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प्रधानमंत्री कार्यालय ने एम्स के 7 हज़ार करोड़ के घोटाले को दबाया, स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी दी क्लीन चिट

June 21, 2017 10:14 PM
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत बीजेपी शासित केंद्र सरकार आख़िर क्यों दबा रही है एम्स का 7 हज़ार करोड़ का घोटाला: AAP
बीजेपी सरकार के घोटालों को दबाकर बीजेपी के राजनीतिक विरोधियों के पीछे पड़ी हैं केंद्र सरकार की एजेंसियां : AAP
 
बीजेपी शासित केंद्र सरकार के घोटालों को तो दबाया जा रहा है और केंद्र सरकार की एजेंसियां बीजेपी के राजनीतिक विरोधियों के पीछे पड़ी हैं। एम्स के 7 हज़ार करोड़ के घोटाले के आरोप झेल रहे एम्स के उपनिदेशक विनीत चौधरी को बड़ी ही चालाकी से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा बचा ले गए और उन्हें क्लीन चिट दे दी। गज़ब की बात यह है कि इस घोटाले के मामले में क्लीन चिट देने में प्रधानमंत्री कार्यालय का भी योगदान रहा। इस घोटाले के आरोप झेल रहे अफ़सर विनीत चौधरी को ना केवल बचाया गया है बल्कि इस मामले की जांच खोलने वाले अफ़सर एम्स के पूर्व सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को इस जांच से अलग किया गया और उन्हें नौकरी में भी परेशान किया गया।
 
 इस मुद्दे पर पार्टी कार्यालय में प्रैस कॉंफ्रेंस करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि ये पूरा देश देख रहा है कि कैसे केंद्र सरकार की एजेंसियां बीजेपी की विरोधी पार्टियों के नेताओं पर छापेमारी कर रही हैं और उन्हें फ़र्जी केस में फंसाया जा रहा है और दूसरी तरफ़ बीजेपी नेताओं के घोटालों को दबाया जा रहा है। एम्स में 7 हज़ार करोड़ का घोटाला हुआ और इस घोटाले के आरोप झेल रहे एम्स के उपनिदेशक विनीत चौधरी को बीजेपी नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा बड़ी ही चालाकी से बचा ले गए। एम्स के इस घोटाले में यह क्लीन चिट प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन आने वाले कार्मिक मंत्रालय ने भी दी है और जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी और वो भी बाकायदा एफ़िडेविट देकर।
 
 आपको बता दें कि एम्स में 7 हज़ार करोड़ के घोटाले का आरोप झेल रहे उपनिदेशक विनीत चौधरी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता जे पी नड्डा के बड़े करीबी हैं। साल 1998 से लेकर 2003 तक हिमाचल प्रदेश सरकार में जब जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री रहे तो विनीत चौधरी जे पी नड्डा के मंत्रालय में स्वास्थ्य सचिव के पद पर रहे। एम्स में आने के बाद विनीत चौधरी पर 7 हज़ार करोड़ के घोटाले का आरोप लगा और इस मामले की जांच को खोला एम्स के सीवीओ संजीव चतुर्वेदी ने। बतौर सांसद जे पी नड्डा ने कांग्रेस सरकार के वक्त संजीव चतुर्वेदी को इस जांच से अलग करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखे और एक बार बीजेपी की सरकार के आने के बाद पत्र लिखा। तकनीकी आधार पर संजीव चतुर्वेदी की अप्वाइंटमेंट को ग़लत बताया गया और चतुर्वेदी को हटाने के लिए अनुरोध किया।
 
जब संजीव चतुर्वेदी की अप्वाइंटमेंट को संसद की स्टैडिंग कमेटी ने सही ठहराया और फिर स्वास्थ्य सचिव ने भी सही ठहराया तो जेपी नड्डा ने अपने पत्ते फेंके और खुद स्वास्थ्य मंत्री बनकर आ गए। केंद्र की बीजेपी सरकार ने डॉक्टर हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्रालय से हटा कर दूसरी जगह भेज दिया और स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान ही जे पी नड्डा के हाथ में दे दी। जब यह मामला मीडिया में आया तो जे पी नड्डा ने इस मामले से अपने आप को अलग करते हुए यह मामला कार्मिक मंत्रालय को दे दिया जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन आता है। अब मज़े की बात यह है कि भ्रष्टाचार को लेकर तथाकथित ज़ीरो टॉलरेंस वाली केंद्र सरकार ने 7 हज़ार करोड़ के घोटाले को दबा दिया है जिसे सीबीआई, प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन आने वाला कार्मिक मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय ने मिलकर अंजाम दिया है। एम्स के उपनिदेशक विनीत चौधरी को क्लीन चिट देकर बचा लिया गया है।
 
आम आदमी पार्टी पूछना चाहती है कि आख़िर प्रधानमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और जेपी नड्डा साहब की ऐसी क्या मजबूरी है कि वो 7 हज़ार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप झेल रहे एम्स के उपनिदेशक विनीत चौधरी को बचा रहे हैं और इस बड़े घोटाले को दबा रहे हैं। जबकि दूसरी तरफ़ पूरा देश देख रहा है कि बीजेपी के राजनीतिक विरोधियों पर आए दिन सीबीआई छापा डाल रही है और विरोधी पार्टियों के नेताओं को फ़र्ज़ी मुकदमों में फंसाया जा रहा है। केंद्र में बैठी बीजेपी को इसका जवाब देना चाहिए।
 
यूपीए सरकार के वक्त इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी लेकिन पिछले 3 साल के बीजेपी सरकार के काल में इस जांच में कोई प्रगति नहीं हुई, कोर्ट को सीबीआई ने बताया कि हैल्थ मिनिस्ट्री और कार्मिक मंत्रालय उन्हे जांच के लिए ज़रूरी कागज़ात ही मुहैय्या नहीं करवा रहा है जिसकी वजह से जांच आगे नहीं बढ़ पाई। हमारा मानना है कि यह जांच ना करने का एक बहाना मात्र है।
 
 
 
 
 
 
 
 
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