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भ्रष्टाचार पर प्रहार

October 29, 2014 09:27 PM




                                                                                          ’’इति भ्रष्टाचार‘‘

माननीय प्रधानमंत्री जी,
आपको विक्रम चैधरी का सादर प्रणाम।                                                                                                                                दिनांक-25/10/14        
मान्यवर जी, स्वतत्रंता दिवस पर आपका भाषण बहुत अच्छा लगा। एक आम आदमी ने भी समझा कि प्रधानमंत्री ने क्या कहा अन्यथा वर्षो से एक आम आदमी की समझ में यह नही आ रहा था कि 26, जनवरी और 15,अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री कहता क्या है। सभी विषयों पर आप खुलकर बोले, स्पष्ट बोले। आपका जुमला अधिकारी/बाबू कहते है ‘‘मेरा क्या मुझे क्या’’ इसे आप समाप्त करेंगे। सुनकर बहुत अच्छा लगा परन्तु मान्यवर जी आपके पास ऐसा कौन सा अचूक शस्त्र है जो अधिकारी/बाबू की आत्मा से मेरा क्या मुझे क्या की भावना निकाल सके। यह असम्भव प्रतीत होता है। अलग-अलग प्रदेशो में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें, हर बात में विरोध, हर बात में टकराव ऊपर से जनता का पता नही कब नीचे उतार दे। जनता भी क्या करे उसे एक ओर कुंआ, दूसरी ओर खाई नजर आती हैं।

 मान्यवर जी जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है सभी प्रकार की प्रताड़नाओं अपराधो की ‘‘मूल’’ भ्रष्टाचार है। यह राक्षस पूरे देश की आत्मा को निगल रहा है। चोर राजा बन गये और ईमानदार भाड़ झोंक रहे हैं। इस राक्षस पर सभी शस्त्र बेकार साबित हो रहे हैं। सूचना अधिकार कानून अधिकारियों की जूती बनता जा रहा हैं और अन्त में सूचना आयोग में दम तोड रहा है। ‘‘लोकपाल आयोग भ्रष्टाचार मिटायेगा’’ क्या बिगाड़ लेगा लोकपाल भ्रष्टाचारियों का, क्या वह स्वर्ग से आकर बैठेगें कुर्सी पर क्या वह आर0टी0ओ0 के व्यक्तिगत टोकिन बन्द करा सकते हैं, जिस गाडी पर टोकिन होता है आर0टी0ओ0 उसे रोककर चैक नहीं करता। 15 टन क्षमता वाले ट्रक में 45 टन माल ढोया जाता है और जिस ट्रक पर टोकन नहीं होता उससे मात्र एक-दो कुन्तल पर भी मोटीे रिश्वत की मांग की जाती है न देने पर ट्रक को सीज़ कर देता है, साथ ही अनेक आपराधिक धाराएं भी लगा देता है। विरोध करने पर उसके सिपाही ड्राइवर को बुरी तरह मारते-पीटते हैं, परदेसी ड्राइवर बेचारा मार खाता रहता है और न करने वाली गलती की भी माफी मांगता रहता है। कमीनेपन की हद देखिए रिश्वत न देने पर खाली ट्रक को भी ओवरलोड में सीज कर दिया जाता है। क्या सेल्स टैक्स अधिकारी की चोरी रोकी जा सकती है जिसका पैसा खाया होता है उसके ट्रक रोक कर चैक नहींे करता, पूरे प्रदेश की छोडि़ए अकेले मेरठ में ही 30-40 ट्रक रोजाना सेल्स टैक्स की चोरी करके समान लाते हैं और वे ट्रक हवाई मार्ग से नहीं सड़क से आते हैं जनाब, और इन्हें सेल्स टैक्स अधिकारी ही निकलवाते हैं। कैसे रोकंेगे उस आबकारी अधिकारी को जो अवैध शराब से भरे ट्रकांे को नहीं रोकता, हरियाणा से मेरठ लायी गयी दो नम्बर की शराब के रोजाना कई ट्रक मेरठ आते हैं जिनकी सरेआम बिक्री होती है यह सब आबकारी अधिकारियों की मेहरबानी से होता है और स्थानीय पुलिस के संरक्षण में उसकी बिक्री होती है। कैसे रोकंेगे उस पुलिस अधिकारी को जो पैसा खाकर धारायें बढाता/घटाता है, पैसा मिलने के आधार पर कार्यवाही करने न करने का मन बनाता है, पैसा खाकर बडे़ अपराधियों के तलवे चाटता है, पैसे के लिए बेकसूर को थाने के लाॅकअप में बन्द कर बेरहमी से मारता पीटता है, किसी गरीब को विधवा, किसी को अनाथ बनाता है। पैसा खाकर दुनिया का घिनौने से घिनौना कार्य करने से भी पीछे नहीं हटता। कैसे पकडेंगे इन कमीने रिश्वतखारांे को जिन्होंने रिश्वत सीधे न लेकर दलाल नियुक्त कर दिये हैं।

