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कुमार विश्वास ने केजरीवाल सरकार को गिराने की कोशिश की थी-राय

January 05, 2018 09:56 AM
गोपाल राय

किसे टिकट देना है किसे नहीं, ये पार्टी का आंतरिक मामला है

लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी होगी आम आदमी पार्टी की गूंज

दिल्ली: जबसे आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा की तीन सीटों पर काबिज होने की अपनी नीति को अंतिम रूप दिया है तबसे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस नैतिकता की दुहाई देकर पार्टी प्रत्याशियों के चयन पर अनाप शनाप बयान दे रहे हैं। कभी अरविंद केजरीवाल की सोच को संकीर्णता के दायरे में रखा जा रहा है तो कभी ये कहा जा रहा है कि इनकी पार्टी में ख्यातिप्राप्त चेहरों का कोई मोल नहीं है। कुप्रचार कुछ इस ढंग से किया जा रहा है मानों दोनों विरोधी पार्टिंयां आम आदमी पार्टी को पार्टी के अपने नेताओं से बेहतर जानती हों। बुधवार को पार्टी के दिल्ली के संयोजक गोपाल राय ने जो खुलासा किया उसके बाद दूसरे दलों को ये समझ आ जानी चाहिए कि जिन लोगों के कंधों पर रखकर भाजपा और कांग्रेस केजरीवाल पर निशाना साथ रहे थे उस व्यक्ति का भंडाफोड़ हो चुका है। गोपाल राय ने खुलासा किया है कि केजरीवाल सरकार को गिराने की साजिश की जा रही थी और साजिशकर्ता कोई और नहीं बल्कि स्वयं कुमार विश्वास थे जो विरोधी दलों से हाथ मिलाकर पार्टी से भितरघात कर रहे थे।

फेसबुक के सीधे प्रसारण में गोपाल राय ने कहा कि गत वर्ष दिल्ली नगर निगम चुनावों के बाद केजरीवाल सरकार को गिराने की कोशिश की गई। इसके लिए कुमार विश्वास ने अपने निवास पर कुछ विधायकों को बुलाकर कई बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि कुमार ही केजरीवाल सरकार को गिराने की कोशिश के केंद्र में थे और अब राज्यसभा के लिए टिकट न दिए जाने के कारण अनाप शनाप बयान देकर स्वयं को सच्चा और शहीद सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं। ज्ञात हो कि कुमार ने राज्यसभा टिकट न दिए जाने के बाद कहा था कि उन्होंने केजरीवाल के फैसलों पर प्रश्न उठाए हैं इसलिए उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने कहा था कि वो अपनी शहादत को कबूल करते हैं।

कुमार विश्वास को उसकी गलत बयानी का माकूल जवाब देते हुए गोपाल राय ने कहा कि नगर निगम चुनावों के बाद केजरीवाल सरकार को नेस्तनाबूद करने के लिए कुछ बैठकें सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा के निवास पर भी हुईं लेकिन ये सब कुमार ने ही आयोजित की थीं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते मिश्रा को बाद में मंत्रीमंडल से हटा दिया गया था। इतना ही नहीं गोपाल राय ने उस वीडियो पर भी सवाल उठाए जो कुमार विश्वास ने भ्रष्टाचार हटाने के नाम पर केजरीवाल को केंद्र में रखकर बनाई थी। कुमार ने इसके जरिए केजरीवाल पर बहुत से सवाल उठाए थे। राय ने कहा कि इसी वीडियो के चलते आम आदमी पार्टी की छवि खराब हुई और अंतत: पार्टी को एमसीडी चुनावों में भाजपा के हाथों हार खानी पड़ी। फेसबुक लाईव में गोपाल राय ने सवाल किया कि ऐसा व्यक्ति जो जनता के हर मंच से पार्टी के अक्स को खराब करने की कोशिश करता रहा हो, क्या ऐसे आदमी को राज्यसभा में भेजना पार्टी के लिए हितकर होता?

यहां ये बताना लाजि़मी है कि भले ही कांग्रेस हो या फिर भारतीय जनता पार्टी, जब भी राज्यसभा चुनावों की बात आई है तो पार्टी के बाहर से चेहरे लाने में किसी भी पार्टी ने गुरेज नहीं किया। तब किसी पर सवाल नहीं उठाया गया, तो अब ऐसा क्या हो गया जो इतना हंगामा हो रहा है। कारण साफ है, अपने छोटे से जीवनकाल में आम आदमी पार्टी की उपलब्धियों से सारा देश चकित है। ये बात कांग्रेस और भाजपा को हज़्म नहीं हो रही कि आप का कोई व्यक्ति राज्य सभा में जाए। सभी जानते हैं कि दिल्ली की इसी महीने राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के पास 70 में से 67 सीटें हैं जो इस बात का संकेत है कि पार्टी तीनों सीटों पर पहले ही विजयी घोषित हो चुकी है। मात्र पांच साल के जीवनकाल में पहले लोकसभा में चार सांसद चुने गए और अब राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी के तीन सांसद चुने जा रहे हैं। सारा हल्ला तो इसी बात का है।

