Friday, November 24, 2017
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‘प्रदूषण’ का खेल खेलते नेताओं का अखाड़ा बनी ‘दिल्ली’

November 14, 2017 03:16 PM

रोज की भांति आज भी पेसिफिक माल के करीब टैगोर गार्डन और सुभाष नगर के बीच वाले पार्क में मार्निंग वाक का इरादा लेकर पहुंचा तो वहां रोज गेट के बांयी ओर बैठ लोगों का बी.पी.शूगर लेबल जांचने वाली, शिवानी जो संभवतयः किसी हैल्थ कंपनी की प्रतिनिधि है बोली सर आज वाक मत कीजिए बहुत ‘पोल्यूशन’ है।

पास खड़े 55-60 के एक अंकल बोल उठे. बेड़ा गर्क हो इन नेताओं का जो जिंदगियों के साथ राजनीति का गंदा खेल खेल रहे हैं। मैने बात आगे बढ़ाते हुए पूछा, अंकल नेताओं का पोल्यूशन से क्या लेना-देना ? समझाते हुए बोले बेटा राजनीति का प्रदूषण खत्म हो जाए तो धूल-धुएं का प्रदूषण तो एक दिन में मिट जाएगा। यह अंकल रिटायर्ड प्रोफेसर निकले. नाम था श्याम सुंदर पसरीज़ा, रिटायरमेंट के बाद दिल्ली में अपने वकील बेटे के साथ रहते हैं। कहते हैं तीन दिनों से घुटन महसूस कर रहे हैं, आंखों में जलन की शिकायत लेकर डाॅक्टर शाहनी के पास गए तो डाॅक्टर ने दवाईयां लिख दी। मगर कोई फर्क नहीं है। डाक्टर कहते हैं कि पोल्यूशन घटेगा तो सब ठीक हो जाएगा. अंकल जानते हैं कि उम्र भर बीड़ी-सिगरेट को हाथ नहीं लगाने के बावजूद आज राजनीति हर मिनट उनके फेफड़ों में 20 सिगरेट जितना धुंआ उतार रही है। 

आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती की इस घड़ी में भी यह शुभ संकेत है कि केज़रीवाल के सिवा देश के अवाम को किसी राजनेता पर समस्याओं के समाधान की उम्मीद ही शेष नहीं रह गई है, इसीलिए जनता हर समस्या खुद ही झेलने की आदी हो गई है, जनता जानती है कि उनकी समस्या का समाधान तो दूर समस्या सुनने वाले कान तक बहरे हो चुके हैं. केज़रीवाल से उम्मीद है, तो लोग कहते हैं और उनका कहना सार्थक भी होता है जब केज़रीवाल हर सूरत में समस्या का समाधान भी निकाल लाते हैं।

राजनीति का गंदा खेल प्रदूषण उन्मूलन के तमाम उपायों पर पानी फेर रहा है। दिल्ली सरकार के मुखिया अरविंद केज़रीवाल केंद्र से प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के तहत जल छिड़काव के लिए हैलीकाप्टर की मांग करते हैं तो उनकी मांग को हल्के में लेकर या असहयोग की भावना से ग्रसित होकर ठुकरा दिया जाता है। आड-इवन को शुरू करने की बात होती है तो एनजीटी अव्यवहारिक से तर्क देकर सुप्रीम के निर्देशों को दरकिनार करते हुए सरकार के फैसले में टांगे अड़ा देता है। ‘प्रदूषण से निपटने में असफल दिल्ली सरकार’ का लेबल अरविंद केज़रीवाल के माथे चस्पां करने की होड़ में तमाम विपक्षी राजनीतिज्ञ एक जुट हो दिल्ली सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के तमाम उपायों पर पानी फेरते नज़र आ रहे हैं। स्थिती की भयवाहता दिल्ली के अस्पतालों में बढ़ते श्वास रोग के मरीज़ों में हुई एका-एक बेतहाशा वृद्धि और एम्स के निदेशक डॉ.रणदीप गुल्लेरिया का वह बयान है, जिसमें उन्होंने इस प्रदूषण से दिल्ली एन.सी.आर. में 30,000 लोगों की मौत की आशंका जताई है।

