Sunday, December 17, 2017
Follow us on
National

मज़ाक उड़ा रही हैं विदेशी कंपनियां मेक इन इंडिया का

August 22, 2017 08:57 PM

चीनी कंपनी वीवो ने किया मज़दूरों का जीना दुश्वार

भारत से लाभ उठाकर भारतीयों को ही नुकसान पहुंचा रही है कंपनी

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम मेक इन इंडिया का जितने ज़ोर शोर से प्रचार किया जा रहा है उसके परिणामों को उसी तेज़ी से नकारा भी जा रहा है। मोदी के आहवान् पर बहुत सी विदेशी कंपनियां अपने साज़-ओ-सामान के साथ भारत आ तो गईं, निर्माण कार्य भी आरंभ कर दिया, लेकिन मानवीय मूल्यों और कामगार श्रेणी के अधिकारों का जिस तरह से हनन किया जा रहा है उस तरफ से प्रशासन ने मुंह फेर रखा है। परिणाम ये कि विदेशी कंपनियां प्रतिदिन स्किल्ड श्रेणी के कामगारों को बिना वज़ह बताए निकाल रही हैं और कानून को दर किनार करते हुए उनके काम की कीमत भी अपनी शर्तों पर ही अदा कर रही हैं। ऐसे में जहां मेक इन इंडिया पर सवाल उठ रहे हैं वहीं इसपर भी कि यदि भारत, विदेशी कंपनियों द्वारा मज़दूरों के अधिकारों का हनन नहीं रोक पा रहा तो फिर ऐसे कार्यक्रम का लाभ ही क्या है। 

2015 में मेक इन इंडिया की शुरुआत के साथ ही बहुत सी कंपनियों ने भारत का रुख किया जिनमें चीन की बहुत सी कंपनियां प्रमुख हैं। स्मार्टफोन निर्माता वीवो भी उनमें से एक है जिसका उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रोडक्शन प्लांट है जहां करीब 6000 कर्मचारी काम पर हैं। ये कंपनी क्रिकेट की 2017 की आईपीएल सीरीज़ को प्रायोजित करने के चलते चर्चा में आई और इसी साल के आरंभ में सीरीज़ खत्म होते ही अपने करीब एक हज़ार कर्मचारियों को निकाल देने के कारण बदनाम भी हो गई।

बात ज्य़ादा पुरानी नहीं है। 2015 में मेक इन इंडिया की शुरुआत के साथ ही बहुत सी कंपनियों ने भारत का रुख किया जिनमें चीन की बहुत सी कंपनियां प्रमुख हैं। स्मार्टफोन निर्माता वीवो भी उनमें से एक है जिसका उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रोडक्शन प्लांट है जहां करीब 6000 कर्मचारी काम पर हैं। ये कंपनी क्रिकेट की 2017 की आईपीएल सीरीज़ को प्रायोजित करने के चलते चर्चा में आई और इसी साल के आरंभ में सीरीज़ खत्म होते ही अपने करीब एक हज़ार कर्मचारियों को निकाल देने के कारण बदनाम भी हो गई। क्यूंकि आईटीआई पास व्यक्ति  ही कंपनी में जा सकता है, ज़ाहिर है कि सारे कर्मचारी स्किल्ड श्रेणी में आते हैं। निकाले जाने पर कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिला$फ नारेबाज़ी की और हो सकता है कि छुटपुट तोडफ़ोड़ भी की हो। लेकिन वीवो कंपनी ने सरकार की मेक इन इंडिया की हवा निकालते हुए विरोध करने वालों को पुलिस के हवाले कर दिया।

अब सवाल ये है जो कंपनी सरकार से इतनी रियायतें लेकर भारतीय स्मार्टफोन बाज़ार पर कब्ज़ा करने की नीयत से उतरी है उसे क्या इतनी छूट दी जा सकती है कि वो जब चाहे कर्मचारी को रख ले और जब चाहे निकाल बाहर करे। भारत ने आर्थिक लाभ और स्थानीय नागरिकों को रोज़गार देने की गरज से कंपनी को यहां आने का न्यौता दिया था। सरकार ने स्थानीय निर्मित हैंडसैट्स पर इम्पोर्ट टेक्स 12.5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया। भारत में हैंडसैट बनाना लाभदायक दिखा तो और कंपनियां भी भागी आईं। सूचना के अनुसार अब तक 37 मोबाइल निर्माता कंपनियां भारत में निवेश करने को आगे आईं जिनमें छह चीनी हैं।

चीनी उपकरणों का बहिष्कार करने का आहवान् करने वाली भारतीय जनता पार्टी किस मुंह से कहती है कि देसी उपकरण पहले बाकी सब बाद में। जब स्वयं ही चीन को न्यौता देकर अपने कारीगरों का भविiष्य उनके हाथ दे दिया तो फिर कैसे सच्चा भारतीय होने के दावे करती है भाजपा सरकार। ओप्पो, शिओमी, वीवो, जिओनी, वनप्लस, लीइको और मीजो तो अपने पांव यहां जमाने आ चुकी हैं या आने वाली हैं तो अब और किसका इंतज़ार है भारतीय अर्थव्वस्था पर कब्ज़ा करने के लिए।

