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जानिए कितने 'बलात्कारी' माननीय सांसद और विधायक चुने हैं आपने

September 01, 2017 09:36 AM

मौजूदा 51 सांसदों/विधायकों ने स्वीकारा महिलाओं के प्रति अपराध
भारतीय जनता पार्टी में हैं सबसे अधिक महिलाओं के अपराधी

दिल्ली के निर्भया कांड के बाद एक बार लगा था कि सभी भारतवासियों को होश आ गई होगी कि किसी महिला से बदतमीज़ी न की जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आम आदमी की तो बात ही क्या वो लोग जो वास्तव में समाज के रहनुमा हैं वो ही जब महिलाओं के प्रति जघन्य अपराध करने लगें तो फिर आम जनता कहां पीछे रहेगी। 

हाल ही में खुलासा हुआ है कि 51 सांसद/विधायकों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने महिलाओं के प्रति अपराध किए हैं और ये मामले अदालतों में चल रहे हैं। देश पर शासन करने वाली भारतीय जनता पार्टी इस मामले में सबसे अधिक बदनाम है। भाजपा के 14 और शिवसेना के 7, आल इंडिया तृणामूल कांग्रेस के 6 सांसद /विधायक महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में कोर्ट कचहरियों के चक्कर काट रहे हैं। ये वो लोग हैं जो लोगों द्वारा चुने गए हैं।
हमेशा की तरह एक बार फिर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉरम्स (एडीआर) ने एक नया खुलासा किया है। एडीआर ने सभी सांसदों एवं विधायकों के कुल 4896 शपथपत्रों में से 4852 को बारीकी से जांचा है। इनमें सांसदों के 776 में से 774 शपथपत्रों को लिया गया जबकि विधायकों के 4120 में से 4078 शपथपत्रों को बारीकी से जांचा गया है। ये सभी शपथपत्र भारत के सभी राज्यों से लिए गए हैं जो सांसदों व विधायकों ने चुनाव लड़ते समय भारत के चुनाव आयोग के सामने प्रस्तुत किए थे। ये उन सांसदों अथवा विधायकों के शपथपत्र हैं जो पिछले पांच साल के दौरान चुने गए।
एडीआर की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 1581 सांसदों/विधायकों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने जीवन में किसी न किसी प्रकार का अपराध किया है। इस प्रकार ये तादाद खंगाले गए शपथपत्रों की फीसदी बैठती है। इनमें से 51 ने स्वीकारा है कि उन्होंने महिलाओं के विरुद्ध कोई न कोई अपराध किया है जिसकी जांच न्यायालयों में जारी है। इन 51 महानुभावों में से 48 विधायक हैं और 3 सांसद। अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि जिस देश के सांसद व विधायक ही महिलाओं को कुछ न समझते हों तो उनसे इस वर्ग के उत्थान की उम्मीद कैसे की जाए।
गौर करें, बलात्कार करने वाले ये हैं वो महानुभाव-2012 में गुजरात की शेहरा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के निर्वाचित विधायक जी.अहीर। तेलगुदेशम पार्टी से धर्मावरम सीट से 2014 में चुने गए आंध्रा प्रदेश के विधायक गोगुंतला सूर्यनारायण। ओडीशा की बिजेपुर विधानसभा सीट से 2014 में निर्वाचित इंडियन नेशनल कांग्रेस के सुबल साहू। बिहार से 2015 में राष्ट्रीय जनता दल की ओर से झांझीपुर सीट के लिए चुने गए विधायक गुलाब यादव। इनके अतिरिक्त ऐसे 29 प्रत्याशी रहे हैं जिन्होंने अपने शपथपत्रों में साफ लिखा था कि वे बलात्कार के मामलों में संलिप्त रहे हैं। यहीं बस नहीं 14 प्रत्याशी ऐसे भी रहे जिन्होंने लोकसभा/राज्यसभा का चुनाव भी लड़ा हालांकि वे बता चुके थे कि वे बलात्कार के आरोपी रहे हैं।
अब ज़रा पार्टिंयों की कारकरदगी भी ध्यान से देख लें। वो 334 प्रत्याशी जिन्होंने अपने शपथपत्र में अपने अपराध को स्वीकार किया उन्हें देश की नामी गिरामी राजनीतिक पार्टियों ने टिकट से नवाज़ा था। फिर आज़ाद प्रत्याशी पीछे कैसे रहते। 122 प्रत्याशी आज़ाद तौर पर चुनाव लड़े। इनमें से कुछ लोग पिछले पांच साल में लोकसभा/राज्यसभा/विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। इनमें से भी 40 तो ऐसे हैं जिन्हें लोकसभा अथवा राज्यसभा के लिए बड़े राजनीतिक दलों ने टिकट दिए। इतना ही नहीं राज्य विधानसभाओं के लिए राजनीतिक दलों ने 294 लोगों को टिकट दिए हैं। 

एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि पिछले पांच वर्षों में 19 आजाद प्रत्याशियों ने अपने खिलाफ महिलाओं के विरुद्ध मामले दर्ज होने के बावजूद लोकसभा अथवा राज्यसभा के चुनाव लड़े हैं। ठीक इसी तरह 103 आज़ाद प्रत्याशी ऐसे रहे जिनके खिलाफ महिलाओं को लेकर आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद उन्होंने विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़े। 


एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि पिछले पांच वर्षों में 19 आजाद प्रत्याशियों ने अपने खिलाफ महिलाओं के विरुद्ध मामले दर्ज होने के बावजूद लोकसभा अथवा राज्यसभा के चुनाव लड़े हैं। ठीक इसी तरह 103 आज़ाद प्रत्याशी ऐसे रहे जिनके खिलाफ महिलाओं को लेकर आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद उन्होंने विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़े। खास बात ये कि महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां ऐसे सांसदों अथवा विधायकों की संख्या सबसे अधिक है जो महिलाओं के विरुद्ध मामलों में केस भुगत रहे हैं। महाराष्ट्र में ऐसे 12 सांसद या विधायक हैं जबकि इनके बाद पश्चिमी बंगाल का नंबर आता है जहां ऐसे सांसदों अथवा विधायकों की संख्या 11 है। ओडीशा तीसरे नंबर पर है जहां 6 सांसद या विधायक महिलाओं के अपराधी हैं।
भारतीय जनता पार्टी महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को टिकट देने में देशभर में अग्रणी है। पार्टी ने पिछले पांच साल में ऐसे 48 लोगों को अपना प्रत्याशी बनाया जो महिलाओं के खिलाफ मामलों में केस भुगत रहे थे। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष भले ही स्वयं एक महिला है फिर भी उसने ऐसे 36 लोगों को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा जो महिलाओं के आरोपी थे। कांग्रेस भी ज्य़ादा पीछे नहीं है जबकि इन्होंने 27 आरोपी प्रत्याशियों को टिकट दिए थे।
ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या किया जाए जिससे ऐसे आपराधिक प्रवृति वाले लोग लोकसभा, राज्यसभा अथवा विधानसभा में न जा सकें। होना तो ये चाहिए कि सबसे पहले चुनाव आयोग स्वयं ही ऐसे प्रत्याशियों के कागजों को अवैध घोषित कर दे। दूसरा ये कि राजनीतिक दल ही महिला की अस्मिता को अहमियमत दें और ऐसे किसी प्रत्याशी को अपना टिकट न दें। तीसरी बात जो स्वयं मतदाताओं पर लागू होती है उन्हें पता लगने पर ऐसे लोगों को चुनना ही नहीं चाहिए। हालांकि दूसरा उपचार कठिन है फिर भी राजनीतिक दल स्वयं इसके लिए आगे आएं तो न केवल स्वच्छ एवं अच्छे सांसद या पार्षद ही आगे आएंगे बल्कि महिलाओं का सम्मान भी बढ़ेगा।

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