीते हैं. विपक्ष लाख तोहमत लगाएगा किंतु हम सब जानते हैं कि अरविंद न तो जाति धर्म की राजनीति करते हैं और न ही उन्हें कोई खरीद सकता है. ......

अरविंद जी दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं, तमाम बिजली कंपनियों की नकेल कस कर उन्होंने दिल्ली वासियों को अब तक अरबों का लाभ पहुंचाया है जरा सोचिए पैसे ही लेने होते तो भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की तरह वे भी बिजली कंपनियों से पैसा लेकर दाम बढवा देते, स्कूलों को अविभावकों की फीस वापस करने को न कहते चुपचाप सांठ-गांठ कर उनसे दूसरी पार्टियों की तरह अरबों रूपया इकट्ठा कर लेते, दवा कंपनियों से करोड़ों मिल सकते थे, पुलों में बचाए अरबों रूपए और दलों की तरह हड़प किए जा सकते थे किंतु ‘आप’ ने कभी न तो ईमान बेचा है और न बेचने की कोई दूर-दूर तक मैं समझती हूं उम्मीद है।..................

क्या आपको लगता है कि बेईमानी का एक छींटा अपने दामन पर न सहने वाले अरविंद केज़रीवाल केवल दो राज्य सभा सीटों को पैसों में बेच देंगे ?........

 

हां हमारी लड़ाई ताकतवर लोगों से है। मोदी जी की सेना में अदानी अंबानी जैसे महारथी हैं तो हमारी सेना में एक सेना नायक कमजोर सैनिक कैसे चुन सकता है ? साथियों हमें हरियाणा जैसे पढ़ोसी राज्य व दिल्ली में भविष्य में मजबूती से चुनाव लड़ने हैं। भले ही पार्टी इस बात को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार न करे किंतु मैं व्यक्तिगत तौर पर यह मानती हूं कि आज हमारी पार्टी को पटखनी देने के लिए आर्थिक तौर पर कमजोर करने का महाषड़यंत्र चल रहा है। हमारे एक राज्य सभा उम्मीदवार एनडी गुप्ता जो पिछले दो सालों से पार्टी के लेन-देन देख रहे हैं से बेहतर भला यह बात कौन समझ सकता है?

पिछले दिनों इन्कम टैक्स विभाग ने आम आदमी पार्टी के तमाम चंदे को अवैध करार दिया था। यह हमारी पार्टी को आर्थिक तौर पर पंगू बनाने के षडयंत्र का ही तो हिस्सा है.......

जरा सोचिए क्या आज हमें समाज में अपनी मज़बूत पहचान रखने वाले आर्थिक तौर पर संपन्न कुछ साफ छवि के मजबूत लोगों की आवश्यकता नहीं है ? इसके लिए जरूरी तो नहीं कि हम टिकट बेच कर उन्हें पार्टी से जोड़ें।.............

मुझे तो इस बात का गर्व है कि हमारी पार्टी ने 18 जाने-माने नामों से संपर्क कर उन्हें राज्य सभा भेजने की पेशकश की ना कि राज्य सभा की रेवड़ियां अपनो में बांटने वाली अन्य दलों द्वारा स्थापित परंपरा निभाई..............

अपने-अपने क्षेत्र के बड़े नाम जिनसे पार्टी ने संपर्क किया वे हमारी पार्टी की जोखिम भरी राजनीति स्वीकार न कर सके किंतु एन.डी.गुप्ता व सुशील गुप्ता जैसे दो समाज सेवियों ने इस महा समर में निर्भय उतरने के लिए हामी भरी.............

यकीन मानिए अरविंद जी का निर्णय गलत नहीं हो सकता और विश्वास रखिए अरविंद जी को कोई खरीदने वाला भी अभी पैदा नहीं हुआ है और यह मेरा ही नहीं बल्कि देश भर के करोड़ों आप कार्यकर्ताओं का दृढ़ विश्वास है। .............

जय हिंद!

  सुनीता शर्मा

जनकपुरी, दिल्ली

सुनीता शर्मा के फेसबुक वाल से साभार : https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=1600908336664059&id=100002347238082

 

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