दिल्ली सरकार अब अपने स्तर पर पवन हंस हेलीकाप्टर सेवा के ज़रिए स्थिती को सुधारने के प्रयासों में जुटी है। इसके अतिरिक्त आकस्मिक समाधान के तहत अग्निशमन विभाग व जलबोर्ड की मदद से जल छिड़काव कर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास भी जारी हैं। यद्यपि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के आंकड़ों को नज़रअंदाज करना हरगिज़ ठीक नहीं है, किंतु दिल्ली के प्रदूषण पर कोहराम मचा रहे उन राष्ट्रचिंतकों से यह सवाल तो पूछा जाना लाज़मी है कि उन दस शहरों पर भी कुछ बोलने का साहस जुटाएं जहां प्रदूषण सर्वाधिक है, और हां ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि उन 10 शहरों में दिल्ली तो शामिल ही नहीं है। तो क्या उन सर्वाधिक प्रदूषित शहरों, जिनमें ताज नगरी आगरा को पहले और धर्मनगरी काशी को पांचवे स्थान पर प्रदूषित बताया गया है, के नागरिकों के प्रति किसी मुख्यमंत्री अथवा सांसद का कोई दायित्व नहीं बनता ? या फिर इन शहरों में रहने वाले लोगों को वहां के राजनेता इंसान ही नहीं समझते ?

आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती की इस घड़ी में भी यह शुभ संकेत है कि केज़रीवाल के सिवा देश के अवाम को किसी राजनेता पर समस्याओं के समाधान की उम्मीद ही शेष नहीं रह गई है, इसीलिए जनता हर समस्या खुद ही झेलने की आदी हो गई है, जनता जानती है कि उनकी समस्या का समाधान तो दूर समस्या सुनने वाले कान तक बहरे हो चुके हैं. केज़रीवाल से उम्मीद है, तो लोग कहते हैं और उनका कहना सार्थक भी होता है जब केज़रीवाल हर सूरत में समस्या का समाधान भी निकाल लाते हैं। विपक्ष आलोचना का मुद्दा समझ जिस समस्या का हव्वा खड़ा कर केज़रीवाल को बदनाम करने का षड़यंत्र रचता है वहीं मुद्दा कुछ समय बाद केज़रीवाल की ताकत बन जहां उनकी लोकप्रियता में इज़ाफा कर जाता है वहीं विपक्ष के तरकश के तमाम तीर उसे खुद ही चुभने लगते हैं और षड़यंत्र का भंडाफोड़ होते हैं विपक्ष की हर बार खूब फज़ीहत होती है। तो देखते रहिए ‘प्रदूषण’ का भाजपा रचित यह ड्रामा और अंत में देखिए उसकी खुद की फजीहत के दृश्य.

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इन 10 प्रदूषित शहरों में नहीं है ‘दिल्ली’

केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक देश के सबसे प्रदूषित शहरों में पहली पंक्ति में खड़ी है ताज नगरी आगरा यहां पर पीएम 2.5 का स्तर 450 मापा गया.

 

दूसरे नंबर पर खड़ा है भिवानी जहां पर पीएम 2.5 का स्तर 435 दर्ज किया गया.

 

तीसरे और चैथे नंबर पर गाजियाबाद और गुरुग्राम हैं जहां पर पीएम 10 और पीएम 2.5 क्रमशः 486 और 436 तक जा पहुंचा है.

 

इसके बाद नंबर आता है रोहतक का जहां पर पीएम 2.5 461 मापा गया.

 

इसके बाद पटना जहां पर पीएम 2.5 435 रहा.

 

इसके बाद नोएडा और वाराणसी जहां पीएम 2.5 -429 दर्ज किया गया.

 

वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पीएम 2.5- 424 जा पहुंचा है.

 

इसी तरह से कानपुर में पीएम 2.5- 405 दर्ज किया गया.

 

इन सब शहरों के बाद यानी की ग्यारहवीं पायदान पर है देश की राजधानी दिल्ली जहां पर पीएम 2.5 - 403 है, मगर फिर भी हव्वा दिल्ली के प्रदूषण का अब इसे आप क्या कहेंगे। आंकड़े केज़रीवाल के नहीं बल्कि केंद्र सरकार के हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि मुंबई में पीएम 2.5 का स्तर 124 निकला वही पर्यावरण सुरक्षा के हिसाब से देश का सबसे बेहतरीन शहर है तिरुवनंतपुरम जहां पर पीएम 2.5 महज 61 है.

गोपाल शर्मा, संपर्क: 8588833523

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