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बिहार की नई सरकार के 78 फीसदी मंत्री हैं अपराधी तो इसे अपराधियों की सरकार कह सकते हैं ?

August 05, 2017 10:34 AM

हत्या, जबरन वसूली, चोरी, ठगी जैसे मामलों में संलिप्त हैं 22 मंत्री
शोर 33 फीसदी का लेकिन महिलाओं को मात्र 3 फीसदी प्रतिनिधित्व
जब किसी सरकार में स्वयं मंत्री ही भ्रष्ट हों या फिर उनके खिलाफ अदालतों में आपराधिक मामले चल रहे हों तो फिर प्रदेश के आम लोगों से कैसे उम्मीद की जाए कि वो कानून का पालन करेंगे। ये जानकर ताज्जुब होता है कि बिहार में पाला बदल सरकार के 76 फीसदी मंत्री अपराधी हैं। अपने अपराधों को इन्होंने स्वयं ही स्वीकार किया है। इनके द्वारा दायर किए गए हलफनामों को खंगालने के बाद एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्मस) ने खुलासा किया है कि इस बार की सरकार में पहले से ज्यादा मंत्री अपराधी व भ्रष्ट हैं। कुल 22 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं जबकि 9 मंत्रियों के खिलाफ तो गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। नीतीश कुमार ने जैसे तैसे सरकार तो फिर से बना ली लेकिन लोगों में अपनी छवि बनाने में नाकामयाब रहे हैं। 

बिहार में कह सकते हैं कि यहाँ लोकतंत्र एक अपावन गठबंधन के तहत अपराधियों के हाथों की पूरी तरह कठपुतली बन गया है.


हालांकि नीतीश कुमार ने पहली सरकार से इस्तीफा इसलिए दिया था कि वो उप मुख्यमंत्री तेजस्वी को अपराधी व भ्रष्ट मानते थे और उसे बाहर निकालना चाहते थे। अब इस स्थिति को क्या कहें कि अब उनकी सरकार में पहले से ज्यादा अपराधी जुड़ गए हैं। एडीआर के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री सहित 29 मंत्रियों के शपथपत्रों से जाहिर है कि उनमें से 22 मंत्री यानि कुल 76 फीसदी अपराधी हैं। नीतीश कुमार की पिछली सरकार में 19 मंत्री अपराधी थे यानि सरकार के 68 फीसदी मंत्री अदालतों के चक्कर काट रहे थे। अब ये प्रतिशत और बढ़ गया है। खुद को मिस्टर क्लीन कहने वाले मुख्यमंत्री का लगभग सारा ही कुनबा अपराधियों की श्रेणी में है, जाहिर है अब बिहार का खुदा ही हाफिज है।
लालू प्रसाद का ये कहना कि नीतीश कौन सा दूध के धुले हैं अब सही नज़र आता है। और ये भी जाहिर है कि बिहार की सरकार में शामिल लगभग सभी पार्टियों के मंत्री अपराधी हैं। इस स्थिति में किसी एक पार्टी की आलोचना करना भी गलत है क्योंकि राजनीति के इस हमाम में लगभग सभी नंगे हैं। जनता दल यू (जेडीयू) जिस पार्टी से स्वयं मुख्यमंत्री हैं के दो मंत्रियों पर आईपीसी की धारा 307 यानि हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं इसी दल के एक मंत्री के खिलाफ हत्या यानि दफा 302 के तहत मामले दर्ज हैं। इनके खिलाफ आईपीसी की अन्य धाराएं 300, 303, 304, 304ए, 305, 306 और 308 भी आयद की गई हैं। जाहिर है ये बहुत ही संगीन किस्म के अपराध हैं और ऐसा अपराधी नीतीश सरकार का हिस्सा हंै।
जेडीयू के ही दो और मंत्रियों के खिलाफ खतरनाक हथियारों से हमला करने और कुछ लोगों को घायल करने के खिलाफ आईपीसी की धारा 321, 322, 323, 324, 325, 326, 327, 328, 329, 330, 331, 332, 333, 334 और 335 के तहत मामले दर्ज हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी कैसे पीछे रह सकती है। भाजपा के भी दो मंत्रियों के खिलाफ ऐसे ही मामलों में इन्हीं धाराओं के खिलाफ मामले दर्ज हंै। ऐसे में भाजपा की विचारधारा और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार उन्मुलन के सभी दावे हवा में तैरते नज़र आते हैं। अभी हाल ही में अपने मन की बात में देश से अपराध को बाहर निकाल फेंकने का अहद करने वाले प्रधानमंत्री को क्या इन मंत्रियों को बाहर निकालने की सिफारिश नहीं करनी चाहिए ?
हत्या और हत्या के प्रयास जैसे मामलों के तहत जितने ही संगीन अपराध यानि डकैती, जबरन धन वसूली, चोरी और धोखाधड़ी जैसे मामलों में भी जेडीयू का एक मंत्री शामिल है। इसके खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 411 आदि लगाई गई हैं। इतना ही नहीं जेडीयू के दो और भाजपा का एक मंत्री चोर भी है। इन तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 378, 379, 380, 381 और 382 के तहत मामले अदालतों में चल रहे हैं। वित्तीय घोटालों में जेडीयू के दो मंत्री अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। यहां तक कि जेडीयू वाले तो महिलाओं को भी नहीं बख्शते। ऐसे ही एक मामले में एक मंत्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 366 ए, 304बी, 498, 509 और 313 के तहत मामले दर्ज हैं। इन मामलों के अतिरिक्त और भी कई मामले जेडीयू और भाजपा के मंत्रियों के खिलाफ देश की विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं।
बिहार के मंत्री न केवल अपराधी या बाहुबली हैं बल्कि धन धान्य से भी भरपूर हैं। ऐसे में उनका उदद्ंड होना स्वाभाविक भी है। कुल 29 मंत्रियों में से 21 मंत्री करोड़पति हैं। कहा जा सकता है कि सरकार के 72 फीसदी मंत्रियों के पास करोड़ों की संपत्ति है जिसकी औसत 2.46 करोड़ आंकी जा रही है। लक्ष्मीराय विधानसभा क्षेत्र के विधायक, मंत्री विनय कुमार सिन्हा के पास 15.64 करोड़ की संपत्ति है। इनके अतिरिक्त मुजफ्फरपुर से विधायक सुरेश कुमार शर्मा, मुंगेर से विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह भी करोड़पति मंत्रियों की फेहरिस्त में शुमार हैं।
उस सरकार का क्या कहना जिसमें आज भी आठवीं या बारहवीं पास मंत्री बने हों। बिहार की सरकार में ऐसे मंत्रियों की संख्या 9 है। जहां तक महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का सवाल है तो इन 29 मंत्रियों में से केवल 1 ही महिला मंत्री है। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का ढिंढोरा पीटने वाली भारतीय जनता पार्टी जिस सरकार का हिस्सा है वहां महिलाओं को मात्र 3 फीसदी प्रतिनिधित्व दिया गया है। ऐसे में सरकार के इरादों का अंदाजा लगाना सहज है।

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