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‘बवाना’ की जीत और ‘आप’ का हौसला 

September 03, 2017 02:20 PM

दिल्ली का यह विकास माॅडल देश भर में चाहते हैं लोगा: गोपाल राॅय

पर्सनल कम्युनिकेशन सिस्टम को करना होगा मजबूत
आम आदमी पार्टी, बवाना सीट जीत गई, यह छोटी सी दिखने वाली जीत, बड़े मायने रखती है। आंदोलन की कोख से निकली इस पार्टी की स्वीकार्यता, लोकप्रियता, संघर्ष क्षमता एवं सुचिता जनता की कसौटी पर कसी जा रही थी और निर्णय उस जनता के हाथ था जो एक ओर केंद्र व भाजपा की धृष्टता, षड़यंत्र व कुटिल चालों से ‘आप’ के बुलंद इरादों को ध्वस्त करने का खेल नंगी आंखों से देख रही थी. दूसरी ओर वही जनता आम आदमी पार्टी द्वारा किए जा रहे तमाम विकास कार्यों की साक्षी बनी थी जो उसने दो-अढ़ाई साल के अंतराल में दिल्ली में कर दिखाए हैं। जनता तमाम बाधाओं के बावजूद आपके हौंसले, जुनून एवं विकास के प्रति समर्पण का मूल्यांकन खुद कर किसी बहकावे में नहीं आना चाहती थी और जनता का यही इरादा यहां आम आदमी पार्टी को फिर से उसी पायदान पर गर्व के साथ खड़ा कर गया जहां वह 70 में से 67 सीटें जीतते वक्त खड़ी थी। 

 केंद्र व भाजपा की धृष्टता, षड़यंत्र व कुटिल चालों से ‘आप’ के बुलंद इरादों को ध्वस्त करने का खेल नंगी आंखों से देख रही थी. दूसरी ओर वही जनता आम आदमी पार्टी द्वारा किए जा रहे तमाम विकास कार्यों की साक्षी बनी थी जो उसने दो-अढ़ाई साल के अंतराल में दिल्ली में कर दिखाए हैं।


बड़े अर्थों वाली इस छोटी सी ‘बवाना’ की जीत के नायक बन उभरे आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राॅय से आम आदमी पार्टी के नेता व वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने बातचीत की, ‘आप की क्रांति’ पाठकों के लिए प्रस्तुत है इस महत्वपूर्ण साक्षात्कार के प्रमुख अंश:
आशुतोष: गोपाल राॅय जी बवाना की ऐतिहासिक जीत के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई, आम आदमी पार्टी की इस गौरवशाली जीत के सेनापति और रणनीतिकार आप थे, बवाना में ऐसा क्या था कि छोटे से विधान सभा चुनाव पर सब लोगों की नजरें टिकी थी ?
गोपाल राॅय: बवाना विधानसभा सीट 70 विधानसभाओ में से एक थी। पूरे देश व दुनिया के लोग बवाना विधान सभा के परिणाम का इंतजार कर रहे थे, इसका पहला कारण तो यह था कि दिल्ली में 70 में 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी जो एक बड़ी उम्मीद लेकर पंजाब चुनाव में उतरी और लोगों की उम्मीद थी कि वहां सरकार बनेगी किंतु वहां उम्मीद के अनुरूप परिणाम नहीं आए, उसके बाद गोवा में चुनाव लड़ा वहां पर भी सफलता नहीं मिली, दिल्ली के अंदर राजौरी गार्डन का विस उप चुनाव हुआ वहां भी आम आदमी पार्टी चुनाव नहीं जीत सकी. दिल्ली में एमसीडी का चुनाव हुआ उसमें भी हम विपक्षी बने। 70 में से 67 सीट जीतने का जो करिश्मा था वह नहीं दोहराया जा सका तो विरोध में ऐसा प्रचार किया जाने लगा कि जैसे आम आदमी पार्टी खत्म हो रही है। आम आदमी पार्टी के लोग साथ छोड़ गए, आम आदमी पार्टी जो काम कर रही है उसका कोई इम्पैक्ट नहीं है. इन सभी परिणामों के बाद जिस तरीके से दिल्ली सरकार को खत्म करने के प्रयास हुए, कहा जाने लगा कि सारे विधायक टूट रहे हैं, सरकार गिरने वाली है. तमाम तरह की जो अफवाहें फैलाई गई थी, उन सारी चीजों की वास्तविकता को नापने का देश की जनता के जहन में एक पैमाना में था कि देखते हैं बवाना में क्या होता है. दूसरा जिस तरह से एक आम आदमी पार्टी के विधायक को भाजपा की तरफ से तोड़ा गया, उसे इस्तीफा दिलवाया, उसने पार्टी के साथ गद्दारी की, तो यह भी एक प्रश्न जनता के मन में था कि उस गद्दार का बवाना की जनता क्या करेगी ? यही दो अहम प्रश्न थे जिसकी वजह से इन चुनावों में देश व दुनिया की निगाहें बवाना पर टिकी थी।
आशुतोष: गोपाल भाई काफी समय से बवाना में रहे, दिल्ली के आप संयोजक हैं, बहुत मेहनत की है आपने और पूरी टीम ने, क्या इसके आधार पर बवाना विधान सभा आप जीत गए, क्या बवाना जीतने मात्र से यह कहा जा सकता है कि आम आदमी पार्टी पूरे तरीके से दिल्ली में जीवित है, सजीव है और उसका करिश्मा लौट आया है ?