वीवो पर ही एक नज़र डालें तो यहां सभी 6000 मज़दूर या कारीगर ठेके पर हैं, एक भी पक्का नहीं। आईपीएल समापन से पहले यहां 24000 कर्मचारी थे, ज़ाहिर है क्रिकेट को स्पांसर करने का सारा खर्च कर्मचारी हटाकर पूरा किया गया। ये कर्मचारी या मज़दूर इम्पोर्टेड पुर्जों को जोडक़र स्मार्टफोन बनाते हैं। एक बार में एक लाइन में 70 कर्मचारी अलग अलग शिफटों में खड़े होते हैं। दिहाड़ी नौ घंटे की होती है पगार 9300 रुपए प्रतिमाह बताई जाती है जो काट छांटकर 7100 रुपए ही अदा की जाती है। किसी आपातकाल में कोई गैरहाजि़र हो जाए तो उसका 2000 रुपया काट लिया जाता है। ये तानाशाही नहीं तो और क्या है ? सरकार इस चीनी धक्केशाही को पता नहीं कैसे स्वीकार कर लेती है और कोई एक्शन क्यूं नहीं लेती। पीएफ काटने की बारी छह महीने के बाद आती है लेकिन उससे पहले ही कंपनी मज़दूरों को चलता कर देती है, ज़ाहिर है पीएफ कभी कटा ही नहीं।

इस धक्केशाही के खिलाफ एकजुट होकर जुलाई माह में जब करीब चार सौ मज़दूरों ने प्रतिवाद किया और नारेबाज़ी की तो कंपनी प्रबंधन ने पुलिस बुलाकर उन्हें चोरी और हथियारों के बल पर लूट के इल्ज़ाम में फंसा दिया। गौतमबुद्ध नगर के एक थाने में मज़दूरों पर आईपीसी की धारा 147 (दंगा करने), धारा 148 (घातक हथियार लेकर चलने), 149 (गैर कानूनी ढंग से एक स्थान पर जमा होना), 379 (चोरी करने) और 427 (उपद्रव करने) की दफा लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया जो आज तक ज़मानत नहीं ले पाए हैं। मोदी सरकार पता नहीं कब इस बात का पता करेगी कि जब कर्मचारियों की तीन जगह तलाशी लेने के बाद उन्हें फेक्ट्री में जाने और आने दिया जाता है तो घातक हथियार उनके पास कहां से आ गए ? ज़ाहिर है विदेशी ताकतें स्थानीय अधिकारियों से मिलकर देश के कानून से खेल रही हैं।

मेक इन इंडिया के नाम पर इससे बड़ा मज़ाक और क्या  हो सकता है कि वीवो का प्लांट जगनपुर गांव की ज़मीन पर है और इस गांव के मात्र दस युवकों को ही इसमें रोज़गार मिला है। कंपनी यूनियन नहीं बनने देती। बहुत ही दयनीय हालात में जीवन जी रहे मज़दूर सरकार के सामने एक बहुत बड़ा प्रश्नवाचक चिन्ह बनकर खड़े हैं लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। ये सारी दास्तान मात्र एक कंपनी के अत्याचारों की है, बाकी जगह क्या  होगा ये तब तक सामने नहीं आएगा जब तक कर्मचारियों का विरोध, विद्रोह का का रूप नहीं धारण कर लेता। आखिर बहुत ही कम मेहनताने पर मज़बूरी में कब तक अमानवीय व्यवहार झेल पाएंगे लोग। अभी तो मीडिया उनकी बात उठा रहा है जब मीडिया को भी जानकारी न होगी तो क्या  मोदी अपने मेक इन इंडिया के कार्यक्रम को इस तरह विदेशियों के हवाले कर देने को तब भी सही ठहराएंगे?

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोके्रटिक रिफॉमर्स ने पिछले दिनों कंपनी का दौरा करके खुलासा किया कि वहां रोज़गार की स्थिति बहुत ही हैरानकुन है। कम वेतन, सही व्यवहार न करना, वेतन में कभी वृद्धि न करना, दासों की तरह काम लेना ये बताता है कि यहां भी चीनी आतताइयों की तरह पेश आ रहे हैं जिसके परिणाम कत्तई अच्छे नहीं हो सकते। संस्था ने मज़दूरों पर दर्ज किए गए मामलों को तत्काल प्रभाव से वापिस लेने की मांग करते हुए श्रम कानून का उल्लंघन करने पर कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

Have something to say? Post your comment
More National News
दिल्ली में ‘प्रदूषण’ और एल.जी. बने दमघोंटू
सरकार का बड़ा ऐलान : ये 40 सेवाएं अब दिल्ली वासियों को घर बैठे मिलेंगी, अफसरों के चक्कर काटना बीते दिनों की बात
अब दिल्ली में तैयार होगा ‘राशन’ का होम डिलीवरी नेटवर्क
अल्का के ‘सैनेटरी पैड्स’ और भक्तों की ‘गाय’
‘प्रदूषण’ का खेल खेलते नेताओं का अखाड़ा बनी ‘दिल्ली’
केजरीवाल का केंद्र सरकार को जबाब, पहले पानी का छिड़काव अब ऑड-ईवन
'नोटबंधी' के 'हिटलरी फरमान' से जनता को दिया धोखा
जो न कर पाई 'केंद्र सरकार', वो करेगी 'आप सरकार'
नार्थ घोंडा की तेजराम गली और प्रजापति गली के निर्माण कार्य का शुभारंभ
‘अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव हमारी वर्तमान राजनीति की दो ज़रूरतें हैं’