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पंजाब में नशा और लूट सरकार सब जानती है फिर भी खामोश, यहाँ दाल में काला नहीं, दाल ही काली है

August 04, 2017 10:59 PM

हत्यारे सरगर्म, पुलिस विवश, सरकार बुरी तरह फेल
ये हाल तब है जब राज्य के मुख्यमंत्री के पास ही है गृह मंत्रालय
ए.के.के.ब्यूरो
पंजाब में कानून व्यवस्था दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। हालात यहां तक हो गए हैं कि न केवल पंजाब वासी बल्कि अनिवासी भारतीय भी जुर्म का शिकार होते जा रहे हैं। कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता जब पंजाब में होने वाला क्राइम देश विदेश का ध्यान अपनी ओर न खींचता हो। विरोधी पार्टियां जहां राज्य में कानून की दुर्व्यवस्था के लिए सत्ताधारी कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराते हुए तत्काल उपाय की मांग कर रही हैं वहीं सबसे बड़ी विरोधी पार्टी, आम आदमी पार्टी ने इन हालात को राज्य में जंगल राज की संज्ञा दी है। आप ने मांग की है कि ऐसे में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को चाहिए कि वे प्रदेश के गृह मंत्री का कार्यभार अपने पास न रखकर तत्काल किसी ऐसे व्यक्ति को सौंप दें जो इन हालात को काबू करना जानता हो। 

 बादल सरकार के दौरान भी हत्यारे और अन्य किस्म के आरोपी खुले घूमा करते थे और आज भी घूम रहे हैं। पहले सुखबीर बादल नहीं संभाल पाए और आज कैप्टन नहीं संभाल पा रहे हैं पंजाब की कानून व्यवस्था को। यहां तक कि केंद्र में मोदी सरकार के इशारों पर काम करने वाला विभाग सीबीआई भी केवल हवा में तीर मार रहा है जबकि प्रदेश की सांप्रदायिक सद्भावना दांव पर लगी हुई है। 


पंजाब में धार्मिक नेताओं एवं धर्मोपदेशकों पर निरंतर हमले हो रहे हैं जिससे सारा देश हैरान है। हाल ही में लुधियाना में एक ईसाई पास्टर की हत्या इसकी ताजा मिसाल है। राज्य में धर्म प्रचारक ही सुरक्षित नहीं हैं और यदि ऐसा संदेश बाहर जाएगा तो जाहिर है कि सरकार की कार्यशैली पर सवाल तो उठेंगे ही। इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के प्रधान भगवंत मान ने कहा है कि अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को चाहिए कि वो गृह विभाग की जिम्मेवारी किसी दूसरे और सही मंत्री को सौंप दें क्योंकि पंजाब की जनता इससे ज्यादा सहन नहीं कर सकती। उन्होंने कैप्टन को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि कैप्टन को चाहिए कि वो अपनी आरामपरस्ती की शैली को त्याग कर जनता की सुरक्षा की सोचें। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात बताते हैं कि राज्य की कानून व्यवस्था पर कैप्टन की पकड़ बहुत ढीली हो गई है।
आम आदमी पार्टी के पंजाब इकाई के उप प्रधान अमन अरोड़ा ने इस बीच कहा है कि पिछली अकाली भाजपा सरकार में राज्य का गृह विभाग प्रदेश के मुख्य मंत्री स. प्रकाश सिंह बादल के बेटे और प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के पास था। सुखबीर बादल आम जनता की सुरक्षा की बजाए सत्ता के जरिए अपना व्यवसाय बढ़ाने की ओर ज्यादा ध्यान देते रहे। इससे हुआ ये कि प्रदेश में कभी पावन श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान हुआ तो कभी पवित्र ग्रंथ गीता और कुरान का। यहीं बस नहीं कभी नामधारी धर्म की गुरुमाता चंद कौर कभी रणजीत सिंह ढडरीयांवाला पर हमला हुआ तो कभी अन्य सामाजिक संस्थाओं के नेताओं पर हमले हुए। अपराध का ये सिलसिला आज कांग्रेस के कार्यकाल में भी थमने का नाम नहीं ले रहा। अरोड़ा ने कहा कि सरकार इस कदर निकम्मी है कि जो आरोपी हैं, दोषी हैं, सरकार उनको तो पकड़ नहीं पाती उल्टा दावे ये किए जा रहे हैं कि दोषियों को बहुत जल्द सजा मिल जाएगी।
यहां ये भी ध्यान देने योग्य है कि बादल सरकार के दौरान भी हत्यारे और अन्य किस्म के आरोपी खुले घूमा करते थे और आज भी घूम रहे हैं। पहले सुखबीर बादल नहीं संभाल पाए और आज कैप्टन नहीं संभाल पा रहे हैं पंजाब की कानून व्यवस्था को। यहां तक कि केंद्र में मोदी सरकार के इशारों पर काम करने वाला विभाग सीबीआई भी केवल हवा में तीर मार रहा है जबकि प्रदेश की सांप्रदायिक सद्भावना दांव पर लगी हुई है। लुधियाना में पास्टर सुल्तान मसीह की हत्या इस बात का सबूत है कि सरकार सो रही है। उधर राज्य के डीजीपी सुरेश अरोड़ा मामले को ये कहकर हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं कि नामधारी संप्रदाय की गुरुमाता चंद कौर, पास्टर सुल्तान मसीह और आरएसएस नेता गगनेजा के हत्यारों के बीच कुछ न कुछ संबंध जरूर है। यदि ऐसा है भी तो वो दिन कब आएगा जब हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे और आम जन को ये अहसास होगा कि अब वे सुरक्षित हैं।
क्राईम लेखा जोखा संक्षेप में
- गत शनिवार को लुधियाना में ईसाई पास्टर सुल्तान मसीह की दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों ने की हत्या।
- इसी वर्ष के शुरुआत में 21 जनवरी को एक पंद्रह वर्षीय छात्र ने अपने सहपाठी को मारकर उसके टुकड़े कर दिए।
- चंद रोज पहले फिरोजपुर में दो युवकों लखविंद्र सिंह और बेअंत सिंह को गोली से उड़ा दिया गया।
- मार्च माह में मोहाली में एक युवक को मारकर उसकी लाश सूटकेस में डालकर एक गाड़ी में छोड़ दी गई।
- मार्च माह की ही बात है जब जालंधर के भोगपुर क्षेत्र में एक 65 वर्षीय एनआरआई महिला सुरिंदर कौर का कत्ल कर दिया गया। वह कुछ दिन पहले ही कनाडा से आई थी, ये इस क्षेत्र में इस तरह का तीसरा गंभीर मामला था।
दावे प्राप्तियों के
राज्य सरकार कभी कभार चोरों, स्मगलरों और असामाजिक तत्वों को पकड़ने के दावे भी करती रहती है लेकिन इन दावों की सच्चाई उस समय काफूर हो जाती है जब पकड़े गए आरोपी न्यायालय से साफ बच निकलते हैं।
दो दिन पहले अमृतसर की स्पेशियल टास्क फोर्स ने जग्गू गैंगस्टर को जेल में ही बैठकर नशा स्मगल करने के दोष में पकड़ा, मजेदार बात ये कि जग्गू एक अकाली सरपंच का रिश्तेदार है। उससे आधा किलो हेरोइन भी बरामद की गई है। अब उसका संबंध पाकिस्तान से बताया जा रहा है। सवाल ये है कि यदि जग्गू जेल में बैठकर भी नशा बेच सकता है तो ये कसूर किस का है, जग्गू का या फिर सरकार?

 

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