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अपराधियों को खोजने निकला पुलिस दल IG समेत पहुंचा सलाखों के पीछे ! पढ़ें पुलिस का बुना षड्यंत्र व हत्या का एक सन सनीखेज प्रकरण

August 30, 2017 03:52 PM

बेहद पीड़ा से गुजरते हुए हिमाचल की एक बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध, गैंग रेप व उसके बाद उसकी निर्मम हत्या के बारे में यह लेख लिख रहा हूं, 4 जुलाई को हुई इस घटना से उस वक्त देव भूमि का सिर शर्म से झुक गया था और इसी मामले में आज एक बार फिर हिमाचल पुलिस शर्मसार है।

जरा सोचिए जिस पुलिस पर भरोसा कर आप अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं जब वही पुलिस रक्षक की जगह भक्षक का रूप धारण कर ले तो क्या होगा ? 

जी हां यही सब कुछ हुआ दिखाई दे रहा है शिमला कोटखाई के इस प्रकरण में, यहां गुड़िया गैंग रेप के बाद पुलिस ने अपने तथाकथित राजनैतिक आकाओं के इशारे पर दोषियों को पकड़ने की जगह उन्हें छुड़ाने, बचाने व भगाने में अपनी पूरी उर्जा झोंक दी।......

जी हां यही सब कुछ हुआ दिखाई दे रहा है शिमला कोटखाई के इस प्रकरण में, यहां गुड़िया गैंग रेप के बाद पुलिस ने अपने तथाकथित राजनैतिक आकाओं के इशारे पर दोषियों को पकड़ने की जगह उन्हें छुड़ाने, बचाने व भगाने में अपनी पूरी उर्जा झोंक दी।................. इतना ही नहीं इसके बाद बेगुनाहों को सलाखों के पीछे डालने, उनकी हत्या करने व उस हत्या में भी फिर से किसी निर्दोष को फंसाने की स्क्रिप्ट पुलिस के आलाअधिकारियों ने बखूबी निर्भय हो कर पूरे दबंग अंदाज में लिखी।

 

परिणाम यह हुआ कि आज सीबीआई जांच के दौरान इस ढोल की पोल खुल गई और यहां के आई.जी. और डीएसपी समेत 8 पुलिस वालों को ही CBI ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आज़ाद भारत का यह पहला ऐसा मामला बन गया जिसमें अपराधियों को ढूंढने निकली पुलिस खुद एक के बाद एक अपराध करती चली गई और अपराधियों से बड़ी खुंखार अपराधी बन खुद सलाखों के पीछे तक का सफर असली अपराधियों से पहले कर गई...... पुलिस की अब तक की मुस्तैदी तो इस ओर इशारा कर रही है कि संभवतयः इन्हें सजा भी असली अपराधियों से पहले हो जाए।

इतनी बड़ी खबर होने के बावजूद तथा कथित राष्ट्रीय मीडिया की रहस्यमय चुप्पी गुड़िया हत्याकंड के दौरान भी ऐसे ही थी जैसी अब है। राजनीतिज्ञ भी वही बोलेंगे जिसे इस प्रकरण में वोटों का फायदा दिखेगा. या फिर इस मामले में विपक्ष के किसी नेता को फंसने का दम नज़र आयेगा. वैसे मीडिया को इस वक्त जनता माफ़ी भी दे दे तो चलेगा, क्योंकि मीडिया इन दिनों राम रहीम की गाड़ी में मिले महिलाओं के अंर्तवस्त्र गिनने में व्यस्त है।

 

