Friday, November 24, 2017
Follow us on
National

जो मोदी मन भाए वही मंत्री मंडल में जगह पाए

September 05, 2017 08:24 AM

भाजपा के पास प्रतिभाओं की कमी,  ब्यूरोक्रेटस का लिया सहारा

अपने लोगों पर भाजपा को नहीं रहा विश्वास, छोटे घटक हताश

 भारतीय जनता पार्टी मंत्रीमंडल का विस्तार आखिर हो ही गया। इसे एनडीए का विस्तार कत्तई नहीं कहा जाएगा क्यूंकि अपनी आदत के अनुसार मोदी ने एनडीए के घटक अकाली दल जैसे छोटे दलों को पास भी फटकने नहीं दिया। इस विस्तार की खास बात ये कि मोदी ने सिद्ध कर दिया है कि होगा वही जो मोदी को मंज़ूर होगा, ऐसा इसलिए कि नौ नए चेहरों में चार पूर्व ब्यूरोक्रेटस हैं जिनमें से दो तो सांसद भी नहीं हैं। ज़ाहिर है मोदी के पास समझदार और तज़ुर्बेकार लोगों की कमी है इस लिए ब्यूरोक्रेटस की शरण में जाना पड़ रहा है। या यूं कहें कि समझदारी का मोदी की नज़र में कोई मोल नहीं, उन्हें तो बस वही पसंद हैं जो हर वक्त हर-हर मोदी करते हैं। अब मोदी का मंत्रीमंडल 76 महानुभावों का एक समूह है जो मोदी का विश्वासपात्र है। 

रविवार को नौ नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है। इनमें सबसे बड़ा फेरबदल ये है कि निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया गया है। इनसे पहले श्रीमति इंदिरा गांधी के पास प्रधानमंत्री रहते रक्षा मंत्रालय रहा ज़रूर है लेकिन स्वतंत्र रूप में कोई महिला पहली बार रक्षा मंत्री बनी है, रेलवे विभाग पीयूष गोयल को दिया गया है। 

रविवार को नौ नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है। इनमें सबसे बड़ा फेरबदल ये है कि निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया गया है। इनसे पहले श्रीमति इंदिरा गांधी के पास प्रधानमंत्री रहते रक्षा मंत्रालय रहा ज़रूर है लेकिन स्वतंत्र रूप में कोई महिला पहली बार रक्षा मंत्री बनी है, रेलवे विभाग पीयूष गोयल को दिया गया है। इस विस्तार में चार मंत्रियों को पदोन्नति दी गई है, वे अब कैबिनेट मंत्री हो गए हैं, नौ नए राज्यमंत्री बनाए गए हैं। मुख़्तार अब्बास नकवी और अल्फोंस को मंत्री बनाकर अल्पसंख्यक कार्ड खेला गया है।

इस तरह अब मंत्रीमंडल में 27 कैबिनेट मिनिस्टर, 11 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 37 राज्य मंत्रियों सहित कुल 76 सदस्य हो गए हैं। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिशनर सतपाल सिंह, पूर्व गृह सचिव आर के सिंह, रिटायर्ड आइएएस केजे अल्फोंस और पूर्व डिप्लोमेट हरदीप सिंह पुरी चारों ब्यूरोक्रेटस मोदी की निगाह में कैसे चढ़े ये सवाल अपनी जगह बरकरार रहेगा। ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अल्फोंस और हरदीप पुरी तो सांसद भी नहीं हैं। स्वयं भाजपा के लोग भी मानते हैं कि कांग्रेस के मुकाबले उनके पास कम प्रतिभावान लोग हैं इसी लिए भाजपा ब्यूरोक्रेटस पर निर्भर करती है।

इस विस्तार को आमतौर पर मोदी की पसंद का विस्तार कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि मोदी की निगाह में औसत दर्जे के लोगों को ही भाव दिया जाता है। न तो ज्य़ादा पढ़ाई और न ज्य़ादा दिमाग वाले लोग मोदी को पसंद हैं। याद करें रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को कैसे अपना पद छोडक़र वापस अमेरिका जाना पड़ा था, क्यूंकि वे इंटेलीजेंट थे और मोदी को ये बात पसंद नहीं थी। इसी तरह नीति आयोग के चेयरमैन अरविंद पानगढिय़ा को भी इतने महत्वपूर्ण पद से बरतरफ कर दिया गया था। लोग पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी को भी नहीं भूले होंगे, वे भी अपनेज्ञान के कारण मोदी के साथ नहीं चल पाए। अब मोदी किसी बड़े कद और सोच वाले को मंत्रीमंडल में नहीं शामिल कर रहे, कारण साफ है।

