Saturday, December 16, 2017
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पराली के मुद्दे पर आप ने सभी जिलों के डिप्टी कमीशनरों को सौंपे मांग पत्र

October 16, 2017 09:42 PM

पराली को खेतों में आग न लगाने के सम्बन्ध में नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दिशा निर्देशों को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने आज पंजाब के सभी जिला हैडक्वाटरों पर डिप्टी कमीशनरों के द्वारा पंजाब सरकार को मैमोरंडम दे कर मांग की है कि एनजीटी के हवाले से सूबे के किसानों को तंग परेशान करने का सिलसिला तुरंत बंद किया जाए।  

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और मैंबर पार्लियामेंट भगवंत मान, सह-प्रधान अमन अरोड़ा और विधान सभा में विरोधी पक्ष के नेता सुखपाल सिंह खहरा ने संयुक्त ब्यान के द्वारा बताया कि आप के विधायकों और अधिकारियों की तरफ से सभी जिलों के डिप्टी कमीशनरों को मांग पत्र देकर पंजाब सरकार को कहा है कि किसानों पर जुर्माने और केस दर्ज करने से पहले पंजाब सरकार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट पहले अपने पर लागू करे।  
आप नेताओं ने कहा कि एनजीटी के दिशा निर्देशों में किसानों से पहले सूबा सरकार की जिम्मेवारियां निर्धारित की गई हैं, परंतु पंजाब सरकार ने अपने फर्जों की पूर्ति के बगैर किसानों के खिलाफ कानूनी मुहिम शुरु कर रखी है। किसानों पर केस दर्ज किए जा रहे हैं और जुर्माने लगाए जा रहे हैं, जो गैर जिम्मेदार और निंदनीय है।  
आप नेताओं ने एनजीटी की रिपोर्ट के पैरा नंबर 14 की मद 'सी' का हवाला देते हुए बताया कि इस दिशा निर्देश अनुसार पराली को खेत में काटने और उठाने की पहली जिम्मेदारी सूबा सरकार की है। यदि सरकार ऐसा करने में असमर्थ रहती है तो इस काम पर आने वाले खर्च की पूर्ति मुआवजे के रूप में सरकार करेगी। इतना ही नहीं पराली को खेतों में ही गालने के लिए अपेक्षित मशीनरी और यंत्र मुहैया करके किसानों को देने की ड्यूटी भी सूबा सरकार की तय की गई है, परंतु सूबा सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह असफल रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने अपने हिस्से के फर्जों को पढ़ा ही नहीं और किसानों के खिलाफ कानून का डंडा उठा लिया है। इस लिए आम आदमी पार्टी ने अपने मांग पत्र में नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट भी डिप्टी कमीशनरों के द्वारा सरकार को सौंपी है। जिससे किसान वातावरण प्रदूषण के नाम पर किसानों पर कोई कार्यवाही करने से पहले खुद के फर्जों पर अमल करे।  
'आप' नेताओं ने कहा कि पराली से निपटने के लिए प्रति एकड़ करीब 7 हजार रुपए का खर्च आता है। पहले ही कर्ज और आर्थिक संकट का शिकार पंजाब के किसान यह राशि अपनी तरफ से खर्च करने के  लिए असमर्थ हैं। इस लिए किसानों को प्रति एकड़ कम से कम 6 से 7 हजार रुपए मुआवजा दे। 'आप' नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी वातावरण प्रदूषण को ले कर बेहद गंभीर और चिंता में है। यहां तक कि किसान भी पराली को खेतों में आग लगाने के नुक्सान के प्रति जागरूक है परन्तु किसान को मजबूरी-वश आग लगानी पड़ती है क्योंकि किसान अपने स्तर पर पराली की समस्या के साथ नहीं निपट सकता। इस लिए पंजाब सरकार पराली को आग लगाने से रोकने के लिए पहले अपनी ड्यूटी पूरी करे।  
'आप' ने कहा कि यदि सरकार अपने फर्ज पूरे किये बगैर किसानों पर कार्यवाही जारी रखती है तो पार्टी किसानों के साथ डटेगी और जल्दी ही अगला प्रोगराम ऐलान करेगी। पार्टी ने किसानों पर अब तक किये गए केस और जुर्माने रद्द करने की भी मांग की।  

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