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पंजाब में दलितों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध आम आदमी पार्टी का वफद डीजीपी पंजाब को मिला

May 23, 2017 07:31 PM

-डीजीपी पंजाब को दलितों के साथ हो रहे अत्याचारों के लिए स्पैशल टास्क फोर्स बनाने की मांग की -फूलका
-पंचायती शामलाटों की वितरिता में दलितों के साथ हो रहे भेदभाव को तुरंत खत्म किया जाए
    आम आदमी पार्टी का वफद आज सीनियर नेता और पंजाब विधान सभा में विरोधी पक्ष के नेता ऐच.ऐस. फूलका के नेतृत्व में डीजीपी पंजाब को मिला और सूबे भर में दलितों के साथ हो रहे अत्याचारों से अवगत करवाया। इसके बाद वफद डायरैक्टर ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग को मिला और सूबे में पंचायती शामलाट जमीन की वितरिता समय दलितों के साथ हो रहे भेदभाव का मुद्दा उठाया। 

फूलका ने कहा कि पिछले साल संगरूर जिले के झलूर गांव में घटी घटना इस की एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते अमृतसर के बघ्घा गांव में दलित व्यक्ति कश्मीर सिंह पर की तशदद्द का मामला आज के समय में दलितों की हालत ब्यान करता है।


    पत्रकारों को संबोधन करते फूलका ने कहा कि पिछले एक दशक में दलितों पर अनगिणत अत्याचार हुए हैं। एनसीएससी के आंकड़ों के अनुसार 2007 में आई 651 शिकायतों के मुकाबले पिछली अकाली सरकार के कार्याकाल में इनकी संख्या बढ़ कर 12, 834 हो गई। उन्होंने कहा कि इन अत्याचारों का मुख्य कारण राजनैतिक नेताओं की शह प्राप्त गुंडों द्वारा दलितों को उनके अधिकारों से वंछित करना है। 
    फूलका ने कहा कि पिछली सरकार दौरान अकाली दल के गुंडे दलितों पर अत्याचार करते थे और यह काम अब कांग्रेसी नेताओं की शह प्राप्त व्यक्ति कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पिछले 10 सालों में दलितों विरुद्ध हुए अत्याचारों के लिए एक स्पैशल टॉक्स फोर्स का गठन किया जाए और इन मामलों में शामिल व्यक्तियों विरुद्ध उच्च कार्यवाही की जाए। 
    इस उपरांत यह वफद डायरेक्ट ग्रामीण विकास और पंचायती विभाग को मिला और शामलाट की जमीन की वितरिता में दलितों के साथ किये जा रहे भेदभाव के मुद्दे को उठाया किया। आप नेताओं ने कहा कि पिछले समय दौरान इस में भेदभाव के कारण दलितों और उच्च श्रेणी के लोगों में लड़ाई की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसा देखने को मिला है कि राजनैतिक नेता अच्छी जमीन अपने चहेते को दिलाते हैं और बंजर जमीन दलितों को दी जाती है। इस दौरान जब दलित श्रेणी के साथ सम्बन्धित व्यक्ति अपने हकों के लिए आवाज उठाते हैं तो उनके विरुद्ध राजनैतिक शह के साथ कार्यवाहियों की जातीं हैं। 
    फूलका ने कहा कि पिछले साल संगरूर जिले के झलूर गांव में घटी घटना इस की एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते अमृतसर के बघ्घा गांव में दलित व्यक्ति कश्मीर सिंह पर की तशदद्द का मामला आज के समय में दलितों की हालत ब्यान करता है। उन्होंने कहा कि पंजाब शामलाट रूल 1964 के नियमों को छींके टांग कर पंचायती जमीन की बोली लगाई जाती है। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक शामलाट की जमीन का एक तिहाई हिस्सा दलित वर्ग के लोगों के लिए निर्धारित किया गया है परंतु ऐसी शिकायतें मिलीं हैं कि बहुत से स्थानों पर इस कानून को लागू नहीं किया जाता। 
    फूलका ने कहा कि कानून के मुताबिक पंचायती जमीन की बोली सम्बन्धित क्षेत्र के बीडीओ, बीडीपीओ या डीडीपीओ की हाजिरी में किया जाना चाहिए परंतु आम तौर पर इसको गलत ढंग के साथ पंचायत सैक्ट्री और पंचायत की हाजिरी में कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा राजनैतिक नेताओं और आधिकारियों की मिलीभुगत के साथ ही संभव हो सकता है। 
    आप नेताओं ने मांग की कि शामलाट के जमीन की बोली एक समिति की देखरेख अधीन की जानी चाहिए। जिस में दलित वर्ग के साथ सम्बन्धित व्यक्तियों को भी शामिल किया जाना चाहिए और सम्बन्धित एम.एल.ए उस समिति का चेयरमैन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले समय में दलितों को दी जाने वाली और दूसरी जमीन इस बार फेरबदल करके बोली की जानी चाहिए। 
 

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