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उत्तर कोरिया के हाईड्रोजन बम परीक्षण ने दुनिया में फैलाई दहशत

September 05, 2017 08:40 AM

संयुक्त राष्ट्र संघ ने बुलाई आपात बैठक, कोरिया को परवाह नहीं

परमाणु हमलों से बचाव के उपाय क्या होंगे, ज्य़ादातर देश नहीं जानते

उत्तर कोरिया के ताज़ा हाईड्रोज़न बम परीक्षण ने सारी दुनियां में दहशत फैला दी है। मामला इतना गंभीर है कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) ने एक आपातकालीन बैठक बुला ली है। बम धमाका इतना ज़बरदस्त था कि बहुत से इलाके में भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए। उत्तरी कोरिया का दावा है कि बम अमेरिका में भी गिराया जा सकता है। इस तरह चीन, रूस, जापान और अमेरिका जैसे विकसित देश अब उत्तरी कोरिया की मार तले आ गए हैं। ज़ाहिर है इससे पूरी दुनिया को खतरा पैदा हो गया है। उत्तरी कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन ने दावा किया है कि अब वह परमाणु बम के मामले में दुनिया में नंबर वन हैं। अमेरिका ने कोरिया को भारी सैन्य कार्यवाही की चेतावनी दी है जिसका उस पर कोई असर नज़र नहीं आया। 

यूएन सिक्यूरिटी काऊंसिल में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने ट्विट करके मीडिया को जानकारी दी है कि मीटिंग सोमवार को ही तय है। उधर अमेरिका के सुरक्षा सचिव जेम्स मैटी ने उत्तरी कोरिया को सावधान किया है कि यदि अमेरिका या इसके किसी सहयोगी देश के खिलाफ कोई कारवाई हुई तो अमेरिका भारी सैनिक कार्यवाई करके इसका जवाब देगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरिया को एक ऐसा दुष्ट देश बताया है जो कोरियन प्रायदीप के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। रविवार को हाईड्रोजन बम परीक्षण के बाद चीन और रुस भी इसके खिलाफ़ एकजुट हो गए हैं। 

यूएन सिक्यूरिटी काऊंसिल में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने ट्विट करके मीडिया को जानकारी दी है कि मीटिंग सोमवार को ही तय है। उधर अमेरिका के सुरक्षा सचिव जेम्स मैटी ने उत्तरी कोरिया को सावधान किया है कि यदि अमेरिका या इसके किसी सहयोगी देश के खिलाफ कोई कारवाई हुई तो अमेरिका भारी सैनिक कार्यवाई करके इसका जवाब देगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरिया को एक ऐसा दुष्ट देश बताया है जो कोरियन प्रायदीप के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। रविवार को हाईड्रोजन बम परीक्षण के बाद चीन और रुस भी इसके खिलाफ़ एकजुट हो गए हैं। दोनों देशों ने एक समझौते पर दस्तखत किए हैं कि यदि उत्तर कोरिया ने कोई गलत कदमउठाया तो उसका माकूल जवाब दिया जाएगा। जि़यामिन में जारी ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की मिलनी हुई है।

ये सवाल पहले भी उठता आया है कि विश्वभर के लिए खतरा बनते जा रहे उत्तर कोरिया के खिलाफ़ अमेरिका या बाकी देश मिलकर कोई कार्यवाई करेंगे ? ऐसा हुआ इसलिए नहीं कि इससे पहले सिर्फ उत्तर कोरिया को समझाने की ही कोशिशें की गईं। अब क्यूंकि संकट खतरनाक हद तक चला गया है इसलिए कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए किसी ठोस उपाय की ज़रूरत है। गत चालीस बरसों से जारी इस कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर के देश उत्तर कोरिया को समझाते चले आ रहे हैं लेकिन सब बेकार। उसे तो दुनिया में दहशत फैलाने से मतलब है वो भी खासकर अमेरिका और दक्षिण कोरिया में। कोरिया की जद में आए जापान ने देशवासियों को ये बताने के लिए कि उनके पास बचाव के क्या उपाय हैं एक श्वेत पत्र जारी करके गत दिनों कहा था कि जो छोटे परमाणू हथियार हैं जिन्हें लंबी दूरी की मिज़ाईलों पर फिट करके वे अपने देश का बचाव कर सकते हैं। अमेरिका का चिंतित होना इसलिए भी लाजि़मी है कि उत्तर कोरिया का मुख्य निशाना भी वही है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका कई मोर्चों पर संकटग्रस्त है। ट्रंप की विदेश नीति स्पष्ट नहीं है इसलिए भी देश में अनिश्चितता का माहौल है।

