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कैप्टन व कैप्टन के मंत्रियों को नहीं दी जाएगी पंजाब में लूट की छूट

May 30, 2017 10:01 PM

मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह से  मुलाकात करने जा रहे आम आदमी पार्टी और लोक इन्साफ पार्टी के विधायकों को पुलिस ने विधान सभा के गेट पर ही गिरफ्तार  कर लिया। यह विधायक रेत खनन में हुए भ्रष्टाचार के मामले में राणा गुरजीत सिंह को पद से हटाने की मांग कर रहे थे। 

सूबा प्रधान और संगरूर से एमपी भगवंत मान ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अकाली नेता पंजाब में रेत, भू-माफिया और ट्रांसपोर्ट के माफिया के लिए मशहूर थे और अब कांग्रेसी नेताओं ने उनको भी पिछे कर दिया है।

आम आदमी पार्टी के विधायक विधान सभा में विपक्ष के नेता एच.एस. फूलका, पार्टी प्रधान और संगरूर से एमपी भगवंत मान, सीनियर नेता और एम.एल.ए. सुखपाल सिंह खैरा, पार्टी के सह-प्रधान अमन अरोड़ा के नेतृत्व में राणा गुरजीत के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.  गिरफ्तार करने के बाद विधायकों को सैक्टर 17 के पुलिस स्टेशन में लाया गया और घंटों गिरफ्तारी के बाद उनको रिहा कर दिया गया। उधर आम आदमी पार्टी के विधायकों ने थाने में आए मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के ओएसडी को मांग पत्र देने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री के पास चुने हुए विधायकों को मिलने का समय नहीं है तो उनके सलाहकार को मांग पत्र देना एक दिखावा मात्र ही होगा। 
    पत्रकारों को संबोधन करते हुए फुलका ने कहा कि इस समय पंजाब में एमरजैंसी जैसे हालात बने हुए हैं और यहां तक कि विरोधी पक्ष के नेता और विधायकों को भी मुख्यमंत्री को मिलने की मनाही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायकों को लोगों की आवाज बुलंद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। फूलका ने कहा कि इसके स्पष्ट प्रमाणित होता है कि राणा गुरजीत सीधे तौर पर रेत के खदानों को नाजायज हथियाने के लिए जिम्मेदार हैं तथा अमरिन्दर सिंह उनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने से बच रहे हैं। फूलका ने कहा कि इस मामले में कैप्टन अमरिन्दर सिंह की चुप्पी यह सिद्ध करती है कि राणा गुरजीत के साथ कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी गलत ढंग से दिए खड्डों के मामले में शामिल हैं। 
    सूबा प्रधान और संगरूर से एमपी भगवंत मान ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अकाली नेता पंजाब में रेत, भू-माफिया और ट्रांसपोर्ट के माफिया के लिए मशहूर थे और अब कांग्रेसी नेताओं ने उनको भी पिछे कर दिया है। अकालियों को जेल में फेंकने के दावे करने वाले कैप्टन अमरिन्दर सिंह अब अपने मंत्री के खिलाफ कार्यवाही करने से पीछे हट रहे हैं। मान ने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह बादलों के अत्याचारों के खिलाफ बोलते रहे हैं परंतु सत्ता प्राप्ति के बाद वह भी उनके नक्शे कदम पर चलने लग पड़े हैं। मान ने कहा कि अगर कैप्टन अमरिन्दर सिंह के पास कोई ऐसा फार्मूला है जिस के साथ कि एक खाना बनाने वाला बावरची करोड़ों रुपए कमा सकता है तो उनको यह फार्मुला नौजवानों को बताना चाहिए जिससे वह भी बेरोजगारी से बाहर निकल सकें। 
    सुखपाल खैरा ने कहा कि इस मामले में रिटायर जस्टिस नारंग की अध्यक्षता में बनाऐ जुडीशिअल कमीशन का कोई मतलब नहीं है क्योंकि जस्टिस नारंग के राणा परिवार के साथ सीधे सम्बन्ध हैं। इस कारण वह उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित  है कि जस्टिस नारंग के सुपुत्र राणा परिवार के वकील हैं और वह राणा परिवार के पास केस लडऩे के लिए फीस लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह किस तरह हो सकता है कि जो व्यक्ति मंत्री के इतना करीबी हो वह किस प्रकार इस केस को हल करेगा। उन्होंने कहा कि राणा परिवार के बावरची ने माइनिंग के ठेके लेने के लिए 26 करोड़ रुपए जमा करवाए हैं जबकि उसकी सालाना आमदन सिर्फ 90 हजार रुपए है। उन्होंने कैप्टन अमरिन्दर सिंह से पूछा कि ऐसी कौन सी बात है जो कैप्टन अमरिन्दर सिंह को राणा के खिलाफ कार्यवाही करने से पीछे खींच रही है। 
    अमन अरोड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी सूबे में हो रही कुदरती श्रोतों की लूट को बरदाश्त नहीं करेगी और उन्होंने कहा कि जब तक राणा गुरजीत को मंत्री पद से नहीं हटाया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंनेचेतावनी दी कि आम आदमी पार्टी इस संघर्ष को पूरे सूबे में ले जाने के लिए मजबूर होगी। 
    आम आदमी पार्टी के नेता इन्फोर्समेंट डायरैक्टरेट, इनकम टैक्स और अन्य सम्बन्धित विभागों में भी मामले की शिकायत करेंगे। इस के बाद आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल जल्द माननीय राज्यपाल के साथ भी मुलाकात करेगा।      

