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हाइकोर्ट: युद्ध से युद्ध की तरह ही निपटना चाहिए

August 30, 2017 03:35 PM

कोई आगजनी करे, हिंसा फैलाए तो उसे गोली मार ही दी जानी चाहिए

हिंसा फैलाने के आरोप में डेरा अखबार का पत्रकार गिरफ्तार

पंचकूला में डेरा सच्चा सौदा के प्रेमियों की हिंसा के बाद अब जहां एक तरफ जनजीवन सामान्य हो रहा है तो दूसरी तरफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस पर अपनी नाराज़गी बरकरार रखते हुए ङ्क्षहसा की घटनाओं को लेकर पंजाब हरियाणा व चंडीगढ़ की एक संयुक्त स्पेशियल इंवेस्टीगेशन टीम गठित करने का आदेश दिया है। डेरे के अखबार के एक पत्रकार को हिंसा भडक़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है जबकि डेरा सिरसा स्थित शाही बेटियां गृह से 18 साल से कम उम्र की 18 लड़कियों एवं बच्चियों को निकालकर चाइल्ड प्रोटेक्शन होम भेज दिया गया है। इस बीच बाबा की गद्दी को लेकर पारिवारिक विवाद और गहरा गया है।

पंजाब पुलिस ने डेरा के अखबार सच्च कहूं के पत्रकार भीम सेन को गत 25 अगस्त को हिंसा भडक़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उस दिन गुरमीत सिंह को दोषी करार दिया गया था और डेराप्रेमियों की हिंसा में पंचकूला व अन्य स्थानों पर हुई हिंसा में करीब 38 व्यक्ति मारे गए थे।

पंजाब पुलिस ने डेरा के अखबार सच्च कहूं के पत्रकार भीम सेन को गत 25 अगस्त को हिंसा भडक़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उस दिन गुरमीत सिंह को दोषी करार दिया गया था और डेराप्रेमियों की हिंसा में पंचकूला व अन्य स्थानों पर हुई हिंसा में करीब 38 व्यक्ति मारे गए थे।

भीम सेन और उसके साथी रणजीत सिंह को संगरूर जिले के खखर कलां गांव में बने एक गोदाम को जलाने का भी आरोप है। इनके खिलाफ जन संपत्ति को नष्ट करने और हिंसा फैलाने का मामला हिंसा के बाद दर्ज किया गया था। इम मामले में पुलिस ने करीब एक दर्जन लोगों को नामजद किया है। इस बीच लहरा गागा में भी एक ऐसी ही घटना प्रकाश में आई है जिसपर कार्यवाई जारी है। डेरा पर भीमसेन के परिवार की श्रद्धा का अंदाज़ा यहीं से लगाया जा सकता है कि इन्होंने डेरा को 5 कनाल भूमि तो दी ही साथ ही डेरे पर बने आधा किलो अचार को 4.5 लाख रुपए में खरीदा था।

पहले की तरह मंगलवार को भी पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा प्रेमियों की हिंसा पर तल्ख टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई इस तरह पेश आता है तो उसे गोली मार ही देनी चाहिए। हरियाणा के एडवोकेट जनरल द्वारा हिंसा के बाद पुलिस की भूमिका की जांच की मांग से इंकार करते हुए कोर्ट ने कहा- ये एक युद्ध जैसी स्थिति थी और इससे युद्ध की तरह ही निपटना चाहिए था। जब वकीलों ने कहा कि पुलिस को रबर की गोलियां चलानी थीं तो हाई कोर्ट की पूरी बैंच ने कहा-जब आप इस तरह की बदतमीज़ी में शामिल हैं तो आप को गोली ही मारनी चाहिए। हिंसा के दौरान पुलिस की गोलियों से मारे गए कुछ लोगों को लेकर वकील चाहते थे कि पुलिस को प्रताडऩा की जाए कि वो ऐसे समय गोली चलाते ध्यान रखें जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

