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Media Hulchal

रसूखदार पत्रकार से पूछताछ करने की हिम्मत सीबीआई जुटा पाएगी?

August 11, 2017 06:30 PM

साभार : भड़ास फॉर मीडिया डॉट कॉम

सीबीआई...स्वतंत्र जांच और पत्रकार...हो पाएगा एक्शन... सीबीआई ने हाल ही में एक केस दर्ज किया है। इसमें 4 लोगों के नाम हैं। नरेंद्र सिंह, कंवर निशान सिंह, वैभव शर्मा और वी.के.शर्मा। ये चारों कौन हैं, इसका खुलासा आगे होगा। उससे पहले इस एफआईआर की खासियत जान लीजिए। इसमें कोई शिकायतकर्ता नहीं है। ब्यूरो ने एफआईआर अपने सोर्स के आधार पर दर्ज की है और जांच भी सीबीआई कैडर के इंस्पेक्टर यासीर अराफात को सौंपी है।

आपको लग रहा होगा कि इसमें खास क्या है? खास यह है जनाब कि सीबीआई कोई भी मामला जब अपने सोर्स पर दर्ज कर जांच अपने ही कैडर के अधिकारी को सौंपती है तो इसका मतलब है कि मामले में दम है...सबूत हैं...कोर्ट में केस स्टैंड करेगा। यह तो थी तकनीकी बात। 

चार अभियुक्तों में से दो नरेंद्र सिंह व कंवर निशान सिंह रिश्वत दे रहे थे और वैभव शर्मा और वीके शर्मा रिश्वत ले रहे थे। किसलिए...सिंह के झज्झर स्थित मेडिकल कॉलेज में छात्रों का दाखिला फिर से शुरु करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से इजाजत दिलाने हेतु। 

अब आते हैं अभियुक्तों पर। चार अभियुक्तों में से दो नरेंद्र सिंह व कंवर निशान सिंह रिश्वत दे रहे थे और वैभव शर्मा और वीके शर्मा रिश्वत ले रहे थे। किसलिए...सिंह के झज्झर स्थित मेडिकल कॉलेज में छात्रों का दाखिला फिर से शुरु करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से इजाजत दिलाने हेतु।

  दरअसल यह मेडिकल कॉलेज उन दर्जनों कॉलेजों में से एक है जिस पर सरकार ने नए छात्रों को दाखिला देने पर प्रतिबंध लगा रखा है क्योंकि ये कॉलेज सुविधाओं के मामले में सब स्टैंडर्ड हैं। शर्मा बंधुओं ने यह ठेका लिया था कि मंत्रालय का आदेश पक्ष में आएगा लेकिन इसके एवज में बतौर रिश्वत मोटी रकम देनी होगी। सौदा तय था। लेकिन सीबीआई ने धर दबोचा। बताते चलें कि वी के शर्मा एस्टर (ASTER) के नाम से कई स्कूल चलाता है जहां वह खुद मैनेजिंग डायरेक्टर है और उसका बेटा वैभव शर्मा डायरेक्टर। फिलहाल ये दोनों बाप बेटे गिरफ्तार हैं और सीबीआई की रिमांड पर हैं।

सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में इन्होंने बताया कि इंडिया टीवी के एक पत्रकार की राजनीतिक गलियारों की पहुंच ऐसे काम को अंजाम तक पहुंचवाती थी। यह पत्रकार कोई मामूली हस्ती नहीं है। हालांकि इस घटना के बाद अचानक इस पत्रकार को इंडिया टीवी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

इस पत्रकार के रसूख का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि गत अप्रैल में इसकी बेटी की शादी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के तमाम बड़े नेता मसलन अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, मुलामय सिंह यादव आदि शरीक हुए थे। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री समारोह में काफी देर तक रुके थे। इंडिया टीवी के इस पत्रकार के वी. के शर्मा से कैसे संबंध हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनकी बेटी की शादी के उपलक्ष्य में वीके शर्मा ने नोएडा के यूनिटेक क्लब में एक शानदार काकटेल पार्टी दी थी। यूनिटेक क्लब के इस पार्टी के लिए जो कार्ड छपा था, उसमें बतौर RSVP वीके शर्मा का नाम था।
अब देखना है कि ऐसे रसूखदार पत्रकार से पूछताछ करने की हिम्मत सीबीआई जुटा पाती है या नहीं, यह तो समय बताएगा। लेकिन इस घटना ने मीडिया जगत को एक बार फिर नंगा कर दिया है।
उंचे पदों पर काबिज लोग इस नोबल प्रोफेशन की आड़ में जो कर रहे हैं उसने देश के चौथे स्तंभ की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है। तभी तो पत्रकारों के साथ नेताओं द्वारा मारपीट, गाली गलौज की घटनाएं आम होती जा रही हैं। नेता व अधिकारी पत्रकारों को भाव देने से कतराने लगे हैं।

लेखक संदीप ठाकुर दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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