गोपाल राॅय: आम आदमी पार्टी को लोग चाहते हैं, केज़रीवाल सरकार दिल्ली में जो काम कर रही है वह लोगों को भा रहा है, लोग उसके साथ खड़े हैं, यह बात निश्चित रूप से बवाना में साबित हुई है, बवाना ने दो मैसेज दिए हैं, पहला मैसेज आम आदमी पार्टी के लिए है और वह यह है कि हमारा काम केवल वर्तमान मीडिया तंत्र पर भरोसा कर नहीं चलेगा, हमें अपना एक मजबूत नेटर्वक आम आदमी तक बनाना पडे़गा। संगठन का तंत्र जो हमारे काम को, सच्चाई को, जिसे हम जनता के सामने रखने की कोशिश करते हैं, झूठ का पर्दा हटाने की कोशिश करते हैं, उस पर काम कर सकें, लोगों तक सच्चाई पहुंचा सकें। इसके लिए वबाना में आम आदमी पार्टी को बहुत ही कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इस बात को मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि पूरी दिल्ली के अंदर जनता हमारे साथ है, लेकिन पार्टी को अपने संगठन को मजबूत करने के लिए और लोगों तक डायरेक्ट कनैक्शन, ह्यूमन ‘अल्टरनेट मीडिया चैनल’ बनाना पड़ेगा । हमें लोगों तक सच्चाई पहुॅंचाने का तंत्र खुद विकसित करना पड़ेगा। मैं जानता हूॅं कि अगर हमने यह ‘ह्यूमन नेटर्वक’ खड़ा कर दिया तो पिछली बार की तरह दिल्ली में बड़ा समर्थन आने वाले चुनाव में भी हम हासिल कर सकते hain।
आशुतोषः क्यों वाॅलिंटियर आम आदमी पार्टी से कट गया था, वह चुप हुआ या शांत हुआ, क्या लगता है आपको, बवाना में सच्चाई क्या थी ?
गोपाल रायः देखिए बवाना में निश्चित रूप से वेद प्रकाश के इस्तीफा देकर भाजपा में जाने से हमारा वाॅलिंटियर काफी कमजोर हुआ था, लेकिन हमने दो चीजें देखी, बवाना का प्रयोग कहता है कि जनता से संवाद किया जाए, दिल्ली के जितने विधान सभा क्षेत्र हैं उनमें अमूमन डेढ़ सौ से दो सौ बूथ हैं लेकिन बवाना में पौने चार सौ बूथ हैंै। एमसीडी चुनाव परिणाम के बाद इन ढाई-तीन महीनों के दौरान हमने जब वहां पर बातचीत शुरू कर कम्पेन शुरू किया तो हमारे जितने भी पुराने वाॅलिंटियर थे जो हार बैठे थे, वो भी खड़े हो गए, लोगों के बीच से नये वाॅलिंटियर भी आने लगे, जो किसी न किसी भ्रम, किसी न किसी अफवाह का शिकार थे, लेकिन जब सच्चाई उनके सामने रखी गई तो उन्होंने पार्टी के लिए जम कर काम किया। 23 तारीख को चुनाव के दिन बूथ पर बैठने के लिए करीब साढ़े सात सौ लोगों ने स्वेच्छा से नाम दिया और बूथों पर वाॅलिंटियरली ड्यूटी दी। हमें लगता है कि जो वाॅलिंटियर किसी वजह से गलत फहमी के शिकार हैं, किसी वजह से नराज़ हैं उनके साथ वार्तालाप स्थापित किया जाए। सच्चाई के साथ उनसे बात करें तो पहले से ज्यादा मजबूत ‘संगठन’ आज दिल्ली में खड़ा हो सकता है, क्योंकि हमारी जब सरकार बनी उस समय तक लोगों ने हमारा काम नहीं देख था, उस समय हम वादे करते थे आज वो वादे दिल्ली में हकीकत बन चुके हैं. और उस काम को लेकर लोगों से ‘डाॅयलाॅग’ स्थापित हो तो पहले से ज्यादा लोग वाॅलिंटियरली काम कर सकते हैं।
आशुतोष: गोपाल राॅय जी आप हमें यह बताइए कि सरकार में जो काम हुए हैं, चाहे वह शिक्षा को लेकर हुआ, स्वास्थ्य को लेकर हुआ, बिजली, पानी को लेकर या फिर मोहल्ला क्लीनिक का काम हुआ, उसका वबाना की जनता पर कितना असर था और लोगों ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी ?
