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गुजरात में घूस देकर नेताओं को ख़रीदने की कोशिश, तो राजस्थान में कानून के सहारे भ्रष्टाचारियों को बचाने की कवायद यही है बीजेपी का 'एजेंडा'

October 23, 2017 08:14 PM

केंद्र और गुजरात की सरकार में बैठी भारतीय जनता पार्टी अपनी ग़लत नीतियों की वजह से ना केवल देश की अर्थव्यवस्था को डुबो रही है बल्कि देश में उसके ख़िलाफ़ बने माहौल की वजह से वो निराशा और हताशा के माहौल में बौखला गई है। जिस तरह की राजनीति करने के लिए बीजेपी जानी जाती है ठीक वही उसने अब गुजरात में किया है जिसके तहत नरेंद्र पटेल नामक सामाजिक नेता को बीजेपी द्वारा 1 करोड़ रुपए की घूस देकर बीजेपी में शामिल कराने की कोशिश की गई। आम आदमी पार्टी को शक है कि ये घूस की कोशिश बीजेपी के उपरी स्तर से की गई है लिहाज़ा हम मांग करते हैं कि इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए ताकि सच जनता के सामने आ सके। 

केंद्र और गुजरात की सरकार में बैठी भारतीय जनता पार्टी अपनी ग़लत नीतियों की वजह से ना केवल देश की अर्थव्यवस्था को डुबो रही है बल्कि देश में उसके ख़िलाफ़ बने माहौल की वजह से वो निराशा और हताशा के माहौल में बौखला गई है। 

 पार्टी कार्यालय में आयोजित हुए प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एंव राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि ‘भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह से दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक को ख़रीदने की कोशिश की थी ठीक उसी तरीक़े से उसने अब गुजरात में भी नरेंद्र पटेल जी को रिश्वत देकर अपनी पार्टी में शामिल कराने की एक नाकाम और नापाक कोशिश की है। यही भारतीय जनता पार्टी का स्वभाव है और यही उसका चरित्र। सरकार में बैठ कर वो पूरी तरह से विफल है और इसकी हताशा उसके क्रियाकलापों में साफ़ देखने को मिल रही है’

 ‘हमें शक है कि ये नरेंद्र पटेल को घूस के बदले पार्टी में शामिल कराने की साज़िश सिर्फ़ गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष की नहीं हो सकती, इसके पीछे बीजेपी के उपरी स्तर के लोग शामिल हैं और ऐसे में आम आदमी पार्टी को ना तो गुजरात पुलिस पर कोई यकीन है और ना ही सीबीआई पर, हमारी मांग है कि इस घूसकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए ताकि सच जनता के सामने आ सके।

 राजस्थान में घूसखोरों को बचाने के लिए कानून बना रही है बीजेपी सरकार

एक तरफ़ जहां गुजरात में बीजेपी घूस देकर सामाजिक नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ़ राजस्थान की बीजेपी सरकार तो एक अध्यादेश लाकर भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को बचाने की कवायद में लगी है। विधानसभा में अध्यादेश पेश कर कानून में संशोधन करके सरकारी कर्मचारियों, जजों और यहां तक की राजनेताओं को भी बचाने का इंतज़ाम किया जा रहा है जो बेहद ही निंदनीय है।

पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एंव राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि ‘राजस्थान में बीजेपी की वसुंधरा सरकार के नीचे की ज़मीन खिसक रही है और इसी का नतीजा है कि अब बीजेपी अपने और अफ़सरों द्वारा किए गए सभी ग़लत कार्यों को बचाने और उसे छुपाने के लिए कानून में संशोधन कर रही है। एक अध्यादेश लाकर उसे सदन से पास कराया जा रहा है जिसके तहत किसी भी सरकारी अफ़सर, पूर्व और वर्तमान जज और यहां तक कि राजनेताओं के ख़िलाफ़ कोई भी मामला सरकार की अनुमति के बिना दर्ज़ नहीं किया जा सकता। यहां तक कि मीडिया को उक्त लोगों के नाम तक छापने और प्रसारित करने तक का अधिकार भी नहीं होगा।‘