                 खैर बात करते हैं असली मुद्दे की.....  सीबीआई ने 29 अगस्त, मंगलवार को बहुचर्चित गुड़िया गैंग रेप और रेप के बाद प्रदेश क्या देश की चूलें हिला देने वाले निर्मम हत्याकांड के मामले में आईजी एस. जहूर जैदी और ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी अब सीधे-सीधे गुड़िया प्रकरण को राजनीति से जोड़ रही है। कयास लगाए जाने लगे हैं कि सीबीआई को इस बात के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं कि गुड़िया गैंग रेप प्रकरण में एक बड़े नेता के करीबी फंस रहे थे जिन्हें बचाने के लिए उन्होंने पुलिस पर दबाव डाला और अब खुद आईजी साहब अपनी टीम समेत अपने आकाओं को खुश करने के चक्कर में सीबीआई के जाल में फंस चुके हैं। ध्यान रहे कि हिमाचल प्रदेश में विपक्ष ने इस मामले में गुड़िया के अपराधियों को बचाने का सीधा-सीधा आरोप प्रदेश सरकार व प्रदेश के आला नेताओं पर लगाया था। अब इस मामले में खुद कानून के रखवाले रिमांड पर हैं। सच उगलेंगे तो उनके आकाओं पर भी गाज गिरेगी और यह गाज हिमाचल में दिसंबर में होने वाले चुनावों पर भी छाप छोड़ेगी, हिमाचल प्रदेश की राजनीति बुधवार सुबह यानि 30 अगस्त से खूब गर्माएगी। मामला आज तो राष्ट्रीªय मीडिया ने हल्के में लिया किंतु कल नहीं ले सकेगी। पुलिस वाले आरोपियों को बचाने, भगाने, निर्दोष को फंसाने और हिरासत में एक आरोपी सूरज को मौत के घाट उतारने के मामले में बुरी तरह फंस चुके हैं। सीबीआई अब भी इनसे सच न उगलवा सकी तो फिर गुड़िया प्रकरण भी सदा-सदा के लिए कभी न सुलझ पाने वाला अरूषी प्रकरण बन कर ही रह जाएगा।

 हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी मामले में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस समेत इतने पुलिस वालों की गिरफ्तारी हुई है।

सीबीआई के इस एक्शन से राज्य सरकार कटघरे में खड़ी हो गई है क्योंकि आईजी जैदी के नेतृत्व में ही गुडिया मामले की जांच चल रही थी। सीबीआई ने ये गिरफ्तारी मंगलवार को शिमला में रेलवे बोर्ड बिलिंडग स्थित शाखा में इन पुलिस अधिकारियों से लंबी पूछताछ के बाद तब की जब अब तक की खोजबीन में पुलिस अधिकारियों का यह दल सीबीआई को पूरी तरह संदिग्ध लगा।

सीबीआई को जांच में इस बात के पुख्ता सबूत मिले बताए जा रहे हैं कि सूरज को पुलिस हिरासत में खुद पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने निर्ममता से मौत के घाट उतारा। इस मामले की जांच को बनाई गई एसआईटी के प्रमुख आईजी जैदी ने न केवल असलियत को छिपाने में अहम भूमिका निभाइ बल्कि हत्या का आरोप एक दूसरे आरोपी पर थोप दिया।

आज गिरफ्तारी के बाद इन आठों पुलिस कर्मियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, सीबीआई का कहना है कि आईजी समेत पुलिस वालों से कड़ी पूछताछ चल रही है और जल्द यह मामला सुलझ जाएगा। कोर्ट ने सीबीआई की मांग पर इन आठों आरोपियों को चार सितंबर तक रिमांड पर भेज दिया है। 

सीबीआई के इस एक्शन से राज्य सरकार कटघरे में खड़ी हो गई है क्योंकि आईजी जैदी के नेतृत्व में ही गुडिया मामले की जांच चल रही थी। सीबीआई ने ये गिरफ्तारी मंगलवार को शिमला में रेलवे बोर्ड बिलिंडग स्थित शाखा में इन पुलिस अधिकारियों से लंबी पूछताछ के बाद तब की जब अब तक की खोजबीन में पुलिस अधिकारियों का यह दल सीबीआई को पूरी तरह संदिग्ध लगा।

 

सीबीआई ने जिन आठ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को गिरफ्तार किया है, उनमें आईजी दक्षिणी रेंज रहे एस. जहूर जैदी, ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई पुलिस थाने के पूर्व एसएचओ राजेंद्र सिंह, पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एएसआई दीप चंद, इसी पुलिस स्टेशन में एचएचसी रहे सूरत सिंह, मोहन लाल, हेड कांस्टेबल रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत स्ट्रेटा शामिल हैं।

