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मैनीफैस्टो कहे जा रहे इस झूठ के पुलिंदे को जनता कैसे पचा पायेगी ?

गोपाल शर्मा | January 10, 2017 05:07 PM
गोपाल शर्मा

कोई कारण नहीं कि आम लोग कैप्टन के दिवास्वपन जैसे वादों पर विश्वास करें

कांग्रेस  ने पंजाब चुनावों को भुनाने के लिए जो चुनावी घोषणापत्र जारी किया है उसपर स्वयं कांग्रेस के लोग ही नुक्ताचीनी करने लगे हैं, आम जन का तो कहना ही क्या । ज्य़ादातर लोग और दूसरे दल इसे झूठ का पुलिंदा कहकर इसकी निंदा कर रहे हैं। गत दिवस दिल्ली में कांग्रेस मैनीफैस्टो को जारी करते हुए जिन नौ नुक्तों का जि़क्र करके पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पीठ थपथपाई है उनमें से अगर पांच पर ही गहराई से मंथन करें तो ये बात उभर कर सामने आती है कि ये तो लगभग वही बातें हैं जो कांग्रेस ने अपने २००२ के घोषणापत्र में भी कही तो ज़रूर थी लेकिन कभी उन पर अमल नहीं किया। 

कांग्रेस  ने पंजाब चुनावों को भुनाने के लिए जो चुनावी घोषणापत्र जारी किया है उसपर स्वयं कांग्रेस के लोग ही नुक्ताचीनी करने लगे हैं, आम जन का तो कहना ही क्या । ज्य़ादातर लोग और दूसरे दल इसे झूठ का पुलिंदा कहकर इसकी निंदा कर रहे हैं।


