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केजरीवाल का जादू बरकरार, भाजपा, कांग्रेस पर फिर रहा है 'झाड़ू'

August 22, 2017 08:10 PM

बवाना विधानसभा उप चुनाव, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के लिए वरदान साबित हो रही है। यहां बीजेपी जहां ‘आप’ के पूर्व विधायक जो कि वर्तमान में बीजेपी के उम्मीदवार हैं. की कारगुजारियों का खामियाजा भुगत रही है वहीं दिल्ली में अपना वजूद पिछले विधानसभा चुनावों में पूरी तरह खो चुकी कांग्रेस के लिए यह एक सीट निकालना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है।

न्यूज़ इंडिया ट्रस्ट के एक सर्वे में कांग्रेस व भाजपा आम आदमी पार्टी के मुकाबले दूर-दूर तक नहीं ठहर पा रही हैं।

यहां बीजेपी जहां ‘आप’ के पूर्व विधायक जो कि वर्तमान में बीजेपी के उम्मीदवार हैं, की कारगुजारियों का खामियाजा भुगत रही है वहीं दिल्ली में अपना वजूद पिछले विधानसभा चुनावों में पूरी तरह खो चुकी कांग्रेस के लिए यह एक सीट निकालना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है।
बवाना चुनाव पर न्यूज़ इंडिया ट्रस्ट का दावा है कि ग्राउंड जीरो पर जा कर इस मीडिया समूह ने जनता की नब्ज़ टटोलने की कोशिश की, तीनों राजनीतिक पार्टियों, बीजेपी, कांग्रेस और ‘आप’ के नाक का सवाल बने दिल्ली के बवाना विधानसभा उप चुनाव, में भले ही पूरे दमखम से तीनों पार्टियां डटी हुई हैं, लेकिन यहां पर चुनाव नज़दीक आते-आते बाजी पूरी तरह आम आदमी पार्टी के पक्ष में स्पष्ट दिखाई देने लगी है। न्यूज़ इंडिया ट्रस्ट द्वारा 2500 लोगों पर किए गए एक सैंपल सर्वे में यहां आम आदमी पार्टी को 48 फीसदी, भाजपा को 28 फीसदी व कांग्रेस को 24 फीसदी वोट मिल रहे हैं।
मतदाताओं से पूछे गए सवालों के जवाब में यहां यह बात खुल कर सामने आई कि यहां भाजपा ने जहां आप को अलविदा कह चुके, आप के पूर्व विधायक को चुनावी समर में उतार कर सबसे बड़ी भूल करते हुए खुद ही खुद को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया है
वहीं कांग्रेस अपने तमाम राजनीतिक टोटकों को आज़माने के बावजूद आपना खोया विश्वास हासिल नहीं कर पा रही है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो दलबदल और बागी उम्मीदावरों की वजह से भी ये चुनाव दिलचस्प हो गए है। राजनीतिक पंडित तो यहां तक कहते हैं कि ये चुनावी महासंग्राम दिल्ली की राजनीति की दशा और दिशा तय करेगा. यदि सब कुछ इसी तरह चलता रहा और आप ये सीट जीत गई तो देश भर में यह संदेश मजबूती से जाएगा कि दिल्ली की जनता भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद अरविंद केजरीवाल की कायल है।
कांग्रेस इस सीट को अपने लिए संजीवनी मानते हुए यहां दिलोजान से मेहनत करती नज़र आ रही है मगर केज़रीवाल के द्वारा किए जा रहे दिल्ली के विकास के आगे कांग्रेस के वायदे खोखले नज़र आ रहे हैं। 15 साल तक दिल्ली की सत्ता में राज करने के बाद, कांग्रेस के हाथ से आप के द्वारा छीनी गई सत्ता को फिर से पाने की छटपटाहट कांग्रेस में स्पष्ट दिखाई दे रही है। जहां पूरे देश में मोदी लहर अब सुनामी बन चुकी है, वहीं ये लहर यहां भाजपा के उम्मीदवार के गलत चुनाव के कारण पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। अन्दर खाते बवाना के लोग ये भी मान चुके हैं कि बीजेपी अपनों पर भरोसा न करके पैराशूट से आए वेदप्रकाश को अपना उम्मीदवार बनाकर, कहीं ना कहीं अपनों को ही अपने खिलाफ कर दिया है। विरोध के सुर बीजेपी के अन्दर भी यहां ज्वालामुखी बन गए हैं। 
कहा ये तक जा रहा है कि अगर बीजेपी किसी दूसरे उम्मीदवार पर दांव खेलती तो यहां बीजेपी की इस कदर दुर्गति न होती। ये ही कारण है कि लोगों ने बीजेपी के प्रत्याशी वेदप्रकाश को सिरे से खारिज़ कर दिया है। नतीजा ये इस चुनाव में भाजपा तीसरे नंबर पर आ चुकी है।
अब यहां मुकाबला आप बनाम कांग्रेस ही है। जहां शुरूआती पड़ाव में यहां कांग्रेस, आम आदमी पार्टी से आगे चल रही थी वहीं अरविंद केजरीवाल के डोर टू डोर कैंपेन और तूफानी दौरों ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। नतीजा झाडू यहां कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर फिरता नज़र आ रहा है।
साभार : www.newsindiatrust.com

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