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Interview

उनके पास संसाधन हैं और हमारे पास साफ नीयत: सत्येंद्र जैन

November 30, 2014 12:56 PM

आम आदमी पार्टी के नेता व दिल्ली सरकार के पूर्व स्वास्थ्य एवं उद्योग मंत्री सत्येंद्र जैन से हमारे मुख्य संपादक गोपाल शर्मा ने "आप की क्रांति" शक्ति नगर कार्यालय में खास मुलाकात की। देखिए इस मुलाकात के कुछ महत्वपूर्ण अंश।

आप की क्रांति - अगामी विधान सभा चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी की क्या रणनीति रहेगी, कैसे आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी और क्या इसके प्रमुख मुद्दे होंगे ?
सत्येंद्र जैन - हमारी रणनीति वही रहेगी हम लोग फिर जनता के बीच जाएंगे और उनसे पूछेंगे, उनसे बात करेंगे, उनकी समस्याओं के निदान की योजनाएं उनके बीच बैठ कर बनाएंगे और बिना समय गंवाए उन्हें दूर करने के उपाया प्रभावी ढं़ग से लागू करेंगे। पहले और अब में सिर्फ यही फर्क है कि पहले हम बता रहे थे कि हम क्या करेंगे, अब हम दो चीज़ बताएंगे कि जब हमारी 49 दिन की सरकार थी उसमें हमने क्या किया था और आगे हम इसको कैसे बढ़ाएंगे. दिल्ली में हमने ‘दिल्ली डायलाॅग’ शुरू किया है तो जनता से पूछकर हम अपना चुनावी घोषणा पत्र तैयार करेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा हर काम पूरी तरह पारदर्शी तरीके से जनतता की भागीदारी के साथ पूरा हो।

आप की क्रांति - हमें यह बताएं कि जब आप स्वास्थय मंत्री थे तो आपकी 49 दिनों में क्या उपलब्धियां रही, ताकि जनता यह समझ सके कि पूर्व के स्वास्थ्य मंत्रियों में और आम आदमी पार्टी के स्वास्थ्य मंत्री में वास्तव में क्या अंतर था ?

सिस्टम तो अभी भी बहुत पुराना चल रहा है हम अभी भी 30-50 साल पुराना सिस्टम इस्तमाल कर रहे हैं। बहुत सारे लोगों को नाॅन टेक्निकल वर्क करने पडते हैं। जैसे डाॅक्टर्स हंै डाॅक्टर का मेन काम जो है उसके अलावा उन्हें छोटे-छोटे 20 काम और करने होते हैं। जिसकी वजह से वह मरीजों को ज्यादा समय नहीं दे पाते यदि यह बंद हो जाएं नाॅन प्राॅडक्टिव वर्क बंद हो जाए तो बेहतर होगा।

 

सत्येंद्र जैन - जब मैंने स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यभार संभाला तो सबसे पहले मैंने अस्पतालों के दौरे किए वहां जाने के बाद मैंने देखा कि हालात बहुत बुरे हैं। मरीज़ परेशान थे, सफाई नहीं थी और सबसे बडी समस्या यह थी कि दवाई नहीं मिल रही थी तो सबसे पहले हमने दवाइयां सात दिन के अंदर उपलब्ध करवाई। और हमने कड़े निर्देश जारी किए कि तमाम उपकरण तुरंत ठीक किए जाएं। बहुत सारे टेस्ट जो बाहर करने को बोले जाते थे उन्हें अस्पताल में ही करने की हिदायतें जारी की गई। हमंे काफी सारे हस्पतालों से शिकायतें मिली तो हमने 16 मेडिकल सुप्रिटेंडेंट के तबादले किए, उससे बहुत असर नजर आने लगा। उसके आलावा हमने जैनेटिक मेडिसिऩ को अनिवार्य किया। दिल्ली सरकार के 38 हस्पताल हैं जिनके लिए दवाईयां अलग-अलग खरीदी जाती थी हर जगह खरीद की टीमें थी तो हमने खरीदारी को सेंट्रलाईज कर दिया। जहां पहले अलग- अलग जगह से दवाईयां खरीदने की वजह से 400 करोड़ रूपए खर्च होते थे उसको हमने एक साथ लेना शुरू कर दिया जिससे दवाईयां हमें आधे रेट में मिलने लगी। उसके अलावा हमने 100 आई सी यू युक्त एम्बुलेंस का ऑर्डर दिया जिससे की इमरजेंसी में मदद मिल सके। 2 अस्पताल थे जो 10-10 साल से अधर में लटके थे उन्हें 6 महीने में शुरू करने का आदेश दिया किंतु अभी उसकी ओपीडी ही शुरू हो पाई है अगर हमारी सरकार रहती तो वह अस्पताल अब तक पूरी तरह चलन में होते। 67 साल में दिल्ली सरकार ने 10600 बेड़ दिल्ली के अस्पतालों में बनाए हैं हमारा बहुत ही मैसिव प्रोग्राम था की हम पांच साल के अंदर दिल्ली सरकार के अंदर 25000-30000 बेड़ और बनाएं। इसके अलावा आपको आश्चर्य होगा की दिल्ली सरकार जो अस्पताल बना रही है उसमें 100 बेड बनाने में लगभग 125 करोड़ रूपए खर्च कर रही है। जो कि बहुत असानी से अच्छी प्लानिंग करके 20-25 करोड़ रूपए खर्च कर बनाए जा सकते हैं। इस तरह की जो चीज़ें हैं वह देश की तरक्की में बहुत बडी बाधा हैं। ऐसी कई सारी चीज़ें पता लगी और हमने सरकार गिरने के बाद भी कई सारी चीजें जानी हैं जो कि हमंे आगे काम आएंगी।

