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वर्णिका कुंडू के पिता को है बेटी के खिलाफ 'षड्यंत्र' का भय

August 10, 2017 07:50 PM

पिता ने दी बेटी को नसीहत बाजार में सतर्क रहे

बेटी बचाओ का नारा देने वाले किसे बचा रहे हैं?

साभार : न्यूज़ इंडिया ट्रस्ट

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेता जब स्वयं अपनी औलाद को ही ये नहीं सिखा सकते कि बेटियों की इज्ज़त कैसे की जानी चाहिए तो फिर उनसे दूसरे लोगों को नैतिक शिक्षा देने की उम्मीद  कैसे की जा सकती है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेता जब स्वयं अपनी औलाद को ही ये नहीं सिखा सकते कि बेटियों की इज्ज़त कैसे की जानी चाहिए तो फिर उनसे दूसरे लोगों को नैतिक शिक्षा देने की उम्मीद  कैसे की जा सकती है। गत दिनों चंडीगढ़ में हरियाणा के भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर एक आइएएस अधिकारी वीरेंद्र कुंडू की बेटी वर्णिका कुंडू से न केवल छेड़छाड़ की बल्कि उसका दूर तक पीछा करके अपहरण की कोशिश भी की। ज़ाहिर है भाजपा की नेकचलनी की बातें हकीकत से कोसों दूर हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने पहले महज लीपापोती की जब महिला संगठनों और आम आदमी पार्टी का दबाव पड़ा तो आरोपियों का गिरफतार किया गया, ज़ाहिर है सत्ता का दबाव अपना काम कर रहा था। अब भले ही सुभाष बराला ये कहीं कि पीडि़त लडक़ी उनकी बेटी जैसी है लेकिन ये कहने से उनके बेटे के चरित्र के दाग धुलेंगे नहीं। 

दुखद बात है कि पीडि़त लडक़ी के पिता एक आइएएस अधिकारी कुंडू ने यहां तक कह दिया कि शुक्र है कि सौभाग्य से घटना चंडीगढ़ पुलिस के दायरे में घटी, कहीं भाजपा शासित हरियाणा में हुई होती तो उनके आइएएस होने के बावजूद न्याय मिलना असंभव हो जाता। 

ये कितनी दुखद बात है कि पीडि़त लडक़ी के पिता एक आइएएस अधिकारी कुंडू ने यहां तक कह दिया कि शुक्र है कि सौभाग्य से घटना चंडीगढ़ पुलिस के दायरे में घटी, कहीं भाजपा शासित हरियाणा में हुई होती तो उनके आइएएस होने के बावजूद न्याय मिलना असंभव हो जाता। उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर अब सुभाष बराला से कोई बात नहीं करना चाहते इसलिए जब वे चार अगस्त की रात को सेक्टर 26 के थाने में एफआईआर लिखवा रहे थे तो उन्होंने  सुभाष का फोन ही नहीं उठाया। दुखी पिता ने अब अपनी बेटियों को यहां तक कह दिया है कि वे जब बाहर जाएं तो चौकन्नी रहें क्यूंकि कोई भी कभी भी उनके पर्स में नशे का पैकट डालकर उन्हें पकड़वा सकता है। कुंडू ने कहा कि जब तक भाजपा सत्ता में हैं तब तक वे इस घटना को भूलेगी नहीं, मेरा ये कदम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, एक पार्टी के खिलाफ माना जाएगा इससे मेरे करियर पर प्रतिघात हो सकता है लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।

चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी टीएस लूथरा ने इस बीच मीडिया को बताया कि विकास बराला और उसके दोस्त आशीष को आईपीसी की धारा 365 (अपहरण की कोशिश) और धारा 511, जिसके तहत आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है, के तहत  गिरफतार किया गया है। ध्यान दें कि पहले पुलिस ने केवल आईपीसी की धारा 345 डी (छेड़छाड़) के तहत मामला दर्ज किया था। कुछ घंटों बाद धारा 341 और 185 (शराब पीकर गाड़ी चलाना) जोड़ दी गईं लेकिन ये ज़मानत योग्य धाराएं थी जिसके चलते उन्हें ज़मानत दे भी दी गई। बाद में महिला संगठनों व आम आदमी पार्टी ने वर्णिता कुंडू के पक्ष में देश भर में एक अभियान छेड़ दिया जिसके चलते पुलिस पर दबाव बना और आरोपी फिर से पकड़े गए। इसके बावजूद राजनीतिक दादागिरी दिखाते हुए आरोपियों ने गिरफ्तार  होने से पहले पुलिस को तीन घंटे तक इंतज़ार करवाया।

अब ज़रा भाजपा नेताओं के बयानों पर भी गौर करें। हरियाणा के भाजपा उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी ने एक चैनल पर कहा कि लड़कियों को रात के बारह बजे के बाद घर से बाहर निकलना ही नहीं चाहिए था। क्या यही है भाजपा की महिलाओं के प्रति नीति, क्या ये पार्टी इसी तरह महिलाओं को सुरक्षा देगी। यहीं बस नहीं, भाजपा प्रवक्ता  शायना एनसी तो युवति को पीडि़त ही नहीं मानतीं। वो तो कहती हैं कि विकास के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने सारी घटना को झूठ करार दिया है। शायना ने तो एक फोटो भी अपने ट्विटर  हैंडल पर डाली है जिसमें वो कहना चाहती हैं कि पीडि़त युवति तो विकास की दोस्त है जबकि पीडि़ता ने फोटो को सरासर झूठ बताया है। सवाल ये है कि बेटी बचाओ का नारा देने वाली सरकार आखिर बचा किसे रही है?