चीफ जस्टिस एस.एस.सराओं, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस अवनीश झिंगन पर आधारित पूर्ण खंडपीठ ने कहा कि दंगा फैलाने वाले इस समय एक किंग की भूमिका में थे और पुलिस पीडि़त के रुप में थी। जजों ने कहा- दंगों की स्थिति में पुलिस को सक्त होना ही चाहिए। जब आपके सामने लोग पैट्रोल बम, लाठियां और अन्य हथियार लेकर एक संयुक्त हमला करने की तैयारी में हों तो आपको सक्त होना ही पड़ेगा। यदि ऐसे लोग दंगे, आगजनी और हाथापाई करेंगे तो उन्हें मार ही दिया जाना चाहिए। इस तरह हाई कोर्ट ने एक बार फिर ये संदेश दिया है कि हिंसा पर पहले की तरह ढील नहीं दी जा सकती बल्कि कड़ी कार्यवाई ही ज़रूरी है।

इस बीच खंडपीठ ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ की पुलिस पर आधारित एक संयुक्त स्पेशियल इंवेस्टीगेशन टीम गठित करने का आदेश दिया है। टीम में एडीशनल डायरेक्टर जनरल से कम रैंक के अधिकारी नहीं होंगे। ये अधिकारी राम रहीम को दोषी घोषित किए जाने के उपरांत हुई हिंसा को लेकर दर्ज की गई एफआइआरस की जांच करेंगे। रिपोर्ट हाईकोर्ट के पास भेजने से पहले तीनों राज्यों के जुडिशियल मैजिस्ट्रेट उस रिपोर्ट को पहले स्वयं जांचेंगे। हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन को उस समय मुंह की खानी पड़ी जब खंडपीठ ने कहा कि पंचकूला में पेशी पर आते समय बाबा के साथ गाडिय़ां कितनी थीं और उनमें लोग कितने थे इसकी जानकारी दी जाए। इसपर महाजन ने कहा, जनाब मैं इसकी जानकारी नहीं दे सकता। कोर्ट का सवाल था कि धारा 144 आयद होने के बावजूद बाबा के साथ 350 गाडिय़ां पंचकूला पहुंच कैसे गईं? 

चीफ जस्टिस एस.एस.सराओं, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस अवनीश झिंगन पर आधारित पूर्ण खंडपीठ ने कहा कि दंगा फैलाने वाले इस समय एक किंग की भूमिका में थे और पुलिस पीडि़त के रुप में थी। जजों ने कहा- दंगों की स्थिति में पुलिस को सक्त होना ही चाहिए। जब आपके सामने लोग पैट्रोल बम, लाठियां और अन्य हथियार लेकर एक संयुक्त हमला करने की तैयारी में हों तो आपको सक्त होना ही पड़ेगा।

उधर दिल्ली में भी पंचकूला की घटना को लेकर एडवोकेट लामबंद हो गए हैं। एक पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है कि घटना से पीडि़त लोगों के नुकसान की भरपाई डेरा की संपत्ति से की जाए। याचिका में कहा गया कि सरकारी पैसे से पीडि़तों के घाव न भरे जाएं। क्योंकि डेरा के पास अकूत संपत्ति है इसलिए जो लोग मारे गए उनके वारिसों और अन्य संपत्ति का नुकसान डेरा से ही भरा जाए। उधर बाबा के परिवार में इस बात को लेकर संग्राम हो रहा है कि उनका वारिस कौन।

इस दौरान जहां हरियाणा में बस सर्विस सामान्य हो गई है वहीं पंचकूला के लोगों ने राहत की सांस ली है। बहुत से लोग कुछ ऐसी वीडियोज़ भेज रहे हैं जो उन्होंने हिंसा के दौरान बनाई तो थीं लेकिन नेटवर्क न होने से भेज न सके। इनमें बहुत से डेराप्रेमियों को पंचकूला वासियों के घरों में जब्री घुसते देखा जा सकता है जो घरों के गमले तक उठाकर पुलिस पर फेंक रहे हैं। एक वीडियो में पुलिस और अर्धसैनिक बल डेरा प्रेमियों से घिरे हुए हैं तो एक में डेराप्रेमी बुरी तरह पिटते नज़र आ रहे हैं। कुल मिलाकर हिंसा की ये ऐतिहासिक घटना लोगों ने कैमरों में सहेज कर रख ली है ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृति न हो। सभी जगह से कर्फयु हटा दिया गया है और इंटरनेट सेवा चालू हो गई है।

 

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