फ़िलहाल ये गिरफ्तारियां 18 जुलाई की रात को कोटखाई थाने में हुए लॉकअप हत्याकांड में की गई बताई जा रही हैं। ध्यान रहे कि शिमला के कोटखाई थाने के लॉकअप में गुड़िया दुराचार मामले में पुलिस की ओर से बनाए गए आरोपी नेपाली सूरज सिंह की हत्या कर दी गई थी। पुलिस की एसआईटी ने इस मामले की जांच के बाद गुड़िया मामले में बनाए प्रमुख आरोपी राजू को ही हत्यारा करार देते हुए उसके खिलाफ केस दर्ज कर दिया था।

हालांकि बाद में जब गुड़िया दुराचार एवं कत्ल मामले की जांच सीबीआई को दी गई तो इसकी छानबीन में ये बात सामने आई कि, सूरज की हत्या राजू ने नहीं की बल्कि, सूरज को पुलिस ने ही लॉकअप में मार डाला । सीबीआई मुख्यालय दिल्ली के प्रवक्ता आरके गौड़ ने आईजी एस. जहूर जैदी समेत आठ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की।

अब आपको यह बताते हैं कि यह गुड़िया प्रकरण है ? छह जुलाई को शिमला के कोटखाई क्षेत्र के दांदी जंगल में दसवीं कक्षा की एक छात्रा का दुराचार के बाद शव फेंका मिला। इस मामले में हिमाचल पुलिस ने पांच लोगों को पकड़कर मामला सुलझाने का दावा किया। इनमें से एक आरोपी सूरज की गुडिया की मौत के चौदह दिन बाद कोटखाई थाने के लॉकअप में हत्या कर दी गई।

पुलिस ने हत्या का आरोप दूसरे मुलजिम पर लगाया, गुस्साए लोगों ने थाने समेत कई गाड़ियां फूंक दी। जनता का कहना था कि पुलिस राजनीतिक दखल के कारण मामले को घुमा रही है। बाद में इस मामले की जांच हिमाचल हाईकोर्ट ने सीबीआई को दे दी। इस प्रकरण में अब तक क्या कुछ हुआ यह तिथी बार समझिये।

  6 जुलाई: कोटखाई के जंगल में गुड़िया का शव मिला.

7 जुलाई: पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दुराचार का खुलासा हुआ

8 जुलाई: पुलिस दरिंदों तक नहीं पहुंची, जनाक्रोश भड़का

9 जुलाई: सीबीआई जांच जोर शोर से उठने लगी

10 जुलाई: सरकार ने एसआईटी का गठन IG जहूर जैदी के नेत्रत्वा में किया

11 जुलाई: पीड़ित परिवार को पांच लाख मुआवजा राज्य सरकार ने दिया.

12 जुलाई: सीएम के फेसबुक पर फोटो हुईं वायरल हुई जिससे खूब हंगामा हुआ

13 जुलाई: एसआईटी ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया

14 जुलाई: ठियोग थाने पर पथराव हुआ, सीबीआई जांच की संस्तुति की गई

15 जुलाई: सीबीआई जांच के लिए पीएम को पत्र लिखा गया

17 जुलाई: राजभवन पहुंची भाजपा ने सरकार की बर्खास्तगी की मांग उठाई

18 जुलाई: सरकार ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए आवेदन दाखिल किया

19 जुलाई: कोटखाई थाने में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में हत्या की गई.

23 जुलाई: सीबीआई ने दो मामले दर्ज किए

24 जुलाई: सीबीआई शिमला पहुंची, जांच शुरू

 02 अगस्त: हाईकोर्ट में पुलिस ने स्टेट्स रिपोर्ट सौंपी, दो सप्ताह का समय मांगा

03 अगस्त: कस्टडी में मौत पर पुलिस अधिकारियों से पूछताछ शुरू हुई

07 अगस्त: गुड़िया की बहनों ने पहनाई सीबीआई के अफसरों को राखियां

14 अगस्त: कोटखाई थाने में तैनात संतरी के हुए बयान

17 अगस्त: सीबीआई को हाईकोर्ट की फटकार,CBI ने मांगा दो सप्ताह का समय

21 अगस्त: सीबीआई ने कई रईसजादों के घरों पर मारे छापे

29 अगस्त: सीबीआई ने IG जहूर जैदी समेत 8 पुलिस कर्मिओं को गिरफ्तार कर 4 सितम्बर तक के लिए रिमांड पर लिया

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