भाजपा के दिल्ली प्रभारी मनोज तिवारी जो अपने दोगले बयानों के लिए जाने जाते हैं जब ये कहते हैं कि राज्यसभा के लिए बाहरी व्यक्तिओं को टिकट देना आम आदमी पार्टी के भ्रष्ट होने का संकेत है तो वो शायद भूल जाते हैं कि भाजपा तो अब भ्रष्टाचार का प्रयार्य ही बन चुकी है। भाजपा केजरीवाल के फैसले को पार्टी के अन्य नेताओं से धोखा बताकर और ये कहकर कि पार्टी ने दो कारोबारियों को टिकट दिया है, पार्टी की आंतरिक नीतियों में दखलअंदाज़ी कर रही है। लेकिन भाजपा ये भी भूल रही है कि केजरीवाल कितनी बार कह चुके हैं कि भाजपा तो अदानियों और अंबानियों की सरकार है, क्या सुशील गुप्ता और नारायण दास गुप्ता भाजपा के कारोबारियों से भी बड़े हैं?

ये बहुत ही शर्मनाक है कि केजरीवाल के पार्टी हित में लिए गए फैसले को गलत ठहराने की गरज से विरोधी दल कुछ भी करने पर आमादा है। क्या उस प्रत्याशी को सही ठहराया जा सकता है जिसे कभी लालू प्रसाद यादव ने राज्यसभा में सिर्फ इसलिए भेजना मुनासिब समझा क्योंकि उसने लालू चालीसा लिखा था, तब क्यों नहीं सवाल उठाए गए। दरअसल आम आदमी पार्टी ने अपने गठन के समय जिन उच्च आदर्शों की बात की थी उसे पार्टी ने आज तक कायम रखा है। यदि पार्टी के हित में लिए गए फैसले किसी विरोधी दल को चोट पहुंचा रहे हैं तो इसे पार्टी की बड़ी प्राप्ति ही माना जाएगा। 

नगर निगम चुनावों के बाद केजरीवाल सरकार को नेस्तनाबूद करने के लिए कुछ बैठकें सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा के निवास पर भी हुईं लेकिन ये सब कुमार ने ही आयोजित की थीं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते मिश्रा को बाद में मंत्रीमंडल से हटा दिया गया था। इतना ही नहीं गोपाल राय ने उस वीडियो पर भी सवाल उठाए जो कुमार विश्वास ने भ्रष्टाचार हटाने के नाम पर केजरीवाल को केंद्र में रखकर बनाई थी। कुमार ने इसके जरिए केजरीवाल पर बहुत से सवाल उठाए थे। राय ने कहा कि इसी वीडियो के चलते आम आदमी पार्टी की छवि खराब हुई और अंतत: पार्टी को एमसीडी चुनावों में भाजपा के हाथों हार खानी पड़ी।

विरोधियों का अभी से ये कहना कि संजय सिंह के अलावा दोनों प्रत्याशी राज्यसभा के काबिल नहीं हैं सही नहीं लगता। किसी को बिना परखे ये इल्ज़ाम लगाना, इल्ज़ाम लगाने वाले की संकीर्ण सोच का परिचायक है। याद हो कि कांग्रेस और भाजपा ने ऐसे ऐसे सदस्य भी राज्यसभा में भेजे जिन्होंने न तो वहां कभी कोई सवाल ही पूछा और न ही वे नियमित रूप में संसद गए। जो कांग्रेसी ये कह रहे हैं कि पार्टी को आशुतोष, मीरा सान्याल या दिलीप पांडे और आतिशी मार्लिना के नामों पर विचार करना चाहिए था ज़ाहिर है वो पार्टी के भीतर फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को जान लेना चाहिए कि किस व्यक्ति  को क्या  किरदार निभाना है ये बात पार्टी दूसरों से बेहतर जानती है और ऐसी घटिया चालों से आम आदमी पार्टी नहीं टूटने वाली. 

दूसरे शब्दों में कहूँ तो विपक्ष का यह दांव भी खोखला गया, आम आदमी पार्टी को नेस्तानाबूद करने के चाहवान अब पार्टी को बदनाम करने का कोई दूसरा उपाय खोजें तो बेहतर होगा.

 

 

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