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'नोटबंधी' के 'हिटलरी फरमान' से जनता को दिया धोखा

रविंद्र कुमार | November 08, 2017 08:16 PM

एक साल पहले मोदी सरकार ने नोटबंधी का हिटलरी फरमान सुनाया था, जिसके बाद देश में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गयी थी। पूरा देश बैंकों के बाहर लाइन लगाकर खड़ा था इस इंतजार में कि पुराने नोटों के बदले नए नोट मिल जाए जिनसे वह अपने परिवार के लिए खाने का समान खरीद सके। इन लाइनों ने दर्जनों लोगों की जान ले ली, लेकिन इस हिटलरी फरमान में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, इस नोटबंधी को 2 लाख करोड़ का घोटाला घोषित करते हुए 'आप' ने आज देश भर में धोखा दिवस बनाया।

 नोटबंधी का यह हिटलरी फरमान पिछले साल 8 नवंबर को सुनाया गया था, जिसमे कहा गया था आज रात से पुराने 1000 और 500 के नोट चलने बंद हो जायेंगे, प्रत्येक व्यक्ति को आईडी दिखाने पर 2000 राशि के पुराने नोटों की जगह नए नोट दिए जायेंगे, इस फरमान के बाद विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी थी लोग सुबह होते ही बैंकों के बाहर लग गए ताकि नए नोट लेकर अपनी जरूरत का समान ले सके।

त्यागराज स्टेडियम के बाहर हजारों की संख्या में 'आप' कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर इस 'धोखा दिवस' को सफल बनाया। नोटबंधी के समय मोदी जी ने कहा था इस कदम से देश में रखा काला धन बाहर आएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि देश की जनता पर नए नोटों की छपाई का बोझ अतिरिक्त पड़ा। नोटबंधी का यह हिटलरी फरमान पिछले साल 8 नवंबर को सुनाया गया था, जिसमे कहा गया था आज रात से पुराने 1000 और 500 के नोट चलने बंद हो जायेंगे, प्रत्येक व्यक्ति को आईडी दिखाने पर 2000 राशि के पुराने नोटों की जगह नए नोट दिए जायेंगे, इस फरमान के बाद विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी थी लोग सुबह होते ही बैंकों के बाहर लग गए ताकि नए नोट लेकर अपनी जरूरत का समान ले सके। देश भर में व्यापारों पर असर पड़ा, लाइनों में कई मौत हुई, देश को आर्थिक हानि उठानी पड़ी। सीधे तौर पर 'आप' ने इसे लाखो करोड़ का घोटाला करार दिया था इस नोटबंधी की वजह से गरीब आदमी लाइनों में लगा और इन लाइनों में कई गरीबों ने अपनी जान गवाई। आखिर इन मौतों और देश के आर्थिक नुकशान का जिम्मेदार कौन था, काले धन के नाम पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वाला कौन था, आज देश की जनता को मोदी सरकार से इस बात का जबाब मांग रही है ?          

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