गोपाल राॅय: जो हमारे खिलाफ जा रहा था हमने उन लोगों से बात की तो हमारे खिलाफ बहुत सारी अफवाहें व झूठे विचार लोगों के दिमाग में बैठे थे। वहां संगठन में लोगों की मेहनत और संगठन का सामूहिक प्रयास एक तरफ था लेकिन सबसे बड़ा गेम चेंजर अगर कुछ रहा तो वो रहा दिल्ली सरकार का काम। दिल्ली सरकार ने जिस तरह बिजली के लिए वादा किया था, वह पूरा किया। बिजली के दाम आधे किए, पानी फ्री किया। जहां पानी नहीं था वहां लोगों के लिए पाइप लाइनें जगह- जगह बिछाई। किसानों को मुआवजा दिया, स्मार्ट गांव के तहत हर गांव के लिए हर साल दो करोड़ की पाॅलिसी लेकर सरकार आई है। चाहे वह पेंशन बढ़ाई है, शिक्षकों, अंगनवाडी कार्यकर्ताओं की तनख्वाह बढ़ाई है। न्यूनतम वेतन बढा है, दिल्ली सरकार ने तमाम तरह के काम किए हैं।
देखिए पूरे भारत के अंदर क्या चल रहा है ? इमोशन से, जाति या धर्म का कोई भी मुद्दा उठाओ और वोट लो। देश में एक सरकार है आम आदमी पार्टी की जो लोगों की जिंदगी में छोटी-छोटी खुशियां हर दिन भर रही है। जिस परिवार में जिन बुर्जुगों, विकलांगों विधवाओं की पेंशन जहां एक हजार आती थी आज दो हजार आ रही है, इससे इनकी जिंदगी में नया उजाला आया है। वैसे ही जिन मजदूरों को साढ़े नौ हजार मिलते थे अब साढ़े तेरह हजार मिल रहे हैं। उनकी जिंदगी में एक नई खिड़की खुली है। आम आदमी पार्टी का जो विकास का माॅडल है, काम करने का तरीका है वह लोगों के दिल में उतरा है। हमारे सामने जो चैलेंज है, जो हम काम कर रहे हैं दिल्ली की जनता है उसके बीच जो अफवाह फैलाने वाला तंत्र है, झूठ बोल कर लोगों को भ्रमित करने वाला तंत्र है उसके बीच में रास्ता बनाकर सच्चाई को सीधे उन तक पहुंचाना है। यह काम वबाना में हमने किया है, सरकार ने काम किया था हमने उसका प्रचार किया जिसका परिणाम हमें जीत के रूप में मिला।
आशुतोष: बड़ी बात अभी गोपाल जी कह रहे हैं। मुझे लगता है जो हमारे तमाम साथी लोग हैं उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए, ये देखना चाहिए, आम आदमी पार्टी की जब सरकार बनी हमने दो चीजों पर सबसे ज्यादा फोकस किया एक तो शिक्षा पर दूसरा स्वास्थ्य पर, क्योंकि आजा़दी के बाद 70 साल हो रहे हैं अभी भी अपने देश के अंदर किस तरह आॅक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की दो दिन में मृत्यु हुई और कुछ ही दिनों बाद 50 बच्चों की फिर से मौत हो गई। जिस देश के अंदर आजादी के इतने सालों के बाद स्वास्थ्य सुविधा नहीं है, जिस वजह से बच्चों की मौतें हुई हैं वहां आम आदमी पार्टी ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस किया है। इसका एकमात्र कारण यह है कि जब इंसान बेहतर होगा तब ही राष्ट्रª बेहतर बनेगा। शिक्षित राष्ट्र- स्वस्थ राष्ट्र होगा। आप को वबाना में इस बात का फायदा लगातार मिला और एक नया माॅडल तैयार हुआ। एक बात और भी है कि जो अरविंद जी के बारे में लोगों ने बहुत सारे सवाल खड़े किए कि केजरीवाल पहले बहुत बोलते थे अब नहीं बोलते, कहीं ऐसा तो नहीं कि इनका करिश्मा कम होने लगा क्या नज़र आया आपको ?