आप की क्रांति - जो सरकारी मशीनरी है उसमें आपको क्या कमी लगी जो आपको लगता हैें तुरंत बदलने की आवश्यकता है और जिससे इस विभाग में चुस्ती लाई जा सके ?

सत्येंद्र जैन - सिस्टम तो अभी भी बहुत पुराना चल रहा है हम अभी भी 30-50 साल पुराना सिस्टम इस्तमाल कर रहे हैं। बहुत सारे लोगों को नाॅन टेक्निकल वर्क करने पडते हैं। जैसे डाॅक्टर्स हंै डाॅक्टर का मेन काम जो है उसके अलावा उन्हें छोटे-छोटे 20 काम और करने होते हैं। जिसकी वजह से वह मरीजों को ज्यादा समय नहीं दे पाते यदि यह बंद हो जाएं नाॅन प्राॅडक्टिव वर्क बंद हो जाए तो बेहतर होगा। यह चीज़ंे हमें ठीक करनी पडेंगी. एक बहुत बडी दिक्कत है कि आप किसी भी सरकारी हस्पताल में जाएंगे तो मरीज़ को रेफर कर दिया जाता है। तो फिर सरकारी अस्पताल बनाने का फायदा हमें समझ नहीं आता।

आप की क्रांति - पिछले कार्यकाल में आपने जो कुछ भी अनुभव लिए इतने दिनों आपको सिस्टम को समझने में समय लगा, अब की बार यदि यही मंत्रालय आपको दुबारा मिलता है तो आप कौन से कामों को प्राथमिकता के आधार पर करना पसंद करेंगे ?

सत्येंद्र जैन -  सबसे पहले तो जो काम हमने शुरू किए थे उन सब को पूरा करेंगे। हमने प्लाॅन बनाया था कि हम सात दिनों में क्या कर सकते हैं ? एक महीने में क्या कर सकते है ? 6 महीने में क्या कर सकते हैं और एक साल में क्या कर सकते है ? पांच साल में हमें क्या-क्या करना है ? तो इस तरह से हमने पूरा प्लाॅन बनाया था अपना रोड मेप बनाया था। उस रोड मैप को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया गया था। जैसे कि यह था कि दिल्ली के लोगों को अस्पताल के लिए क्यों 10-10 किलोमीटर दुर जाना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं सबके घर के नजदीक मिलनी चाहिए, उस प्रोजक्ट पर हमने काफी हद तक काम किया था। इस तरह से इम्यूनाईजेशन के इंजेक्शन बच्चों को लगाते हैं, बहुत सारे लोग यह इंजेक्शन नहीं लगा पाते, हमने यह प्लाॅन बनाया था कि दिल्ली के सभी बच्चों को चाहे वह गरीब हों या अमीर सरकार सभी को इम्यूनाइजेशन मुफ्त में करवाएगी। यह कुछ एग्रेसिव प्रोग्रामज़ हैं जिन्हें हम चलाएंगे और जैसे मैं सौभाग्यशाली रहा, एपीजे अब्दुल कलाम साहब से मेरी मुलाकात हुई। कुछ उन्होंने कुछ टिप्स दिए। बताया कि इन चीजों पे आप काम कीजिएगा। उसमें इम्यूनाइजेशन वाला एक काम था, मुझे बहुत अच्छा लगा। बहुत सारी चीजें ऐसी हैं कि जो कि शायद पहले ही हो जानी चाहिए थी। जैसे एक्सीडेंट का केस है किसी का ऐक्सीडेंट हो जाता है और उसके सामने अस्पताल है। अस्पताल वाले रिफ्यूज कर देते हैं लेने से हमने आर्डर किए थे कि कोई भी अस्पताल प्राईवेट अस्पताल हो या सरकारी रिफ्यूज़ नहीं कर सकता और 24 घण्टे कम से कम घायल की केयर उन्हें करनी ही पड़ेगी। कोई भी अस्पताल डेड बाॅडी के लिए मृतक के परिजनों को परेशान नहीं करेगा।

आप की क्रांति - सत्येंद्र जी इसके अलावा आपके पास उद्योग मंत्रालय भी था उसके बारे में भी कुछ बताये ? वहां आपने क्या-क्या काम किए ?