पंजाब सरकार में बग़ैर हाईकमान की सहमति के नहीं हो सकता खनन का घोटाला

 पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में बिजली एंव सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं और आम आदमी पार्टी मंत्री गुरजीत सिंह के तुरंत इस्तीफ़े की मांग करती है। ये वही कांग्रेस पार्टी है जो चुनाव से पहले अकाली दल के खनन माफ़िया, केबल माफ़िया, ट्रांसपोर्ट माफ़िया को जेल भेजने की बात करती थी लेकिन अब खुद सरकार में आकर पहली तिमाही से ही भ्रष्टाचार करने में जुट गई है। पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने अपने नौकर और अपने निजी कर्मचारियों के नाम पर बालू रेत के टेंडर अलॉट कराए हैं जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला बनता है। जब आम आदमी पार्टी के पंजाब के विधायकों ने इस भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया तो आप के सभी विधायकों को विधानसभा के गेट से ही गिरफ्तार कर लिया गया।
 
इस मुद्दे पर प्रैस कॉंफ्रेंस करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस को सरकार में आए अभी जुम्मा-जुम्मा 3 महीने भी नहीं हुए हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार करना शुरु भी कर दिया है। ये वही कांग्रेस पार्टी है जो चुनाव से पहले अकाली दल के माफ़ियाओं को जेल भेजने की बात करती थी लेकिन आज उन्हें जेल भेजना तो दूर की बात है बल्कि खुद माफ़ियाओं से हाथ मिलाकर भ्रष्टाचार करने में जुट गई है।
 पंजाब में बालू रेत के खनन के चार टेंडर हुए हैं और जिनको ये टेंडर मिले हैं वो नाम सारी कहानी खुद बयां कर देंगे। एक टेंडर अमित बहादुर नामक शख्स को मिला है जो पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह के यहां खाना पकाने वाला नौकर है और जिसकी तनख्वाह मात्र 11 हज़ार रुपए है और इनके खाते में 5 हज़ार रुपए से ज्यादा का हिसाब नहीं है। इस टेंडर के लिए 11 हज़ार प्रति महीना कमाने वाले अमित बहादुर ने 26.51 करोड़ रुपए भरे हैं। अमित बहादुर भारत के नागरिक भी नहीं है, अमित मूल रूप से नेपाल के नागरिक हैं।  
 इसके अलावा तीन लोगों को और एक-एक टेंडर मिले हैं जिनके नाम हैं कुलविंदर पाल, बलराज सिंह और तीसरे हैं गुरविंदर सिंह। ये तीनो भी पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कम्पनी में उनके निजी कर्मचारी हैं जिनकी तनख्वाह 20 से 25 हज़ार रुपए से ज्यादा नहीं है। इन चारों टेंडर की मिलाकर कुल क़ीमत 48 करोड़ से ज्यादा है। हमारा प्वाइंट यह है कि सरकार के उपरी नेताओं की सहमति के बग़ैर यह कतई संभव नहीं है कि 11 हज़ार से 25 हज़ार कमाने वाले मंत्री के नौकर और कर्मचारी 48 करोड़ के टेंडर सरकार से हांसिल कर लें? और जब आम आदमी पार्टी के विधायक इस भ्रष्टाचार के मामले में मंत्री का इस्तीफ़ा मांगते हुए प्रदर्शन करते हैं तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है।  
 आम आदमी पार्टी का मानना है कि बालू रेत के खनन के इस भ्रष्टाचारी खेल में सरकार के उपरी स्तर के लोग भी शामिल हैं क्योंकि उपरी स्तर की रज़ामंदी के ऐसा खेल नहीं खेला जा सकता। अब खानापूर्ति के लिए और मामले को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की एक सदस्यीय कमेटी का गठन इसकी जांच के नाम पर किया गया है। हमारा मानना है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी इसकी जानकारी थी और अगर मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी तो उन्हें यह खानापूर्ति की कमेटी बनाने में एक महीने का वक्त क्यों लगाऔर मुख्यमंत्री इस मामले में सीधा आरोप झेल रहे अपने मंत्री राणा गुरजीत सिंह को सरकार से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखा रहे हैं?’ 
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