गोपाल राॅय: देखिए मैने जो वहां देखा ऊपर से जो दिखता है और जो लोगों के दिलों में है, वह एकदम अलग बात है। जब पूरा का पूरा मीडिया तंत्र एंटी काम करता है तो थोडी देर के लिए लोगों के मन में सवाल पैदा कर देेता है, लेकिन आज भी लोगों में चाहे वह झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाला आखिरी इंसान है, उसकी जुबान पर आए या न आए लेकिन मैने झुग्गी-झोपड़ी में, गांवों में यह प्रभाव चारों तरफ देखा है कि नौजवानों से लेकर महिलाओं तक अरविंद केजरीवाल आज भी भविष्य के भारत का नायक है और उसको लेकर के वैसी ही चाहत है, जैसी पहले थी। अगर किसी मोहल्ले में एक खबर गई कि केजरीवाल आ रहा है तो लोगों ने अपने काम छोड़ दिए और लोग ,सड़क पर उमड़ पड़े, अरविंद केजरीवाल से हाथ मिलाने के लिए, तो देखिए केजरीवाल के खिलाफ दुष्प्रचार होता है, उसका सिर्फ और सिर्फ यही कारण है कि देश के अंदर जो सिस्टम है जो इस देश को लूट रहा है, जो इस देश को जुमलेबाजी और धोखाधडी में, जाति धर्म के नाम पर उलझा कर वोट लेना चाहता है, उसे यदि आज पूरे देश में किसी से खतरा है तो वह अरविंद केजरीवाल ही है, क्योंकि वह लोगों के स्वास्थ्य को ठीक करना चाहता है, लोगों को शिक्षित करना चाहता है और इस देश के लोगों की जिंदगी में सीधे खुशहाली लाना चाहता है, इसलिए यह सारा दुष्प्रचार का तंत्र चलता है। मेरा मानना है कि वो तंत्र सीधे आज हमारे सामने है यही सबसे बड़ा चैलेंज है। हमारे पास टी.वी. चैनल नहीं हैं, हमारे पास अखबार नहीं है, हमारे पास ज्यादा पैसे देकर सोशल मीडिया चलाने की क्षमता नहीं है, लेकिन यदि ह्यूमन कम्यूनिकेशन सिस्टम को हम सुदृढ़ कर लेते हैं, तो आई टू आई कांटेक्ट के साथ ही पहली बार भी आम आदमी पार्टी आई थी, अरविंद केजरीवाल को जब इस्तीफा देने के बाद भगोड़ा बनाया था तो, भगौड़े को भ्रष्टाचारियों पर हथौड़ा मारने वाला दिल्ली के लोगों ने बनाया 67 सीट देकर तैयार किया था, वह हमारा पर्सनल कम्युनिकेशन सिस्टम था। मुझे लगता है कि दिल्ली और देश के अंदर यदि हम ऐसा कम्युनिकेशन सिस्टम खड़ा कर देते हैं जिससे हमारा व्यक्ति जा करके सीधे सच्चाई बता पाए तो मुझे लगता है फिर इस आम आदमी पार्टी और इस उम्मीद को सारी कोशिशों के बावजूद कोई धूमिल नहीं कर सकता।
आशुतोष: गोपाल जी अब आगे आम आदमी पार्टी से लोगों को क्या उम्मीदें हंै, क्या यह पार्टी इस देश के अंदर वैकल्पिक राजनीति करेगी ? देश के अंदर जिस तरह से सांप्रदायिकता, नफरत और हिंसा का वातावरण बना हुआ है इनके बीच आम आदमी पार्टी एक ऐसे विकल्प के रूप में उभरेगी, जो भ्रष्टाचार मुक्त समाज की बात करती है, भष्टाचार मुक्त देश की बात करती है, वबाना की जीत के बाद अब आगे की रणनीति क्या है ?