घटना कुछ इस तरह हुई कि युवति आधी रात के करीब सेक्टर 7 से होकर पंचकूला अपने घर जा रही थी कि सेक्टर 26 के पास विकास बराला ने उसकी कार को रोकने की कोशिश की। दो जगह वह कार से नीचे भी उतरा और युवति की कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की लेकिन सेंटर लॉकिंग होने के कारण दरवाज़ा नहीं खुला। लडक़ी ने इस बीच अपने मोबाइल से पुलिस को सूचित किया कि दो लडक़े उससे छेड़छाड़ कर रहे हैं, संभवत: वो अपहरण भी कर सकते हैं। पुलिस ने सूचना मिलने पर विकास और उसके दोस्त को गिरफतार तो किया लेकिन तत्काल छोड़ भी दिया। इस घटना की चहुं ओर निंदा हो रही है कि भारतीय जनता पार्टी अपने घर में ही नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा पा रही तो दूसरों को क्या सीख देगी।

इस घटना का एक दुखद पहलू ये भी है कि कड़ा एक्शन लेना तो एक तरफ भाजपा अपने कथित हितैषियों को भी शांत नहीं कर पा रही। उनके हितैषी घटना को मनघड़ंत बताकर युवति के बारे सोशल मीडिया पर अनाप शनाप लिख रहे हैं। हैरानी तो इस बात की भी है कि इस घटना को मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ एक सोची समझी साजि़श तक बताया जा रहा है। अंधे स्वामिभक्त किस हद तक गिर सकते हैं, ये ट्विटर , फेसबुक और व्हाट्स एप पर इन दिनों साफ देखा जा सकता है। भाजपा हितैषियों को लगता है कि मानो घटना हुई ही न हो और ये सब भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करने का नया तरीका हो।

भाजपा के एक समर्थक पी उमराव जो एक वकील हैं, ने सोशल मीडिया पर यहां तक लिखा कि ये कहानी दिल्ली की जसलीन कौर और रोहतक की दो बहनों जैसी है, मतलब फर्जी है। उसने टवीट किया कि लडक़ी का पिता जोकि एक आईएएस अधिकारी है, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा का समर्थक है इसीलिए उसने ईमानदार सीएम खटटऱ के खिलाफ ये चाल चली है। उसने तो यहां तक लिखा कि लडक़ी ने शराब पी रखी थी तो फिर उसका मेडीकल क्यूं नहीं करवाया गया। भाजपाई तो ये भी कह रहे हैं कि लडक़ी ने गाड़ी चलाते समय फोन का इस्तेमाल किया इसलिए उसे एक हज़ार रुपए जुर्माना करके मामला दर्ज किया जाना चाहिए। मतलब ये कि यदि किसी लडक़ी का कोई लडक़ा अपहरण करने की कोशिश करे तो पहले उसे गाड़ी साईड पर लगा देनी चाहिए फिर पुलिस को बुलाना चाहिए, ये है भाजपा समर्थकों की सोच।

इस बीच भाजपा समर्थक कानून को ताक पर रखकर और संविधान की मर्यादा को भंग करते हुए अपने मुख्यमंत्री  को दूध का धुला बताने पर तुल गए हैं। जैसा कि सब जानते हैं सीएम खटट्र को सीधे तौर पर किसी ने भी इस घटना के लिए जिम्मेवार  नहीं ठहराया, तो फिर उन्हें बचाने के लिए भाजपा का ये कूड़ प्रचार किस बात की ओर इशारा करता है? इस घिनौनी घटना की निंदा कर रहे हैं, हर सूझवान व्य1ित भाजपा नेताओं के वारिसों की अनुशासनहीनता और दबंगई को लेकर खफा हैं। ज़ाहिर है इससे समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल तो उठेंगे ही।

गौर करने वाली बात ये है कि लडक़ी ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया था कि चंड़ीगढ़ के सेक्टर 26  से आधी रात के समय एक एसचूवी में बैठे दो युवकों ने अपनी गाड़ी से उसकी कार को रोकने और उसका अपहरण करने की कोशिश की। भाजपा के अनायास दबाव के चलते केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने वाली चंडीगढ़ पुलिस ने विकास बराला के खिलाफ तीन अहम धाराओं 341, 365 और 511 को एक तरफ करके मामूली धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और 26 सेक्टर के थाने से ही उनकी ज़मानत भी करवा दी थी। दोनों को गिरफ्तार  किया गया भी दिखा दिया और तत्काल छोड़ भी दिया, ये सब सत्ता का दुरूपयोग नहीं तो और क्या है ?

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