हालांकि ये इतना जल्द संभव नहीं फिर भी यदि परमाणु हमला हो जाता है तो इससे बचाव कैसे किया जाए,  इसे लेकर कम से कम भारत में तो कहीं कोई योजना नज़र नहीं आती। अमेरिका और जापान में तो लोगों को बाकायदा बताया जा रहा है, डेमो दिए जा रहे हैं कि ऐसा हुआ तो ये बचाव करें। भय इस बात का है कि आज के आतंकी संगठन बहुत हाई-फाई हो चुके हैं और परमाणु हथियार उनकी पहुंच में भी हैं जो किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं। किम जोंग कहते आ रहे हैं कि वो जितने चाहें परमाणु हथियार बना सकते हैं। भारत को तो वैसे भी पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से खतरा है। परमाणु बम इतने खतरनाक होते हैं कि हिरोशिमा और नागासाकी, जहां इनका सबसे पहला इस्तेमाल हुआ था वहां आज 70 साल बाद भी बच्चे अपंग पैदा हो रहे हैं।

दरअसल ये झगड़ा अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच का है। अमेरिका विश्व का दादा बनना चाहता है और ये बात कोरिया को कतई पसंद नहीं। परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी पहले वो अमेरिका के गुआम द्वीप पर करना चाहता है जहां अमेरिका के बम वर्षक विमानों को रखा जाता है। प्रशांत महांसागर में इस द्वीप तक पहुंचने के लिए ही कोरिया ने लंबी दूरी की मिसाइलें ईज़ाद कीं। गत माह जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने उत्तर कोरिया पर कुछ आर्थिक पाबंदियां लगा दीं तो अमेरिका के साथ चीन ने भी उसका समर्थन किया। इससे कोरिया चीन के भी खिलाफ हो गया। कोरिया के एक सरकारी अखबार में छपा था कि जिस दिन अमेरिका उनके देश को परमाणु बम और आर्थिक प्रतिबंधों से डराने की जुर्रत करेगा उस दिन अमेरिका एक आग के गोले में बदल जाएगा।

अब ऐसी स्थिति में क्या किया जाए जब एक अकेला देश पूरे विश्व को चुनौती देता फिरे। पहले ये मामला केवल दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच का था अब ये उत्तर कोरिया और पूरी दुनिया के बीच का होकर रह गया है। दरअसल उत्तर कोरिया ने इतनी अधिक परमाणु शक्ति हासिल कर ली है कि इससे वो दुनिया की आधी आबादी को खत्म कर सकता है। बीच बचाव के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं। अमेरिका, जापान, रूस, चीन और अन्य देश एक होकर भी परमाणु हथियारों का तोड़ नहीं ढूंढ सकते। ऐसा इसलिए क्यूंकि हर देश अपनी मारक शक्ति को बढ़ाने की होड़ में आगे निकल रहा है,  बचाव की बात तो कहीं सामने आ भी नहीं रही। ऐसे में वो देश और वो नागरिक जिनका कोई कसूर नहीं वो ही इन परमाणु हमलों का शिकार होंगे। आखिर हाईड्रोजन बम कोरिया ने मछलियां मारने के लिए तो बनाया नहीं, कहीं न कहीं तो इसका प्रयोग होना ही है।

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