 मान्यवर जी मैं ट्रांसपोर्ट व्यवसायी हूॅं मेरा यह व्यवसाय देश का ‘भ्रष्टाचार मापक यन्त्र’ है अर्थात आज ही के आज परिणाम बता सकता है कि देश में भ्रष्टाचार कहां कम हो गया और कहां बढ़ गया। सम्भव है कि आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा होगा परन्तु यह सत्य है। मैं उदाहरण देता हूॅं मान्यवर जी जिस दिन श्रीमान अरविन्द केजरीवाल जी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, मेरठ वापिस आकर ट्रक चालकों ने मुझे बताया कि आज दिल्ली में एक रू0 भी पुलिस खर्चा नहीं आया, किसी चैराहे पर पुलिस ने नहीं रोका, पैसे नहीं मांगे, मुझे उसी दिन पता चल गया कि आज दिल्ली में भ्रष्टाचार कम हो गया और जिस दिन उन्होंने इस्तीफा दिया उस दिन सभी पुलिस वालों ने अपना पिछला घाटा पूरा कर लिया अर्थात मुझे उसी दिन पता चल गया कि आज दिल्ली में भ्रष्टाचार बढ़ गया। दिल्ली में ही नहीं जनाब ट्रांसपोर्ट व्यवसायी पूरे देश में आज ही भ्रष्टाचार की स्थिति बता सकते हैं। कमाल की बात तो यह है मान्यवर जी, कि हमारे देश में खुलेआम सड़कांे पर भ्रष्टाचार बिखरा पड़ा है, पुलिस ,आर0टी0ओ0,सरेआम सड़कों पर ट्रकांे से वसूली करते हैं, क्या वह किसी को दिखाई नहीं देता। सभी को दिखाई देता है, कभी चम्बल में डकैत हुआ करते थे, आज देश के राज्यों के बाॅर्डर पर लगे हुए हैं। उदाहरण के रूप में अपना पड़ोसी राज्य हरियाणा का सोनीपत-बागपत (गौरीपुर) बाॅर्डर लीजिये, लूट-खसौट में सर्वोपरि, गुण्डांे की फौज के हवाले बाॅर्डर, सरेआम ड्राइवरांे से पैसा छीना जाता है, विरोध करने पर ड्राइवरांे को सड़क पर गिराकर सरेआम लात-घूंसे बजाए जाते हैं, लाठियां भांजी जाती हैं। हरियाणा ही नहीं जनाब देश के अन्य राज्यांे के बोर्डर का भी यही हाल है। 

 मान्यवर जी ट्रांसपोर्ट व्यवसायी सभी विभागों से जुड़े हैं, ट्रान्सफर हो या रिटायरमेंट सभी को हमारी आवश्यकता पड़ती है, दायी हैं हम हर पेट का हाल जानते हैं। एक सरकारी चपरासी भी रिटायरमेंट अथवा ट्रान्सफर लेकर जाता है तो उसका सामान देखकर हमारी आंखे खुली रह जाती है। कभी हम उसके सामान को देखते हैं तो कभी उसकी सैलरी के बारे में सोचते हंै। उसके ऊपर के तबके का क्या हाल हो सकता है बताने की आवश्यकता नहीं है। आप किसी भी विभाग को ले लीजिए सभी विभागांे का यही हाल है 100 में से 99 नहीं जनाब 100 के 100 बेईमान हैं।

मान्यवर जी यदि वास्तव में आप भ्रष्टाचार समाप्त करना चाहते हैं, इस भयंकर राक्षस का वध करना चाहते हैं तो इसे समाप्त करने का अधिकार जनता को दीजिए सरकारी तन्त्र को नहीं, थमा दीजिए जनता के हाथ में ऐसा शस्त्र जिसकी कोई काट न हो, जो मानव मस्तिष्क से परे हो जिसका निशाना अचूक हो अभेद्य हो, जनता को दीजिये किसी भी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्व भ्रष्टाचार निरोधक लाइ डिटैक्टर (पाॅलीग्राफ, नारको एनालाइसिस, ब्रेन मैपिंग आदि) टेस्ट कराने का अधिकार, जनता बताएगी कौन कितना बडा भष्टाचारी है। सरकारी अधिकारी/बाबू, जनता के नौकर हैं और जनता को यह अधिकार मिलना ही चाहिए कि वह अपने नौकर की प्रवृत्ति जाने परखें। ये नौकर ही सब कुछ बतायेंगे कि कौन सा माननीय कितना ईमानदार है और कितना बड़ा चोर, यही लाएगा ‘‘काला धन‘‘ वापिस, किसी भी क्षेत्र को ले लीजिए मुझे उसमें दुनिया के सामने पिछड़ने का कोई कारण नजर नहीं आता यदि भ्रष्टाचार न हो। हमारे देश में 968 करोड़ स्टेडियम के नाम पर उड़ा दिये जाते हंै यदि यही पैसा खिलाडि़यों पर खर्च किया जाता तो आज चीन के सामने हमें शर्मिंदा न होना पड़ता। चीन पदक ऐसे ले जाता है जैसे झाड़ू लगाकर एकत्र किए हों। हम शर्मिंदा हंै परन्तु इन भ्रष्टाचारियों को शर्म नहीं आती।