‘राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का यह तुगलकी फरमान है जिसे किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लोकतांत्रिक प्रणाली में इस तरह के आदेश तानाशाह के समान होते हैं। आम आदमी पार्टी राजस्थान सरकार के इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करती है और मांग करती है कि इस अध्यादेश को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।‘

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की नियुक्ति अवैध

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एंव राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने प्रेस कॉंफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘आखिर क्यों सीबीआई को तोता कहा जाता है और कैसे सरकार में बैठे लोग सीबीआई का दुरुपयोग करते हैं उसका एक और प्रमाण तब देखने को मिला जब नियुक्तियों से जुड़ी केंद्रीय मंत्रिमंडल की समिति ने एक ऐसे अफ़सर को सीबीआई का विशेष आयुक्त नियुक्त कर दिया जिसकी विश्वसनीयता ही संदेह के घेरे में है। सीवीसी ने राकेश अस्थाना नामक अफ़सर की सीबीआई में पदोन्नत्ति के खिलाफ़ प्रतिकूल रिपोर्ट दी थी लेकिन बावजूद इसके मोदी सरकार ने राकेश अस्थाना को प्रमोट करके सीबीआई में विशेष आयुक्त बना दिया।

  • यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि नियुक्तियों से सम्बंधित मंत्रिमंडल समिति ने रविवार रात सीबीआई के विशेष निदेशक के रूप में संदिग्ध छवि वाले व्यक्ति को नियुक्त किया है।
  • केंद्र सरकार का यह फ़ैसला सीवीसी अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के एतिहासिक विनीत नारायण के फैसले के खिलाफ़ है
  • सीवीसी अधिनियम यह स्पष्ट रूप से बताता है कि सीबीआई में इंस्पेक्टर रैंक और उसके ऊपर के हर रैंक की नियुक्ति के लिए सीवीसी की मंजूरी ज़रुरी होती है।
  • मोदी सरकार की ऐसी क्या मजबूरी थी कि एक व्यक्ति की नियुक्ति के लिए सीवीसी द्वारा उसके ख़िलाफ़ दी गई प्रतिकूल रिपोर्ट  को नज़रअंदाज किया गया और इसके बावजूद उस अफ़सर को नियुक्त किया गया?
  • मोदी सरकार सीबीआई को एक बंदी तोते से एक पालतू कुत्ते में बदलने की कोशिश कर रही है।
  • क्या मोदी सरकार इस बात से इनकार कर सकती है कि सीवीसी ने श्री अस्थाना की पदोन्नति को इसी बात के आधार पर ही खारिज किया था कि उनका  हाल ही में सीबीआई द्वारा हाल ही में दर्ज़ की गई FIR में जब्त एक डायरी में उनका नाम भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया था, यह डायरी साल 2011 से सम्बंधित है?
  • क्या यह सच नहीं है कि 30 अगस्त को सीबीआई की दिल्ली यूनिट ने गुजरात की स्टर्लिंग बायोटेक और सैंडेसारा ग्रुप ऑफ कंपनीज़ से रिश्वत लेने के लिए तीन वरिष्ठ आयकर आयुक्तों के खिलाफ विस्तृत प्राथमिकी दर्ज की थी?
  • यह एफआईआर कहती है कि एक कंपनी पर छापे के दौरान मिली एक "डायरी 2011" मौजूद थी। इस डायरी में आरोपी आयकर आयुक्तों को दिए गए मासिक भुगतान का विवरण रहा जिसमें गुजरात और दिल्ली के कई पुलिस अधिकारियों और राजनेता भी शामिल थे। यह पता चला है कि डायरी में राकेश अस्थाना का नाम भी था। क्या मोदी सरकार इस बात से इनकार कर सकती है?
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