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क्यूं अरविन्द पर निष्प्रभावी होते हैं षड्यंत्रों के नुकीले बाण ?

May 25, 2017 07:28 AM

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ रचे जा रहे तमाम उन षड़यत्रों का खुलासा हम फिर कभी करेंगे किन्तु इस लेख को पढ़ने से पहले इतना जान लिजिए कि जनता के जहन में वर्तमान में जो डाला जा रहा है वो और जनता न चाहते हुए भी जो बोल रही है वह सब ।

तमाम षडयंत्र व साज़िशों के बावजुद अरविन्द क्यूं इनसे जीत जाते है ? क्यूं अरविंद की आवाज तमाम आरोप-प्रत्यारोपों के बीच एक निश्छल, एक सादगी पूर्ण पवित्र आवाज जान पड़ती है? क्यूं बेईमान कहे जाने पर आम आदमी पार्टी के दुश्मन, समूचा विपक्ष पार्टी से निष्कासित लोग तक यह मानने को राजी नहीं होते कि अरविंद कभी बईमान नहीं हो सकता ।

मीडिया,सोशल मीडिया, भाजपा सहित सभी राजनैतिक दल कार्पोरेट घराने, P.R एजेंसियां 'आप' में शामिल हो चुकी कुछ काली भेडें व निकालें गए पार्टी विराधी मानसिकता वाले जयचंदों का एक एक अघोषित संगठनात्मक प्रयास है।
अब मैं  आपको यह साबित कर दिखाउंगा कि सत्य एंव ईमानदारी के विरुद्ध तमाम षडयंत्र व साज़िशों के बावजुद अरविन्द क्यूं इनसे जीत जाते है ? क्यूं अरविंद की आवाज तमाम आरोप-प्रत्यारोपों के बीच एक निश्छल, एक सादगी पूर्ण पवित्र आवाज जान पड़ती है? क्यूं बेईमान कहे जाने पर आम आदमी पार्टी के दुश्मन, समूचा विपक्ष पार्टी से निष्कासित लोग तक यह मानने को राजी नहीं होते कि अरविंद कभी बईमान नहीं हो सकता । कौन सी ताकत इस नाजुक मोड़ पर हो कट्टर दुश्मनों को भी अरविंद के साथ ला खड़ा करती है ? आज मैं  उस शक्ति के बारे आपको न सिर्फ विस्तार से बताऊंगा  बल्कि सहज शब्दों में यह भी समझाने का यत्न करूंगा कि अरविंद को राजनिति में रोकपाना क्यूं  नामुमकिन है? यह लेख पूरी तरह अरविंद केजरीवाल के उस एक महामंत्र का भावार्थ है जो अरविंद अक्सर अपने भाषणों में इस्तेमाल करते है, मेरी कोई औकात नहीं है जी, हम तो बहुत छोटे लोग हैं, कोई शक्ति है जो इस आन्दोलन को चला रही है, ‘हम अपनी राह चलते रहेंगें, ईश्वर हमें रास्ता दिखाएगा’ जरा गौर करना आम आदमी पार्टी के सफर पर और आन्दोलन से पहले घटी घटनाओं पर आपको हैरानी होगी कि कैसे इस पार्टी ने अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखे और कैसे बड़ी से बड़ी बाधाओं को पार किया । अपने इस लेख की कड़ी  में मैं आपको न सिर्फ इस आन्दोलन की अदृश्य ताकतों से रूबरू करवांउगा बल्कि पार्टी के भीतर से खोखला करने वाले घुनों की कथा व पार्टी के भीतर ऐसी ताकतों से निपटने का स्वविकसित मैकेनिज्म़ भी समझाउंगा, यह आन्दोलन कुछ हटकर है, इसलिए इसे समझने के लिए परम्परागत राजनैतिक बुद्धि काम नहीं आएगी, बल्कि यूं कहें कि पूरे लेख को समझने में बाधा बन जाएगी  तो अतिशयोक्ति न होगी, इसीलिए राजनीति के पंडित व खुद को कुशाग्र बुद्धिजीवी का भ्रम पाले बैठे तथाकथित राजनीतिज्ञ इस लेख को न ही पढें तो बेहतर होगा । राजनीति में रहते हुए राजनीति पर राजनैतिक आपाधापी से परे कुछ लिख व सोच पाना आसान नहीं होता किन्तु बावजूद इसके हम इस लेख के अगले भागों में वह तमाम प्रयास करने जा रहे हैं, इस लेख के माध्यम से मेरा वादा है आपसे कि इस लेख को पढ़ने के उपरांत आपको इस नई राजनीति को भली भांति समझने का एक नया दृष्टिकोण मिलेगा, अरविंद केजरीवाल की राजनीति को करीब से समझने के लिए हमें उन आध्यात्मिक शक्तियों को समझना पहली शर्त है जो सहज घटित हो रही इस राजनीति में अरविंद को सहजता, शांति एंव शक्ति देती हैं, अरविंद केजरीवाल को बाधित करने, दिग्भ्रमित करने व विचलित करने के लिए निकृष्टतम प्रयोग जिस समय विपक्ष कर रहा होता है अरविंद तब या तो विपासना में गहन सामाधि में अंतस में खुद को तालाश रहे होते हैं  या फिर इस अंधड़ में भी अप्रत्याशित रूप से सुकून निर्मित कर किसी मल्टीपलैक्स में राजनीति-3 देख रहे होते हैं, बिना किसी आलोचनाओं की परवाह किए यह सब अरविंद के लिए कैसे इतना सहज है विपक्ष इस गुत्थी को जितना सुलझाने का यत्न करता है यह गुत्थी उतनी ही और उलझ जाती है. यह सच है कि परंपरागत राजनीति में प्रवीण राजनीति के महारथियों के समक्ष परंपरागत दांव पेंच की राजनीति तिनके की तरह उड़ जाएगी किन्तु तिनका जान पड़ने वाली आप की राजनीति में इतना कुछ होने के बावजूद मैदान में डटे रहने का अदम्य साहस भारतीय राजनीति का समूचा परिदृष्य बदलने जा रहा है । अरविंद के खिलाफ एक के बाद एक षड़यंत्र और टीम पर एक के बाद एक अर्नगल आरोप कतई अप्रत्याशित नहीं हैं  बल्कि पंरपरांगत राजनीति के नियम बदलने निकले अरविंद कजरीवाल के अनुमानों से कम ही हैं, अरविंद संघर्ष के इस दौर में और भी विकट परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं क्योंकि वह शक्ति जो वास्तव में अरविंद के माध्यम से यह आंदोलन संचालित कर रही है जानती है कि अन्ततः जीत सच की ही होनी निश्चित है. कौन है वह शक्ति जो अरविन्द को जहान से टकराने का साहस देती है ?    जारी.........अगली कड़ी में ......

 

 

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