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घूबाया के बेटे को जलालाबाद से फाजिल्का बदलने के लिए सुखबीर बादल ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ गुप्त समझौता किया, राए सिक्ख भाईचारे के सख्त विरोध के डर से सुखबीर ने अपनी सीट ऐलान में देरी की, वड़ैच और मान का दावा

January 03, 2017 09:15 AM
चंडीगढ़:
पंजाब के उप मुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल का अपनी जलालाबाद सीट के ऐलानने में देरी करना बिना किसी मकसद के नहीं है और देरी करने में दिया गया तर्क बिल्कुल तकरहीन है क्योंकि वह कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ समझौता कर अपनी सीट को सुरक्षित करना चाहते हैं। 

आप नेताओं ने कहा कि सुखबीर बादल ने कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिन्दर सिंह से गुप्त तरीके से पहुंच की और भरोसे योग सूत्रों से पता चला है कि वह (सुखबीर बादल) ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह के घुटनों को हाथ लगा कर यह मांग की है कि कांग्रेस की तरफ से उसके खिलाफ चुनाव मैदान में उतारे गए शेर सिंह घुबाया के बेटे दविन्दर सिंह घुबाया को वहां से बदला जाए। आप नेताओं ने कहा कि यह हमारे ध्यान में आ गया है कि सुखबीर सिंह बादल दविन्दर गर्चा को जलालाबाद से फाजिल्का शिफ्ट करवाना चाहते हैं। 

आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब कनवीनर गुरप्रीत सिंह वड़ैच और संगरूर से संसद मैंबर भगवंत मान ने एक सांझे ब्यान में कहा कि सुखबीर बादल अपने जद्दी हलके जलालाबाद से चुनाव लडऩे को सुरक्षित नहीं समझते, क्योंकि उनको डर है कि बादल परिवार के खिलाफ राए सिक्ख भाईचारे के सख्त विरोध के कारण उनको हार का सामना करना पड़ेगा। 
आप नेताओं ने कहा कि सुखबीर बादल ने कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिन्दर सिंह से गुप्त तरीके से पहुंच की और भरोसे योग सूत्रों से पता चला है कि वह (सुखबीर बादल) ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह के घुटनों को हाथ लगा कर यह मांग की है कि कांग्रेस की तरफ से उसके खिलाफ चुनाव मैदान में उतारे गए शेर सिंह घुबाया के बेटे दविन्दर सिंह घुबाया को वहां से बदला जाए। आप नेताओं ने कहा कि यह हमारे ध्यान में आ गया है कि सुखबीर सिंह बादल दविन्दर गर्चा को जलालाबाद से फाजिल्का शिफ्ट करवाना चाहते हैं। 

आप नेताओं ने कहा कि लोगों के अकाली-भाजपा सरकार के खिलाफ गुस्से और राए सिक्ख भाईचारे के आम आदमी पार्टी को समर्थन के कारण बादलों ने यह सही अंदाजा लगाया है कि जलालाबाद में उनकी हार यकीनी है। उन्होंने कहा कि राए सिक्ख भाईचारे की तरफ से आम आदमी पार्टी को भरपूर समर्थन दिया जा रहा है क्योंकि वह कांग्रेस की सिक्ख विरोधी नीतियों के कारण कांग्रेस को कभी भी वोट नहीं डालेंगे।

वड़ैच और मान ने कहा कि सुखबीर बादल को मिली राजनैतिक जानकारी अनुसार उनका वहां से जितना संभव नहीं है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने वहां बादल परिवार को चुनौती दी हुई है। आप नेताओं ने कहा कि शुरू में तो सुखबीर बादल ने घुबाया के परिवार की तरफ से चलाए जाते कालेज पर छापा मार कर उसकी बाजू मरोडऩे की कोशिश की। इस के इलावा हरसिमरत कौर बादल की तरफ से घुबाया को नाशुकरे व्यक्ति बता कर उनका अपमान किया गया और साथ ही पार्टी छोडऩे के लिए भी कहा गया। 
आप नेताओं ने कहा कि जलालाबाद हलके में राए सिक्ख भाईचारे की बहुसंख्यक है और वह शेर सिंह घुबाया के अकाली दल के लिए प्रचार के ऐलान के बाद में कभी भी अकाली दल को वोट नहीं डालेंगे। आप नेताओं ने कहा कि जलालाबाद हलके में राए सिक्ख भाईचारे का काफी राजनैतिक आधार है और उन्होंने खुद को शिरोमणी अकाली दल से ठग्गा हुआ महसूस करते हैं। 
आप नेताओं ने कहा कि लोगों के अकाली-भाजपा सरकार के खिलाफ गुस्से और राए सिक्ख भाईचारे के आम आदमी पार्टी को समर्थन के कारण बादलों ने यह सही अंदाजा लगाया है कि जलालाबाद में उनकी हार यकीनी है। उन्होंने कहा कि राए सिक्ख भाईचारे की तरफ से आम आदमी पार्टी को भरपूर समर्थन दिया जा रहा है क्योंकि वह कांग्रेस की सिक्ख विरोधी नीतियों के कारण कांग्रेस को कभी भी वोट नहीं डालेंगे।
आप नेताओं ने एक बार फिर से सुखबीर बादल को एक बार फिर चुनौती दी है कि वह जलालाबाद से ही चुनाव लड़े, न कि राजनैतिक सरप्रस्ती लेने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह के पीछे भागें। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस की तरफ से ऐसा किया जाता है तो यह आम आदमी पार्टी के स्टैंड को प्रमाणित करेगा कि सुखबीर बादल और कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से एक दूसरे के साथ मिल कर आम आदमी पार्टी के खिलाफ ऐसंबली चुनाव लड़ी जा रही हैं।
 
 
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