एनडीए के छोटे घटक तो नहा धोकर बैठ गए, उनको तो मेला भी देखने को नहीं मिला। पंजाब के मु2यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भले ही मोदी के करीब होने के लाख दावे करें लेकिन अकाली दल को मंत्रीमंडल विस्तार में जगह न देना बादल के दावे की सच्चाई बता रहा है। दूसरी ओर वो नितीश कुमार जिसने पाला बदलकर बिहार में फिर से सरकार बनाई तो मीडिया के सामने बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे कि वो मोदी के खासम खास हैं,  रविवार को उनकी भी हवा निकल गई। इनके अतिरिक्त शिवसेना का दावा था कि मोदी उन्हें पूछे बगैर विस्तार नहीं करेंगे, अब वे कहां हैं स्वयं देख लें। छोटे दलों को अब अपना वज़ूद समझ लेना चाहिए और ये जान ही लेना चाहिए कि मोदी के पास भरी बहुमत है और ऐसे में किसी एनडीए की ज़रूरत है भी नहीं, हां ये दल मोदी से जुड़े रहें भलाई इसी में है। भाजपा के पास 280 सांसद हैं, कम होते तो शायद घटकों की अहमियत होती।

 राजनीतिक पयावेक्षक जो अनुमान लगा रहे थे वे सब धराशायी हो चुके हैं। अब ये मान लेने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि एनडीए कहें या भाजपा, यहां फैसला केवल दो ही लोग लेते हैं, एक स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे भाजपा प्रधान अमित शाह। तभी तो ऐसे लोग भी मंत्रीमंडल में ले लिए गए हैं जोकि कोई ज्य़ादा पॉलिटिकल अनुभव भी नहीं रखते। दूसरी ओर ये भी गौर करने वाली बात है कि भाजपा के पास अच्छे खासे युवा सांसद हैं फिर भी उन्हें सामने नहीं लाया जा रहा। कहा जाता है कि यहां 60 फीसदी युवा सांसद हैं लेकिन पार्टी मंत्री बनाने के लिए ऐसे लोगों को भी लाया गया जो कि सांसद भी नहीं है। वैसे ये बात भाजपा के लिए नई नहीं है क्योंकि स्मृति ईरानी और अरुण जेतली को भी हार जाने के बावजूद मंत्री बना ही दिया गया था।

इस विस्तार से एक बात ये भी सामने आई है कि राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को पूरी तरह से अनदेखा किया गया है, उनकी कहीं नहीं चली। लगता है कि अडवानी और सुष्मा स्वराज की तरह अब वे दोनों भी मोदी से शन: शन: दूर हो रहे हैं। इस बीच स्मृति ईरानी, अरुण जेतली और धर्मेंद्र प्रधान मोदी के और करीब आए हैं क्योंकि उनका ओहदा और जिम्मेवारी दोनों बढ़े हैं,  साथ ही बढ़ा है उन का राजनीतिक कद। संघ का बोलबाला फिर से बरकरार है। राजस्थान से शेखावत,  बिहार से चौबे और कर्नाटक से अनंत हेगड़े को लाना दर्शाता है कि संघ का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में जनता ये सवाल तो पूछती ही रहेगी कि क्या मंत्रीमंडल में नए चेहरे लाने से आमजन को रोज़गार मिला, क्या आर्थिक विकास दर बढ़ी ?

एक बार राहुल गांधी ने कहा था कि भाजपा में योग्य लोगों की कमी नहीं है लेकिन वो योग्य लोगों को सामने आने ही नहीं देते। मंत्रीमंडल विस्तार के बाद ये बात अब स्वयं भाजपा के लोग भी खुलकर कहने लगे हैं। कहा जाता है कि औसत दर्जे के लोग ही भाजपा में आगे आते हैं और प्रतिभाशाली लोगों को तो बर्दाश्त ही नहीं किया जाता। किसे भूला होगा कि स्मृति ईरानी को हार जाने के बावजूद मंत्री बना दिया गया और कोई खास प्रतिभा न होने के बावजूद उसे मानव संसाधन मंत्रालय सौंप दिया गया। भाजपा के अंदर से उठे बगावत के सुरों के चलते स्मृति को कपड़ा उद्योग मंत्रालय देना पड़ा था। मनोहर पर्रिकर के रक्षामंत्री रहते ऐसे ही सवाल उठा करते थे जिनपर विराम उन्हें सीएम बनाकर ही लगाया जा सका था। यशवंत सिन्हा वाजपेयी सरकार में वित्तमंत्री थे लेकिन मोदी ने उम्र अधिक हो जाने का बहाना बनाकर एक प्रतिभा को किनारे लगा दिया।

Have something to say? Post your comment
More National News
दिल्ली में ‘प्रदूषण’ और एल.जी. बने दमघोंटू
सरकार का बड़ा ऐलान : ये 40 सेवाएं अब दिल्ली वासियों को घर बैठे मिलेंगी, अफसरों के चक्कर काटना बीते दिनों की बात
अब दिल्ली में तैयार होगा ‘राशन’ का होम डिलीवरी नेटवर्क
अल्का के ‘सैनेटरी पैड्स’ और भक्तों की ‘गाय’
‘प्रदूषण’ का खेल खेलते नेताओं का अखाड़ा बनी ‘दिल्ली’
केजरीवाल का केंद्र सरकार को जबाब, पहले पानी का छिड़काव अब ऑड-ईवन
'नोटबंधी' के 'हिटलरी फरमान' से जनता को दिया धोखा
जो न कर पाई 'केंद्र सरकार', वो करेगी 'आप सरकार'
नार्थ घोंडा की तेजराम गली और प्रजापति गली के निर्माण कार्य का शुभारंभ
‘अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव हमारी वर्तमान राजनीति की दो ज़रूरतें हैं’