मान्यवर जी देश के प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार प्राप्त होना चाहिए कि वह किसी भी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी का एन्टी क्रप्शन लाई डिटेक्टर टेस्ट करा सके, जिससे उस पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपांे की पुष्टि अथवा खारिज किया जा सके यदि वह भ्रष्टाचारी निकले तो उससे टेस्ट की फीस वसूली जाए और उसे नौकरी से निकाल उसका बचत फण्ड और भविष्य में मिलने वाली सभी सुविधायें जब्त कर मुकदमा चलाया जाए और सजा दी जाए। बस इसके बाद ’’इति भ्रष्टाचार‘‘ और मेरा देश पुनः सोने की चिडि़या, सारी दुनिया एक तरफ, मेरा देश एक तरफ। इन भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथों पकड़वाना आसान नहीं है प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि शिकायतकर्ता का दम निकल जाता है और पकड़ने वाले ही कौन से दूध के धुले हैं आसानी से तैयार ही नहीं होते। और यदि कोई अपनी जान की बाजी लगाकर किसी भ्रष्ट को पकड़वाता भी है तो अन्तोगत्वा वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाता है। मैंने एक बार पुलिस के दरोगा को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़वाया था, उसे पकड़वाने के लिए मैंने अत्यधिक मानसिक दबाव झेला था यदि पूरी प्रक्रिया बताऊ तो एक किताब लिख जाए। मैं तो बस उसका दुखद अंत आपको बता देता हूं। सबकुछ मेरे पक्ष में था, मेरे सामने उस जज ने विपक्षी वकील पर टिप्प्णी करते हुए कहा था छोडि़ए वकील सहाब बहस खत्म कीजिए गवाह होस्टाइल नहीं है। अर्थात उसके कथन अनुसार सबकुछ मजबूत है। परन्तु जब पता चला कि दरोगा बरी हो गया तो जमीन निकल गई नीचे से। जब मैंने जानकारी ली और पूछा कि कैसे छूट गया तो जवाब मिला जनाब ‘‘जिसे लेते हुए पकड़ा गया था उसे ही देकर छूट गया’’ और आज सालों बीत गये है न तो किसी ने मुझे सूचित किया कि क्या हुआ और न ही आज तक मेरे रिश्वत में दिये रूपये लौटाये गये। जहां कि न्यायपालिका तक भ्रष्ट हो वहां कैसे भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है आप कमजोर नींव पर बुलंद इमारत के सपने देख रहे हैं। मान्यवर जी, चलिये यहीं से नींव बुलन्द करने की शुरूआत करते है, कराइये मेरा, उस दरोगा का, उस जज का लाई डिटक्टर टेस्ट और कराइये दूध का दूध और पानी का पानी। उक्त टैªप पूर्ण सत्य था परन्तु भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। मैं उक्त टैªप की सत्यता प्रमाणित करने के लिए अपने आप को लाइ डिटैक्टर टैस्ट के लिए प्रेषित करता हूँ व टैस्ट का खर्चा भी वहन करने के लिए तैयार हूँ।
मान्यवर जी यदि आप देश को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं कर पाये तो आने वाले समय में भ्रष्ट अधिकारी, भ्रष्ट नेता देश को बेचकर खा जायेंगे, बस कुछ ऐसा कर डालिये कि सारी दुनिया हमारी ओर देखे, हम उनकी ओर नहीं अर्थात ’’जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट, जीरो क्रप्शन‘‘। अतः आपसे मेरी विनम्र प्रार्थना हैं कि निम्नलिखित माँगो को स्वीकार करे एवं निष्पादन हेतु आदेश पारित करें:

1. ’’एन्टी क्रप्शन लाइ डिटैक्टर टेस्ट’’ कानून बने।
सूचना अधिकार अधिनियम का विस्तार करें (सूचना न देने पर जन सूचना अधिकारी पर दण्ड सुनिश्चित हो, दण्ड हो इतना अधिक कि बेहतर समझें नौकरी छोडकर जाना, प्रथम अपीलीय अधिकारी पर भी सूचना उपलब्ध न करा पाने/सूचना न देने/सूचना अधिकारी के विरुध कार्यवाही न करने/सूचना अधिकारी के विरुध कार्यवाही की स्तुति न करने पर दण्ड प्रक्रिया सुनिश्चित हो, सूचना आयुक्त के विरुद्ध भी दण्ड प्रक्रिया/अपील का प्रावधान हो)।
2. एन्टी क्रप्शन संस्थानों में शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत के संबंध में सूचना प्राप्त करने/ आपत्ति करने/ अपील करने का सीधा अधिकार प्राप्त हो।

भारत देश का शुभचिन्तक
विक्रम चैधरी
743, ब्रह्मपुरी, मेरठ।
मो0-9319309584

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