सत्येंद्र - उद्योग मंत्रालय में मेरी पहली मीटिंग जब व्यापरियों व उद्योगपतियों से हुई तो उनसे मैंने एक ही बात कही कि आप पहले साल में 20 फीसदी उत्पाद और 20 फीसदी रोज़गार बढ़ा दीजिए हमारी तरफ से आपको जो सुविधाएं चाहिए वह हम आपको देंगे। उन लोगों ने हमें 72 सुझाव की एक सूची सौंपी थी जिस पर हमने काम करना शुरू किया था। इसमें सबसे महत्वपूर्ण विवाद था कि औद्योगिक क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर कौन बनाएगा ? दिल्ली में 28-29 औद्योगिक क्षेत्र हंै उसमें से ज्यादातर में प्राथमिक सुविधाएं ही नहीं हैं. जैसे कि बिजली, पानी, सड़कें इत्यादि। उन लोगों ने हमें कहा कि आप लोग पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर दे दीजिए हम आपको उत्पादन व रोज़गार 20 क्या 50 फीसदी तक बढ़ा कर दे देंगे। सरकार का काम सुविधाएं देना है विकास तो उद्योग खुद ब खुद कर लेंगे। हमारी सरकार बनती है तो यह तमाम चीजें हम प्राथमिकता के आधार पर करेंगे।
आप की क्रांति - सत्येंद्र जी 49 दिन के मंत्री के कार्यकाल के अलावा आपको 8 महीने विधायक के रूप में भी काम करने का मौका मिला। इन 8 महीनों की उपलब्धि बताइए ?
सत्येंद्र जैन - पीडब्लूडी के अन्दर मेरी विधानसभा में जितनी भी सड़कें थी वह सभी बनवा दी गई हैं इन पर 20 से 25 करोड़ खर्च किया गया है। विधायक निधि के 4 करोड़ के करीब की धनराशि भी खर्च की जा चुकी है। दिल्ली जलबोर्ड के दो विभाग दिल्ली सरकार के अधीन थे उनकी परियोजनाओं को करवा दिया गया इसके अलावा डीडीए व एमसीडी के कारण बहुत सी दिक्कतें आई एमएलए फंड को भी खर्च करना दुश्वार हो गया साढ़े तीन करोड़ के काम पास करवा दिए हंै एमसीडी का तो सिस्टम ही बिगड़ा है या उनपर कोई दबाव था कोई भी काम करने के लिए राजी ही नहीं थे। पूर्व के नेताओं ने खम्भे, नाली, बल्व रेलिग व फुटपाथ जैसी समस्याओं में लोगों को फंसा कर रखा है बड़े काम की तो उन्हें आस ही नहीं होती। 90 फीसदी लोग एमसीडी के काम के लिए विधायकों के चक्कर काटते हैं। 10 फीसदी काम डीडीए व जलबोर्ड के होते हैं। इस प्रणाली को ठीक करना पड़ेगा इन छोटे-छोटे कामों को करवाने का अधिकार स्थानीय संगठनों को देना मेरे विचार में उचित होगा क्योंकि वह अपनी आवश्यकता के अनुरूप अपने काम करवा सकेंगे। व्यवस्थाएं पूरी तरह बिगड़ी हुई हैं। जिस विधान सभा में विकास के नाम पर विधायक निधि से 4 करोड़ खर्च किया जाता है उसी विधान सभा में डीसिल्टिंग के नाम पर 25 से 30 करोड़ खर्च कर दिया जाता है। नालियों से निकलने वाला यह गाद बरसात में फिर से उन्हीं नालियांे में भर जाता है। इसी प्रकार शहर का कूड़ा गार्वेज़ ट्रीटमेंट प्र्लाॅन्ट तक पहुंचाने के काम पर भी औसतन इतना ही पैसा खर्च कर दिया जाता है। कुल मिला कर एक-एक विधान सभा में 100 से 200 करोड़ तक फंड खर्च किया जा रहा है। हम जनता को यह भी बताएंगे कि आपके क्षेत्र में केवल विधायक निधि का 4 करोड़ ही नहीं आया बल्कि इससे कई अधिक पैसा आया है। इसका भी हिसाब जनता को अपने प्रतिनिधियों से पूछना होगा।

आप की क्रांति - आने वाले चुनावों में विपक्ष से क्या चुनौती है ?

सत्येंद्र जैन - विपक्ष के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उनके पास खर्च करने के लिए बेतहासा पैसा है। हमारे साथ जनता का प्यार, हमारी साफ नीयत व ईमानदारी है। हम सब जानते हैं कि जीत सच्चाई की ही होती है।

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