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पाकिस्तानी का साथ देने वाली ब्लैकलिस्टेड कम्पनी ‘डे-ला-रू’ को भारतीय नोट के पेपर सप्लाई का ठेका क्यों दिया गया? : AAP

May 29, 2017 07:05 PM
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कम्पनी से सरकार के सम्बंधों को नकार कर देश की जनता से झूठ बोला, जनता से माफ़ी मांगें वित्त मंत्री : AAP
 
एक अखबार में छपी ख़बर के आधार पर अब यह साफ़ हो जाता है कि साल 2010-11 में ब्लैकलिस्टिड हुई कम्पनी डे-ला-रू ने भारत को नोट छापने के लिए पेपर सप्लाई किया है।

इस ब्लैकलिस्टिड कम्पनी डे-ला-रू का नाम पनामा पेपर लीक में भी आया है और साथ ही यूके के सीरियस फ्रॉड ऑफ़िस ने भी इस कम्पनी की जांच की हुई है।

होशंगाबाद स्थित भारत सरकार के अंतर्गत चलने वाली प्रिटिंग प्रेस
(SPM) ने कोर्ट में डे-ला-रू नामक इस ब्लैकलिस्टिड कम्पनी पर नोट छापने के लिए घटिया गुणवत्ता (दोयम दर्ज़े) का पेपर देने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज़ कराया है और 11 करोड़ की रिकवरी फ़ाइल की है। देश के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने खुद 8 दिसम्बर 2016 को ट्वीट करके इस बात को नकारा था कि भारत सरकार का इस ब्लैकलिस्टिड कम्पनी से कोई सम्बंध नहीं है लेकिन अब सच सामने आ गया है और वित्त मंत्री महोदय को अपने झूठे बयान के लिए देश की जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए और देश की जनता के समक्ष यह साफ़ करना चाहिए कि आखिर क्या वजह थी कि पाकिस्तान का साथ देने वाली ब ब्लैकलिस्टिड कम्पनी डे-ला-रू को नोट का पेपर सप्लाई करने का ठेका दिया गया?
 पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रेस कॉंफ्रैंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा कि हमने इस मुद्दे को दिसम्बर 2016 में भी उठाया था जिस पर अब एक अखबार में छपी ख़बर के बाद मुहर लग गई है कि देश की वर्तमान भाजपा सरकार ने एक ब्लैकलिस्टिड कम्पनी डे-ला-रू को देश में नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले पेपर की सप्लाई का ठेका दिया था। यह वही कम्पनी है जिसे 2010-11 में पाकिस्तान का साथ देने के आरोप में भारत सरकार ने ब्लैकलिस्टिड कर दिया गया था।
 अख़बार की ताज़ा ख़बर के मुताबिक होशंगाबाद में स्थित भारत सरकार की नोट छपाई यूनिट (SPM) ने इस ब्लैकलिस्टिड कम्पनी डे-ला-रू के ख़िलाफ़ 100, 500 और 1000 के नोट के लिए घटिया पेपर की सप्लाई की है और नोट छपाई यूनिट कम्पनी ने डेलारू पर 11 करोड़ की रिकवरी का केस फ़ाइल किया है। डेलारू नामक यह वही ब्रिटिश कम्पनी है जिसका ख़ुलासा हमने दिसम्बर 2016 में किया था लेकिन उस वक्त वित्त मंत्री महोदय ने ट्वीट करके और उसके बाद ख़ुद इस कम्पनी ने भी इस बात को नकारा था कि इस कम्पनी और भारत सरकार के बीच कोई सम्बंध नहीं है। लेकिन अब इस कोर्ट केस के माध्यम से साफ़ हो जाता है कि भारत की वर्तमान सरकार ने इस ब्लैकलिस्टिड कम्पनी डे-ला-रू को पेपर को ठेका दिया था और फिर बाद में वित्त मंत्री महोदय ने देश की जनता से इस बारे में झूठ बोला।
इस ब्लैकलिस्टिड कम्पनी डे-ला-रू का नाम पनामा पेपर लीक में भी आया है और साथ ही यूके के सीरियस फ्रॉड ऑफ़िस ने भी इस कम्पनी की जांच की हुई है। भारत में सीबीआई ने साल 2010-11 में इस कम्पनी के पाकिस्तान का साथ देने के आरोपों की जांच की थी और उसके बाद ही भारत सरकार ने इस कम्पनी को ब्लैकलिस्ट किया था जिसकी जानकारी साल पहले उस वक्त के वित्त राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीणा ने राज्यसभा में दी थी कि इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के आधार पर इस ब्रिटिश कम्पनी पर आरोप है कि यह कम्पनी पाकिस्तान स्थित नकली भारतीय नोट छापने वाली प्रैस को मदद कर रही है और उस पाकिस्तानी प्रैस से आने वाले नकली नोट इस तरह से छापे गए हैं कि बैंक के कर्मचारी भी उन्हें नहीं पहचान पाते हैं,भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की इस कोशिश में उस वक्त की यूपीए सरकार ने इस कम्पनी को दोषी पाया था और इसे ब्लैकलिस्टेड किया था लेकिन वर्तमान की मोदी सरकार ने नए भारतीय नोटों की छपाई में इस कम्पनी को अपना साझेदार आखिर क्यों बनाया?
हम देश के वित्त मंत्री महोदय श्री अरुण जेटली से तीन सवाल पूछना चाहते हैं कि-
1.   दिसम्बर 2016 में इस कम्पनी के संदर्भ में देश की जनता से वित्त मंत्री महोदय ने झूठ क्यों बोलादेश की जनता से अपने झूठ के लिए माफ़ी मांगें वित्त मंत्री
2.   नोटबंदी की आड़ में देश की वर्तमान भाजपा सरकार देश की जनता से और क्या-क्या छिपा रही है?
3.   भाजपा सरकार की ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि एक ब्लैकलिस्टेड और देशद्रोही कम्पनी को वाइट-लिस्टेड करके उसकी सेवाओं को भारतीय मुद्रा छापने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में साझेदार बनाया गया?
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