पहला खास वादा है नशे के विरुद्ध युद्ध। मामला ये कि जितने भी नशे के स्मगलर हैं, उनको शह देने वाले पुलिस अधिकारी हैं, नौकरशाह हों या स्वयं नेतागण, कांग्रेस उनके प्रति शून्य सहानुभूति दर्शाते हुए सख्त कदम उठाएगी। इसके अतिरिक्त  नशे के खिलाफ युवाओं को जागरूक करने और नशाखोरों के पुनर्वास के लिए एक जागृति अभियान चलाया जाएगा तथा हर जि़ले में नशो के मामलों से निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोली जाएंगी। कांग्रेस का दावा यहां तक है कि हर वर्ष पांच फीसदी शराब के ठेके बंद कर दिए जाएंगे और सत्ता में आने के तीस दिनों के अंदर नशा बेचने वालों की संपत्ति को जफ्त करने का कानून बना लिया जाएगा। कहने का अभिप्राय ये कि एक माह में कांग्रेस नशे पर कंट्रोल कर लेगी।
अब आम आदमी सवाल उठाता है कि क्या कैप्टन नहीं जानते कि उनकी पार्टी के भी कुछ लोग नशे के धंधे में संलिप्त हैं। जहां तक शराब का सवाल है तो पोंटी चड्ढा को ऊपर चढ़ाने वाली कांग्रेस ही थी, तो ऐसे में उनपर क्यूं यकीन किया जाए कि वे फिर से कोई नया पोंटी चड्ढा नहीं पैदा करेंगे ? और शराब को राज्य की आय का मुख्य  स्त्रोत नहीं बनाएंगे? हां ये बात ज़रूर है कि मैनीफैस्टो में नशे की मद को शामिल करके कैप्टन ने अपने आका राहुल गांधी का दिल ज़रूर जीत लिया। पाठकों को याद होगा कि राहुल पंजाब में नशे के खिलाफ बयान देकर काफी देर चर्चा में रहे थे और शिरोमणि अकाली दल तो उनके खिलाफ अदालत में भी चली गई थी। बहरहाल लोग कैप्टन के इस वादे को झूठा और कोरी गप्प करार दे रहे हैं।
दूसरी खास बात है रोज़गार पैदा करना। कैप्टन ने घर घर रोज़गार नाम की तथाकथित योजना बनाई है जिसके तहत आगामी पांच साल में हर परिवार के एक व्य1ित को रोज़गार दिया जाएगा। जब तक रोज़गार नहीं मिलेगा तब तक पढ़े लिखे युवाओं को 2500 रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा। इसके लिए जि़ला स्तर पर रोज़गार कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। कांग्रेस का ये वादा भी असमंजस से भरा है। अजीब वादा है ये कि हर जि़ले के मुख्यालय  पर एक रोज़गार कार्यालय  होगा। इनसे कोई पूछे कि क्या  भारत के हर जि़ले में पहले ही से जि़ला रोज़गार केंद्र स्थापित नहीं हैं जहां लाखों पढ़े लिखे लोगों के नाम बरसों से नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो इसमें नया क्या है। जैसे केंद्र ने प्लानिंग कमीशन का नाम बदलकर नीति आयोग करके वाहवाही लूटने का प्रयास किया उसी गफलत में अब कांग्रेस जी रही है। लोग जानते हैं कि रोज़गार पैदा करने के लिए रोज़गार केंद्र की नहीं, इंडस्ट्री की ज़रूरत होती है और ज़रूरत पड़े तो बाहर की इंडस्ट्री को आमंत्रित करना होता है जबकि यहां आने को अभी कोई बड़ी कंपनी तैयार नहीं।
तीसरा बड़ा वादा है कृषि को प्रोत्साहित करना। कहा गया है कि भले ही ये केंद्र की जिम्मेवारी है फिर भी सत्ता में आने पर उनकी सरकार किसानों का कर्ज माफ कर देगी,  बिजली पानी की सुविधा दी जाएगी, प्राकृतिक आपदाओं के वक़्त  दिया जाने वाला मुआवज़ा बढ़ा कर 2000 रुपए प्रति एकड़ किया जाएगा, किसानों को पेंशन दी जाएगी और किसी परिवार में आत्महत्या होने पर उनके वारिसों को १० लाख की सहायता राशि दी जाएगी। हैरत की बात है कि किसी किसान के आत्महत्या करने पर मगरमच्छी आंसू बहाने वाली कांग्रेस  को यह क्यूं  सूझा, अब ये बात किसान भी समझने लगे हैं। अपने पिछले कार्यकाल में कैप्टन ने ऐसा कौन सा तीर मारा था जिसके बल पर किसानों को लाभ मिला हो। जो सुविधाएं पहले से ही जारी हैं उन्हें जारी रखने का मतलब तो ये है कि कांग्रेस भी अकाली सरकार की राह पर चल निकली है, लेकिन इससे किसान कितने प्रसन्न हैं ये तो उन्होंने मंडियों में अकाली मंत्रियों का घेराव करके पहले ही बता दिया है। आगे भी वे ऐसा ही करेंगे, ये तय है।
चौथी बड़ी बात जो कही गई है वह है आर्थिकता को पटरी पर लाना। कांग्रेस ने वादा किया है कि पंजाब को आर्थिक रूप में फिर से नंबर वन बनाया जाए। कहा गया है कि उनके कार्यकाल में पंजाब देश का नंबर वन प्रांत था जोकि अब 19 वें पायदान पर खिसक गया है। दूसरे प्रांतों में भाग चुकी इंडस्ट्री को वापिस लाने के लिए पांच रुपए प्रति युनिट बिजली आपूर्ति की जाएगी और ऐसी एक्साइज एंड टेक्स पालिसी बनाई जाएगी जो उद्योगों को प्रोत्साहित करे। कैप्टन का ये दावा या वादा भी खोखला नारा है। क्या कैप्टन भूल चुके हैं कि उनके अपने कार्यकाल में पंजाब से दो हज़ार से अधिक उद्योग गुजरात, मध्यप्रदेश और निकटवर्ती राज्यों हरियाणा और हिमाचल में चले गए थे। इंस्पेक्टरी राज जिसे कि स्वयं कैप्टन बढ़ावा दे रहे थे, उद्योगपतियों पर बहुत भारी पड़ा था जिससे छुटकारा न मिलने पर उन्होंने पंजाब से प्रस्थान करना ही बेहतर समझा। अब लोग कांग्रेस को झूठी पार्टी न कहें तो और क्या कहें ? कांग्रेस तो अपने कार्यकाल में 1.70 करोड़ की इन्वेस्टमैंट पंजाब में लाने और 20 लाख नौकरियां दिए जाने का दावा भी करती है जोकि हकीकत से कोसों दूर है।
और एक खास बात ये कि महिला शक्ति को बढ़ावा देने की बात भी कांग्रेस कर रही है। अपने चूनावी वादे में कैप्टन ने सभी सरकारी, गैर सरकारी संस्थानों में नौकरी के लिए महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की बात कही है। इनके अतिरिक्त  लड़कियों को पहली जमात से पीएचडी तक मुफ्त  शिक्षा देने का वादा किया गया है। ये भी दिव:स्वपन देखने जैसी बात है। कांग्रेस ने आज तक देश पर आधी सदी से ज्यादा सालों तक शासन किया, गरीबी हटाओ जैसा नारा भी दिया, गऱीबी तो खैर हटी नहीं हां धीरे-धीरे गरीब ज़रूर इस धरा से हट गए। महिला शिक्षा के नाम पर मध्यवर्गीय परिवारों का जो शोषण हुआ वह किसी से छुपा नहीं, अब कोई कैसे यकीन करेगा कि कांग्रेस  महिला हितैषी हो गई। कैप्टन एक भी उदाहरण नहीं दे सकते कि उनके कार्यकाल में किसी विभाग में 33 फीसदी महिला आरक्षण अक्षरश: लागू हुआ था। पांच साल बाद फिर से वही बातें दोहराना कांग्रेस की उस मानसिकता को दर्शाता है जिसके सहारे वो पहले सत्ता में आती रही है, लेकिन अब आम आदमी स्याना हो गया है और कांग्रेस को मुंह तोड़ जवाब देने को तैयार बैठा है।
इस बीच आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी कांग्रेस के चुनावी मैनीफैस्टो को झूठ का पुलिंदा बताया है। पंजाब डॉयलॉग और मैनीफैस्टो कमेटी के चेयरमैन कंवर संधु ने कहा कि इस पर किसी भी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोगों से सीधा संपर्क किए बगैर, वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाए गए मैनीफैस्टो में ऐसा कुछ है ही नहीं जो भरोसे के काबिल हो। उन्होंने कहा कि स्वयं को पंजाब की पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी अपना मैनीफैस्टो दिल्ली से जारी करे तो समझ लेना चाहिए कि वो पंजाब की कितनी हमदर्द है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रतिनिधि राघव चड्ढा ने कहा है कि आम लोग कांग्रेस के मैनीफैस्टो को स्वीकार नहीं करेंगे क्यूंकि इसमें कोई विश्वसनीयता नहीं है। पंजाब के लोगों को नौकरियां और पेंशन देने के वादे पर टिप्पणी करते हुए राघव ने कहा कि 2002 में सत्ता में आते ही कैप्टन ने सबसे पहले नई भर्तियों और अन्य जन कल्याण योजनाओं पर पाबंदी आयद कर दी थी। अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कैप्टन पंजाब को क्या दे सकते हैं।

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