गोपाल राय: जो मैने महसूस किया है आम आदमी पार्टी से देश की जनता को दो तरह की उम्मीदें हैं। पहला दिल्ली के अंदर 67 सीटंे लेकर लोगों ने सरकार बनाई है, जिन विपरीत परिस्थितियों में दिल्ली के अंदर सरकार बनी सब लोग जान रहे हैं, सब को पता है कि हमे परेशान किया जा रहा है, लेकिन फिर भी लोगों को उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी, केजरीवाल की सरकार, दिल्ली के अंदर एक सकारात्मक विकास का माॅडल खड़ा करके देगी। 

मुझे व्यक्तिगत रूप से पता है कि मै शुरू से आंदोलन से जुड़ा रहा, अन्ना आंदोलन से लेकर आज तक सरकार की जो रणनीति पार्टी ने बनाई उसे हम आज 24 घंटा जी रहे हैं। उसमे मुझे एक चीज़ महसूस होती है कि देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की जो लड़ाई दिल्ली के अंदर चल रही है उसको खत्म करने की पूरी कोशिश की जा रही है। हमारा लोकपाल पारित नहीं होने दिया। 

हम भी प्राथमिकता के आधार पर इस काम को करना चाहते हैं. साथ-साथ लोग यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि आम आदमी पार्टी देश में इतनी सशक्त बने कि जिस तरह से दिल्ली में वह कांग्रेस बीजेपी का विकल्प देकर एक नया प्रयोग कर रही है, पूरे देश में भी लोग वही चाहते हैं। आज कल या परसों ये जो भी नया पौधा दिल्ली में विकास, लोगों की खुशहाली, आम आदमी की जिंदगी में बेहतरी लाने का जो यह फूल खिला रहा है यही फूल पूरे देश में खिले. एक बात प्रैक्टिकल कहना चाहता हूं कि यह पार्टी भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए लोकपाल आंदोलन से पैदा हुई, दिल्ली के अंदर हमारी सरकार बनी, पहली बार जब हमने जनलोकपाल लाया, कांग्रेस ने जब समर्थन नहीं दिया हमने इस्तीफा दे दिया, लोगों ने फिर 70 में से 67 सीटें दी कि आप कानून बनाओ, सरकार बनने के 6 महीने के अंदर-अंदर ही दिल्ली विधानसभा के अंदर हमने जन लोकपाल कानून पारित कर केंद्र सरकार को भेजा दिया लेकिन केंद्र सरकार आज तक उसको दबाए बैठी है। मुझे व्यक्तिगत रूप से पता है कि मै शुरू से आंदोलन से जुड़ा रहा, अन्ना आंदोलन से लेकर आज तक सरकार की जो रणनीति पार्टी ने बनाई उसे हम आज 24 घंटा जी रहे हैं। उसमे मुझे एक चीज़ महसूस होती है कि देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की जो लड़ाई दिल्ली के अंदर चल रही है उसको खत्म करने की पूरी कोशिश की जा रही है। हमारा लोकपाल पारित नहीं होने दिया। करप्शन रोकने के लिए हमारे पास एसीबी थी उसे छीन लिया गया। उसके बाद अधिकारियों पर लगाम लगाने के लिए जितने भ्रष्टाचारी लोग थे उनका हमने ट्रांसफर करना शुरू किया तो केंद्र ने उन्हें संरक्षण देना शुरू कर दिया। भ्रष्टाचार रोकने और दिल्ली के विकास में रूचि ले रहे अधिकारियों के चुन-चुन कर तबादले किए गए। विकास की गति रोकने के तमाम प्रयास हुए किंतु आम आदमी पार्टी हर बाधा को पार करती हुई लगातार आगे बढ़ती चली गई।
अशुतोष: गोपाल जी हमसे बातचीत करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद! हम कामना करते हैं कि आम आदमी पार्टी अपने नेक और बुलंद इरादों के साथ निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़े और देश की उम्मीदों पर खरी उतरती हुई लोगों के जीवन में यूं ही खुशियों के रंग भरती रहे।

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